भारत की परमाणु पनडुब्बियों पर पाक की चिंता बढ़ी, पूर्व राजदूत ने जताया रणनीतिक खतरा

भारत की परमाणु पनडुब्बियों पर पाक की चिंता बढ़ी, पूर्व राजदूत ने जताया रणनीतिक खतरा

भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और परमाणु प्रतिरोधक रणनीति को लेकर पाकिस्तान में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र में रह चुकीं पूर्व स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने दावा किया है कि भारत अपनी परमाणु क्षमता को समुद्र के रास्ते और अधिक मजबूत बना रहा है। उनके मुताबिक, यदि भारत ने वास्तव में परमाणु हथियारों को पनडुब्बियों पर ऑपरेशनल रूप से तैनात करना शुरू कर दिया है, तो यह पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति के लिए एक नई चुनौती साबित हो सकती है।

जियो न्यूज पर वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर के कार्यक्रम में बातचीत के दौरान मलीहा लोधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आ रही रिपोर्टों के अनुसार भारत अपनी न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने करीब 12 परमाणु वॉरहेड्स को पनडुब्बियों पर तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, इस दावे की भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

लोधी ने बातचीत में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की रणनीतिक क्षमता में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। उनका कहना था कि यदि परमाणु हथियारों को पनडुब्बियों पर मिसाइलों के साथ सक्रिय रूप से तैनात किया जा रहा है, तो यह केवल हथियारों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि परमाणु प्रतिरोध की प्रकृति में बदलाव का संकेत भी माना जा सकता है।

पूर्व पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों लंबे समय से परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और दोनों देशों ने अब तक ऐसी व्यवस्था बनाए रखी थी, जिसमें परमाणु वॉरहेड और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलों को सामान्य परिस्थितियों में अलग-अलग रखा जाता था। उनके अनुसार, यदि भारत अब ऑपरेशनल स्तर पर इस व्यवस्था में बदलाव कर रहा है और वॉरहेड्स को सीधे तैनात मिसाइलों के साथ जोड़ रहा है, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने औपचारिक रूप से अपनी घोषित परमाणु नीति में किसी बड़े परिवर्तन की घोषणा नहीं की है, लेकिन यदि व्यवहारिक स्तर पर तैनाती का तरीका बदल रहा है तो उसका असर पूरे दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। लोधी का कहना था कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

मलीहा लोधी ने यह भी कहा कि समुद्र में तैनात परमाणु हथियार किसी भी देश को अधिक विश्वसनीय सेकेंड स्ट्राइक क्षमता प्रदान करते हैं। उनका तर्क था कि यदि किसी देश की भूमि आधारित सैन्य क्षमता पर हमला भी हो जाए, तब भी समुद्र में मौजूद परमाणु पनडुब्बियां जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहती हैं। इसी वजह से उन्होंने इस संभावित तैनाती को पाकिस्तान के लिए गंभीर रणनीतिक चुनौती बताया।

इस चर्चा के दौरान उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों पर पाकिस्तान को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, बदलते रक्षा परिदृश्य में केवल हथियारों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उनकी तैनाती का तरीका और उनकी परिचालन स्थिति भी उतनी ही अहम होती है।

उधर, SIPRI की हालिया रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान दोनों की परमाणु क्षमताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार मौजूद हैं, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार बताए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने परमाणु शस्त्रागार में लगातार वृद्धि की है और बीते वर्ष की तुलना में लगभग 10 नए परमाणु हथियार शामिल किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी रक्षा नीति के तहत भूमि, वायु और समुद्र—तीनों माध्यमों से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की दिशा में लंबे समय से काम कर रहा है। इसे न्यूक्लियर ट्रायड कहा जाता है, जिसका उद्देश्य किसी भी संभावित हमले की स्थिति में विश्वसनीय जवाबी क्षमता बनाए रखना होता है। समुद्र में संचालित परमाणु पनडुब्बियां इसी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जाती हैं।

हालांकि, रक्षा मामलों के जानकार यह भी कहते हैं कि किसी भी देश की परमाणु तैनाती से जुड़े दावों की पुष्टि केवल स्वतंत्र रिपोर्टों के आधार पर नहीं की जा सकती। आधिकारिक जानकारी, रक्षा मंत्रालयों के बयान और विश्वसनीय रणनीतिक विश्लेषण ही ऐसी सूचनाओं की पुष्टि का आधार बनते हैं। भारत ने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई नया बयान जारी नहीं किया है।

दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। दोनों देशों के बीच पारंपरिक सैन्य शक्ति के साथ-साथ परमाणु प्रतिरोधक क्षमता भी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किसी भी नई रिपोर्ट या दावे पर दोनों देशों के रणनीतिक विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों की नजर बनी रहती है।

मलीहा लोधी की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और उनकी तैनाती को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई बड़े देश अपनी परमाणु क्षमताओं को आधुनिक बनाने और नई तकनीकों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी संदर्भ में दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

फिलहाल, पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक के इस बयान को लेकर भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए उनके दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। हालांकि, SIPRI की रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की अनुमानित संख्या का उल्लेख जरूर किया गया है, जिससे दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक क्षमताओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। आने वाले समय में यदि इस विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो दक्षिण एशिया के सुरक्षा परिदृश्य को लेकर नई बहस देखने को मिल सकती है।