देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, महिला भागीदारी और तकनीकी क्षमता को देश की अगली बड़ी प्राथमिकताएं बताया। करीब 76 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब छोटे लक्ष्यों से संतुष्ट रहने वाला देश नहीं है। आने वाले वर्षों में ऐसे काम करने होंगे, जो पिछले कई दशकों में पूरे नहीं हो सके।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए की। उन्होंने महात्मा गांधी सहित सभी सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि आज देश के हर घर में तिरंगा और हर मन में तिरंगे का भाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प अब देश के सामने स्पष्ट लक्ष्य के रूप में मौजूद है।
‘हथियारबंद नक्सल पीछे हटे, लेकिन दिमागी नक्सलियों से सावधान’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद को काफी हद तक पीछे धकेला गया है, लेकिन विचारों के स्तर पर समाज को भटकाने वाली ताकतों से सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि इन्हें पहचानना होगा तथा युवाओं को इनके प्रभाव से बचाना होगा।
PM मोदी ने कहा कि हिंसा और अराजकता का रास्ता अपनाने वाली मानसिकता देश के विकास में बाधा बन सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश निर्माण की सकारात्मक दिशा से जुड़ें और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के अभियान में अपनी ऊर्जा लगाएं।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर सभी दलों से अपील
महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से मिलकर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना समय की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस व्यवस्था को लागू करने में सहयोग करें और महिलाओं को उनका अधिकार देने की दिशा में आगे आएं।
उन्होंने कहा कि भारत की आधी आबादी को नीति निर्माण और शासन व्यवस्था में अधिक भागीदारी मिलने से देश की विकास यात्रा और मजबूत होगी।
एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग
युवाओं के लिए प्रधानमंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने वाली मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू करने की बात भी कही।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला समय तकनीक, डेटा, AI और क्वांटम जैसी उभरती तकनीकों का है। ऐसे में भारत को केवल इन तकनीकों का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि इनके विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना होगा।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना हर नागरिक का संकल्प बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि देश के काम करने के तरीके और सोच में भी बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जो काम पिछले 50-70 वर्षों में पूरे नहीं हो पाए, उन्हें आने वाले 5-7 वर्षों में पूरा करने की गति पैदा करनी होगी। प्रधानमंत्री ने इसे भारत के लिए निर्णायक समय बताते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य देश की सोच को भी बड़ा बनाते हैं।
आत्मनिर्भर भारत को बताया समय की जरूरत
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता को भारत की मजबूरी नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के बाजार में बहुत सी चीजें सस्ती और आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन हर जरूरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने से देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में कई देश अपने आर्थिक और व्यापारिक संसाधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए अपने हितों की सुरक्षा और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल को इसी दिशा का हिस्सा बताया। प्रधानमंत्री ने उद्योगों से भी वैश्विक बाजार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने की अपील की।
‘सप्तधारा’ से भारत की नई ताकत बनाने का विजन
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत की दिशा में सात प्रमुख शक्तियों पर विशेष जोर दिया। इनमें कृषि और फूड प्रोसेसिंग, तकनीक और इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर जैसी क्षमताओं को प्रमुखता दी गई।
उन्होंने कहा कि किसानों की उपज, मसाले, फल, फूल और खाद्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की क्षमता भारत के पास है। कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी जोर देना होगा।
तकनीक के क्षेत्र में उन्होंने डेटा सेंटर, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को भविष्य की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत को इनोवेशन का हब बनना है और अपनी डिजिटल तकनीकों को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाना है।
ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर जोर
प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और पर्यावरण अनुकूल मैन्युफैक्चरिंग को भारत के भविष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत केवल पर्यावरण की समस्याओं पर चर्चा करने वाला देश नहीं, बल्कि उनका समाधान देने वाला देश बन सकता है।
