सीजनल फ्लू में जल्दी रिकवरी के लिए क्या खाएं? डाइट में शामिल करें ये चीजें, इनसे बनाएं दूरी

सीजनल फ्लू में जल्दी रिकवरी के लिए क्या खाएं? डाइट में शामिल करें ये चीजें, इनसे बनाएं दूरी

मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश, बुखार और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। कई बार ये लक्षण सीजनल फ्लू की वजह से भी हो सकते हैं। फ्लू होने पर व्यक्ति को सिर्फ बीमारी ही परेशान नहीं करती, बल्कि कमजोरी, भूख कम लगना और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है।

बीमारी के दौरान शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए इस समय ऐसी डाइट लेना बेहतर रहता है जो हल्की हो, आसानी से पच जाए और शरीर को पर्याप्त पोषण दे। साथ ही पर्याप्त आराम और नींद भी रिकवरी का अहम हिस्सा हैं। आइए जानते हैं कि सीजनल फ्लू होने पर प्लेट में किन चीजों को जगह देनी चाहिए और किन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर है।

सबसे पहले शरीर को रखें हाइड्रेटेड

फ्लू के दौरान बुखार, पसीना और कम खाना-पीना शरीर में पानी की कमी का कारण बन सकते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर कमजोरी, चक्कर और थकान ज्यादा महसूस हो सकते हैं। इसलिए बीमारी के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहना जरूरी है।

सादा पानी सबसे आसान विकल्प है। एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेते रहें। अगर सादा पानी पीने का मन नहीं कर रहा है तो नारियल पानी, हल्का नींबू पानी, सूप या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं। बहुत ज्यादा मीठे पेय पदार्थों की जगह प्राकृतिक और हल्के विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

अगर उल्टी या दस्त भी हो रहे हों तो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपयुक्त ओआरएस या अन्य तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं।

भूख कम हो तो भी खाना पूरी तरह न छोड़ें

फ्लू के दौरान भूख कम लगना सामान्य हो सकता है। गले में दर्द, बुखार या थकान की वजह से खाना खाने का मन नहीं करता। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खाना पूरी तरह छोड़ दिया जाए। शरीर को बीमारी से उबरने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है।

अगर एक बार में ज्यादा खाना मुश्किल लग रहा है तो दिन में कई बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन किया जा सकता है। खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, हल्की दाल-चावल या सादी रोटी जैसे विकल्प पेट पर ज्यादा बोझ डाले बिना पोषण देने में मदद कर सकते हैं।

बहुत ज्यादा तेल, मसाला और गरिष्ठ भोजन से फिलहाल दूरी रखना बेहतर रहता है। हल्का भोजन पचने में आसान होता है और बीमारी के दौरान खाने में भी अपेक्षाकृत सहज रहता है।

गर्म सूप गले और शरीर को दे सकता है राहत

गले में खराश, नाक बंद होने या कमजोरी के दौरान गर्म सूप एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सब्जियों से तैयार हल्का सूप शरीर को तरल पदार्थ के साथ कुछ पोषक तत्व भी देता है। इसे बहुत ज्यादा मसालेदार बनाने की जरूरत नहीं है।

चिकन खाने वाले लोग हल्का चिकन सूप भी ले सकते हैं। वहीं शाकाहारी लोग गाजर, टमाटर, पालक, लौकी या दूसरी सब्जियों से सूप बना सकते हैं। ध्यान रखें कि सूप बहुत गर्म न हो, क्योंकि अत्यधिक गर्म चीज गले में जलन बढ़ा सकती है।

प्रोटीन को डाइट से न करें गायब

रिकवरी के दौरान शरीर को पर्याप्त प्रोटीन समेत कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए अगर व्यक्ति आसानी से पचा सकता है तो दाल, पनीर, दही, दूध, अंडा, सोया और अन्य प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

हालांकि हर व्यक्ति की भूख और पाचन क्षमता अलग होती हैं। अगर फ्लू के दौरान दूध या कोई अन्य चीज लेने से पेट में परेशानी होती है तो उसे जबरदस्ती खाने की जरूरत नहीं है। उस समय ऐसे विकल्प चुने जा सकते हैं जो शरीर द्वारा आसानी से स्वीकार किए जा सकें।

