शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार कई अहम कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए कैंसर उपचार और देखभाल की सुविधाओं को अत्याधुनिक बनाने के लिए करीब 800 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों और योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में सरकारी चिकित्सा संस्थानों को मजबूत करने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने और स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन की कमी दूर करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों को उनके घर के नजदीक बेहतर और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके लिए चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों को एनपीए देने पर विचार
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस देने के विकल्प पर सरकार विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को बेहतर सेवा वातावरण उपलब्ध करवाना और चिकित्सा क्षेत्र में अनुभवी मानव संसाधन को बनाए रखना है।
सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में एनपीए से जुड़े प्रस्ताव को डॉक्टरों की सेवा शर्तों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक संभावित कदम के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि एनपीए की दर, पात्रता और इसे लागू करने की प्रक्रिया को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सरकार इस संबंध में विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद आगे फैसला लेगी।
मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मेडिकल कॉलेजों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। मजबूत मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से एक ओर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का अनुभव भी मिल सकता है।
सरकार द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मानव संसाधन से जुड़ी जरूरतों पर लगातार नजर रखने और आवश्यक पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के निर्देश दिए।
कैंसर उपचार के लिए 800 करोड़ का प्रावधान
बैठक में कैंसर रोग को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए कैंसर केयर से जुड़े संस्थानों को मजबूत करने के लिए सरकार करीब 800 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
इस निवेश का उद्देश्य कैंसर की जांच, निदान, उपचार और मरीजों की देखभाल से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। सरकार कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक मशीनरी और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कैंसर देखभाल के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने को कहा गया है। यह समिति कैंसर उपचार के मौजूदा ढांचे का आकलन करने के साथ-साथ भविष्य में आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं को लेकर सुझाव देगी।
एम्स दिल्ली की तर्ज पर आधुनिक उपकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और मशीनरी उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया जारी है। इसके तहत एम्स दिल्ली जैसी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थाओं में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं की तर्ज पर उपकरणों की खरीद पर ध्यान दिया जा रहा है।
अत्याधुनिक मशीनरी उपलब्ध होने से गंभीर और जटिल रोगों की जांच तथा उपचार की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि मरीजों को जरूरी जांच और उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को सरकार की प्राथमिकता में रखा गया है।
मेडिकल छात्रों और फैकल्टी को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर
स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के साथ मेडिकल शिक्षा को भी आधुनिक बनाने की योजना पर सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के चिकित्सा विद्यार्थियों और फैकल्टी को विदेशों के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों का एक्सपोजर दिलाने की योजना तैयार की जा रही है।
इस पहल के तहत मेडिकल छात्रों और चिकित्सा शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही आधुनिक उपचार पद्धतियों और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में चिकित्सा क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग और तकनीकी विकास हो रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के मेडिकल संस्थानों से जुड़े विद्यार्थियों और फैकल्टी को वैश्विक स्तर की चिकित्सा व्यवस्था से परिचित करवाना उपयोगी रहेगा।
इस तरह के एक्सपोजर विजिट से चिकित्सकों और छात्रों को आधुनिक उपचार तकनीकों, शोध पद्धतियों और मरीजों की देखभाल के नए तरीकों को समझने में मदद मिल सकती है।
जीन और मॉलिक्यूलर थैरेपी पर भी नजर
प्रदेश सरकार अब चिकित्सा के उभरते क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीन थैरेपी और मॉलिक्यूलर थैरेपी जैसी आधुनिक उपचार तकनीकों की दिशा में भी काम करने की योजना बनाई जा रही है।
इन तकनीकों को भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थान केवल पारंपरिक उपचार तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक और उभरती चिकित्सा पद्धतियों के साथ भी कदमताल करें।
जीन और मॉलिक्यूलर थैरेपी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए विशेषज्ञता, शोध, अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। ऐसे में सरकार की योजना को चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उपचार सुविधाओं के विस्तार के व्यापक प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है।
खाली पद भरने की प्रक्रिया जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से जारी है। डॉक्टरों, विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता सीधे तौर पर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करती है।
सरकार का प्रयास है कि मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आवश्यक पदों को भरकर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जाए। विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से गंभीर मामलों के उपचार में मदद मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने अधिकारियों को स्वास्थ्य संस्थानों की जरूरतों का लगातार मूल्यांकन करने और आवश्यकतानुसार मानव संसाधन तथा बुनियादी सुविधाओं में विस्तार करने पर जोर दिया।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी और मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य जुड़े
स्वास्थ्य विभाग की इस समीक्षा बैठक में उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक संजय अवस्थी, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर और स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रदेश के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भी वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान विभिन्न चिकित्सा संस्थानों की आवश्यकताओं, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सरकार की प्रस्तावित योजनाओं को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए केवल नए भवन और उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। इनके साथ विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ, आधुनिक उपचार पद्धतियां और शोध की सुविधाएं भी जरूरी हैं।
विश्वस्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सा संस्थानों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर काम कर रही है। इसके तहत अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कैंसर देखभाल के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश, मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की योजना, खाली पदों को भरने की प्रक्रिया और नई चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की तैयारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
सरकार का लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है जहां प्रदेश के मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। साथ ही मेडिकल शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और नई चिकित्सा तकनीकों को प्रदेश में लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में सामने आई योजनाओं से संकेत मिलता है कि हिमाचल सरकार आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ विशेषज्ञता, तकनीक और शोध पर भी निवेश बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब इन प्रस्तावों को किस समयसीमा में लागू किया जाता है और एनपीए समेत अन्य योजनाओं पर अंतिम निर्णय कब होता है, इस पर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर रहेगी।