ब्लू इकोनॉमी के तहत समुद्री संसाधन, मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्र से जुड़ी तकनीकों में संभावनाओं का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि भारत की लंबी समुद्री सीमा देश को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देती है।
रक्षा और साइबर सुरक्षा भी प्राथमिकता
रक्षा उत्पादन को आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को रक्षा क्षेत्र में अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने साइबर सुरक्षा को भी आधुनिक दौर की रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि इसमें युवाओं की तकनीकी क्षमता का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश का रक्षा उत्पादन कई गुना बढ़ा है और आगे भी भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करनी होगी।
कनेक्टिविटी से लेकर रेलवे तक विस्तार
‘गति शक्ति’ को सप्तधारा की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी बढ़ानी होगी। शहरों को बेहतर परिवहन नेटवर्क से जोड़ने, मेट्रो का विस्तार करने और बंदरगाहों को आधुनिक बनाने की जरूरत पर उन्होंने जोर दिया।
रेलवे के विद्युतीकरण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लगभग 70 प्रतिशत रेलवे का इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा चुका है। उन्होंने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को भी भारत की तकनीकी क्षमता का उदाहरण बताया।
ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। भारत को बड़ी मात्रा में बिजली और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में 2047 तक 100 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य भी सामने रखा।
सौर ऊर्जा की बढ़ती क्षमता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों पहले देश की सौर क्षमता बेहद कम थी, जबकि अब इसमें कई गुना विस्तार हुआ है। पीएम सूर्यघर योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का काम चल रहा है और कई परिवार बिजली उत्पादन कर अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ आय भी अर्जित कर रहे हैं।
सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज लगभग हर आधुनिक तकनीक की बुनियाद बन चुका है। भारत ने इस क्षेत्र में उत्पादन क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और देश में सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
उन्होंने उद्योगों से छोटे कंपोनेंट से लेकर पूरी मशीन और तैयार उत्पाद तक देश में बनाने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि भारत के उत्पादों की पहचान दुनिया में गुणवत्ता और भरोसे के साथ होनी चाहिए।
वैश्विक आर्थिक ताकत बनने का सपना
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आने वाले समय में दुनिया की बड़ी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच अपनी मौजूदगी और मजबूत करनी होगी। उन्होंने लक्ष्य रखा कि भविष्य में फॉर्च्यून 500 की शीर्ष कंपनियों में भारत की कई कंपनियां शामिल हों और दुनिया की टॉप बैंकों में भारतीय बैंक की मजबूत मौजूदगी हो।
उन्होंने भारत के कंसल्टिंग और अकाउंटिंग क्षेत्र को भी वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की जरूरत बताई। टेक्सटाइल, मशीनरी, दवाइयों और अन्य भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
‘सॉफ्ट पावर’ को वैश्विक पहचान बनाने की तैयारी
प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, हस्तशिल्प, फिल्म, गेमिंग, एनीमेशन, VFX और डिजिटल कंटेंट को भारत की सॉफ्ट पावर बताया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत के पास दुनिया के सामने अपनी अलग पहचान बनाने की अपार क्षमता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक ताकत को वैश्विक सामर्थ्य में बदलने की जरूरत है और दुनिया अब भारत में होने वाले बड़े मीडिया एवं मनोरंजन आयोजनों की ओर भी देख रही है।
पिछले वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सरकार की पिछली उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि रक्षा उत्पादन, खादी एवं ग्रामोद्योग, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे कोच निर्माण और मोबाइल फोन उत्पादन में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है और देश अब दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने किसान, युवा और महिलाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि इन्हीं की शक्ति से विकसित भारत का सपना पूरा किया जा सकता है।
लाल किले से संबोधन के बाद प्रधानमंत्री बच्चों से भी मिले। इसी दौरान एक छात्रा उनके पैर छूने के लिए झुकी तो उसके सिर से टोपी गिर गई। प्रधानमंत्री ने जमीन पर पड़ी टोपी उठाकर बच्ची के सिर पर वापस रख दी। स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर यह दृश्य भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में साफ किया कि आने वाले वर्षों में भारत की प्राथमिकता केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा मजबूती, महिला भागीदारी और वैश्विक प्रभाव को एक साथ बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि देश अब छोटे सपनों के सहारे आगे नहीं बढ़ेगा। बड़े लक्ष्य, मजबूत संकल्प और सामूहिक प्रयास ही भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ले जाएंगे।