फल और सब्जियों से मिलेंगे जरूरी पोषक तत्व

बीमारी के दौरान फल और सब्जियां भी भोजन का हिस्सा बनी रहनी चाहिए। अमरूद, संतरा, मौसमी, कीवी, पपीता जैसे फल कई तरह के विटामिन और अन्य पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इसी तरह पालक, गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च और अन्य मौसमी सब्जियां डाइट को संतुलित बनाने में मदद करती हैं।

विटामिन C को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यह फ्लू को तुरंत ठीक कर देता है, लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ को फ्लू का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित डाइट का उद्देश्य शरीर को पर्याप्त पोषण देना है ताकि रिकवरी के दौरान शरीर की सामान्य जरूरतें पूरी हो सकें।

अगर गले में बहुत दर्द है या निगलने में परेशानी हो रही है तो बहुत कठोर फल-सब्जियों की जगह नरम, पकी हुई या आसानी से खाई जाने वाली चीजें लेना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है।

अदरक-तुलसी वाली गर्म ड्रिंक ले सकते हैं, लेकिन सावधानी से

फ्लू के दौरान कुछ लोगों को अदरक, तुलसी या अन्य सामग्री से बनी हल्की गर्म ड्रिंक पसंद आती है। इससे गले में कुछ समय के लिए आराम महसूस हो सकता है। इसी तरह गर्म पानी या हल्की हर्बल ड्रिंक भी ली जा सकती है।

लेकिन घरेलू काढ़े को बीमारी की दवा समझना सही नहीं है। बहुत ज्यादा मसाले, काली मिर्च या अदरक डालकर काढ़ा पीने से कुछ लोगों को पेट में जलन या दूसरी परेशानी हो सकती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में और अपनी सहनशीलता के अनुसार लेना बेहतर है।

दही और प्रोबायोटिक फूड को लेकर क्या करें?

अगर व्यक्ति को दही आसानी से पचता है तो इसे भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। दही प्रोटीन समेत कुछ पोषक तत्व प्रदान करता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि फ्लू के दौरान हर व्यक्ति को दही खाना ही चाहिए।

सर्दी-जुकाम में दही या ठंडी चीजें लेने से बीमारी बढ़ती है, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को ठंडी चीजों से गले में असहजता महसूस होती है तो वह कुछ समय के लिए इनसे बच सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भोजन शरीर को सूट करे और पर्याप्त पोषण मिलता रहे।

किन चीजों से फिलहाल दूरी बनाना बेहतर है?

फ्लू के दौरान खानपान को लेकर सबसे जरूरी बात है कि पेट और शरीर पर अनावश्यक बोझ न डाला जाए। बहुत ज्यादा तला-भुना, बेहद मसालेदार और अत्यधिक वसायुक्त भोजन फिलहाल कम करना बेहतर है। इसी तरह पैकेज्ड जंक फूड, जरूरत से ज्यादा मिठाइयां और बहुत ज्यादा शुगर वाले पेय पदार्थों को भी सीमित रखना चाहिए।

कोल्ड ड्रिंक या बहुत अधिक कैफीन वाले पेय को पानी का विकल्प नहीं मानना चाहिए। शराब का सेवन भी बीमारी के दौरान उचित नहीं है, क्योंकि शरीर को रिकवरी के समय पर्याप्त आराम और हाइड्रेशन की जरूरत होती है।

नींद और आराम भी हैं रिकवरी का हिस्सा

सिर्फ डाइट बदलने से फ्लू तुरंत ठीक नहीं हो जाता। शरीर को आराम देना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद लें और कमजोरी होने पर जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से बचें। काम या व्यायाम के दौरान शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालने के बजाय रिकवरी को प्राथमिकता दें।

दवा की जरूरत होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा लें। खासकर एंटीबायोटिक खुद से शुरू नहीं करनी चाहिए, क्योंकि फ्लू आमतौर पर वायरल संक्रमण से जुड़ा होता है और हर फ्लू जैसे लक्षण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

ज्यादातर लोगों में फ्लू के लक्षण समय के साथ बेहतर हो जाते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है। अगर तेज बुखार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें या हालत लगातार बिगड़ती जाए तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू ज्यादा गंभीर हो सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कुल मिलाकर, सीजनल फ्लू के दौरान किसी एक खास भोजन से फास्ट रिकवरी की गारंटी नहीं होती। शरीर को पर्याप्त पानी, हल्का और संतुलित भोजन, प्रोटीन, फल-सब्जियां, पर्याप्त नींद और आराम देना ज्यादा महत्वपूर्ण है। बीमारी के दौरान अपनी भूख और शरीर की स्थिति के अनुसार भोजन लें और गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।