सेशेल्स ने पीएम मोदी को दिया अपना सर्वोच्च सम्मान, बोले- भारत से रिश्ता सदियों पुराना; संसद को संबोधित करने वाले बने पहले भारतीय प्रधानमंत्री

सेशेल्स ने पीएम मोदी को दिया अपना सर्वोच्च सम्मान, बोले- भारत से रिश्ता सदियों पुराना; संसद को संबोधित करने वाले बने पहले भारतीय प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स की यात्रा के दौरान देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के लिए दिया गया। इस सम्मान के साथ ही पीएम मोदी उन भारतीय नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्हें दुनिया के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से नवाजा है। अब तक उन्हें 34 देशों के सर्वोच्च सम्मान मिल चुके हैं।

सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की सरकार, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी और वहां के लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स का संबंध केवल कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित है।

पीएम मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित किया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और सेशेल्स की दोस्ती करीब 50 साल के राजनयिक रिश्तों से कहीं ज्यादा पुरानी है।

उन्होंने बताया कि इस रिश्ते की जड़ें अगस्त 1770 तक जाती हैं, जब ‘थेलेमाक’ नामक जहाज से पांच भारतीय पहली बार सेशेल्स पहुंचे थे। यही लोग इस द्वीपीय देश की शुरुआती स्थायी आबादी का हिस्सा बने थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के नक्शे पर सेशेल्स भले ही छोटे-छोटे द्वीपों का समूह दिखाई देता है, लेकिन भारत के लिए यह सिर्फ एक देश नहीं बल्कि भरोसे, दोस्ती और साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को भी अहम बताया।

भारत-सेशेल्स के बीच बढ़ा सहयोग, 175 मिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1651 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इसके अलावा भारत की ओर से सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल ‘पीएस लेस्पवार’ भी उपहार में दिया गया। यह समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।

दोनों देशों ने इस दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं पर सहमति जताई। इनमें प्रत्यर्पण संधि, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, यूपीआई आधारित पेमेंट सिस्टम और अन्य क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। भारत और सेशेल्स ने समुद्री सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक और विकास परियोजनाओं में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

पर्यावरण के क्षेत्र में पीएम मोदी को मिले कई सम्मान

सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने के पीछे पर्यावरण क्षेत्र में भारत की पहल को भी बड़ी वजह माना गया। पीएम मोदी को इससे पहले भी पर्यावरण से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। साल 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। इसके अलावा खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने भी उन्हें एग्रीकोला मेडल दिया था।

भारत सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर कई योजनाएं शुरू की गई हैं।

गोल्डन जुबली समारोह में होंगे मुख्य अतिथि

सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित होने वाले गोल्डन जुबली नेशनल डे समारोह में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी हिस्सा बने।

यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों को दिखाती है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग के लिहाज से।

मोदी ने लगाया कोको डी मेर का पौधा, जानिए इसकी खासियत

प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स में दुर्लभ ‘कोको डी मेर’ पौधा भी लगाया। यह पौधा पूरी दुनिया में केवल सेशेल्स में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसका फल और बीज बेहद अनोखे होते हैं। इसका बीज दुनिया का सबसे बड़ा और भारी बीज माना जाता है, जिसका वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है।

इस पेड़ की खास बात यह है कि इसके नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। इसे लेकर कई वर्षों से लोककथाएं और मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। कोको डी मेर पेड़ को पूरी तरह विकसित होने में कई दशक लग जाते हैं। यह 20 से 40 साल बाद फल देना शुरू करता है और इसकी उम्र 200 से 350 साल तक हो सकती है।

पुराने समय में जब इसका फल समुद्र में बहकर दूसरे देशों के तटों तक पहुंचता था, तो लोग इसे समुद्र के अंदर उगने वाले किसी रहस्यमयी पेड़ का फल समझते थे। इसी वजह से इसका नाम फ्रेंच भाषा में ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका मतलब है समुद्र का नारियल।

सेशेल्स में भारतीयों की मौजूदगी 250 साल से ज्यादा पुरानी

सेशेल्स के साथ भारत का रिश्ता वहां बसे भारतीय समुदाय से भी जुड़ा हुआ है। इतिहास के अनुसार, साल 1770 में पहली स्थायी बस्ती बसाने वाले समूह में पांच भारतीय भी शामिल थे। उस समय फ्रांस ने सेशेल्स में पहली कॉलोनी स्थापित की थी। इसमें फ्रांसीसी नागरिकों के साथ अफ्रीकी गुलाम और भारतीय लोग भी शामिल थे।

बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के बिहार क्षेत्र से कई लोग सेशेल्स पहुंचे। इसके बाद तमिलनाडु और गुजरात से भी व्यापारी, मजदूर और अन्य लोग वहां जाकर बस गए। आज सेशेल्स की करीब 1.20 लाख आबादी में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगभग 8 प्रतिशत है।

सेशेल्स के राष्ट्रपति के पूर्वज भी भारत से जुड़े

सेशेल्स के राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन के पूर्वज भी भारत से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार की जड़ें बिहार के गोपालगंज जिले के परसौनी गांव से जुड़ी बताई जाती हैं। करीब 138 साल पहले उनके पूर्वज बिहार से कोलकाता पहुंचे थे, जिसके बाद वे मॉरीशस गए और बाद में उनका परिवार सेशेल्स में बस गया। रामकलावन ने अपने पूर्वजों की धरती को देखने के लिए साल 2018 में बिहार के परसौनी गांव का दौरा भी किया था।

सेशेल्स के विशाल कछुए हैं दुनिया में मशहूर

सेशेल्स का अल्डाब्रा जायंट कछुआ भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह प्रजाति अपनी लंबी उम्र के लिए जानी जाती है। इस प्रजाति के कछुए औसतन करीब 150 साल तक जीवित रहते हैं। दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर ‘जोनाथन’ भी इसी प्रजाति का कछुआ है, जिसकी उम्र करीब 194 साल बताई जाती है। वैज्ञानिक लंबे समय तक जीवित रहने के कारणों को समझने के लिए ऐसे जीवों पर शोध कर रहे हैं।

भारत-सेशेल्स संबंधों के 50 साल पूरे

पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास और लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि सेशेल्स भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देश क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।

सेशेल्स जाने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री बने मोदी

सेशेल्स की यात्रा करने वाले पीएम मोदी दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री बने। इससे पहले 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सेशेल्स गई थीं। उसी साल यह देश आजाद हुआ था। इंदिरा गांधी ने 1981 में भी सेशेल्स का दौरा किया था। इसके बाद लंबे समय तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां यात्रा नहीं हुई थी।

मोदी की यात्रा का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाना और दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना भी रहा। भारत ने इससे पहले सेशेल्स को समुद्री निगरानी के लिए डोर्नियर विमान और तटीय निगरानी रडार नेटवर्क जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं।

पीएम मोदी का यह दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और हिंद महासागर में मजबूत साझेदारी की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।