हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब को दोटूक चेतावनी: ‘हर कार्रवाई का मिलेगा जवाब’, लाल सागर क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव

हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब को दोटूक चेतावनी: ‘हर कार्रवाई का मिलेगा जवाब’, लाल सागर क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सऊदी अरब की हालिया सैन्य गतिविधियों का जवाब दिया जाएगा और वे किसी भी कार्रवाई को बिना प्रतिक्रिया के नहीं छोड़ेंगे। हूती संगठन, जिसे अंसार अल्लाह आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है, ने दावा किया कि उनके नेतृत्व, सैन्य कमान और यमन की जनता ने मिलकर जवाबी रणनीति तय कर ली है। संगठन का कहना है कि यदि सऊदी अरब अपने सैन्य अभियान और दबाव की नीति जारी रखता है तो क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।

हूती नेतृत्व की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अब उनकी नीति पूरी तरह स्पष्ट है। यदि यमन पर घेराबंदी की जाती है तो उसका जवाब भी उसी प्रकार दिया जाएगा। यदि बंदरगाहों को निशाना बनाया जाता है तो संबंधित जवाब बंदरगाहों के स्तर पर दिया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा कि तनाव बढ़ाने की हर कोशिश का जवाब उसी स्तर पर दिया जाएगा और विरोधी देशों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि लगातार सैन्य दबाव से हालात सामान्य होने के बजाय और अधिक जटिल बनेंगे।

हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब की ओर मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जवाबी कार्रवाई की है। संगठन के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने पहले से रिकॉर्ड किए गए संदेश में कहा कि उनके बलों ने सऊदी अरब के यानबू और जिजान क्षेत्रों में मौजूद ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि इन स्थानों पर दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको के महत्वपूर्ण केंद्र स्थित हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

हूती संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई होदेदा पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। लाल सागर के किनारे स्थित यह बंदरगाह शहर रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संगठन का आरोप है कि सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इस क्षेत्र को निशाना बनाकर तनाव को और बढ़ा दिया। हूती नेताओं के अनुसार यदि इस प्रकार की कार्रवाई दोहराई जाती रही तो उनके जवाब भी लगातार जारी रहेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम से पहले लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले की खबर सामने आई थी। हूती विद्रोहियों ने इन जहाजों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने जवाबी कदम उठाते हुए यमन के होदेदा बंदरगाह क्षेत्र पर हवाई अभियान चलाने की जानकारी दी। गठबंधन का कहना था कि यह कार्रवाई सुरक्षा हितों की रक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लाल सागर और उससे जुड़े समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का कारण बनी हुई हैं।

इसी बीच ईरान ने भी पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यमन संकट का समाधान सैन्य टकराव के जरिए नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए। सरकारी समाचार माध्यम को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि लगातार सैन्य कार्रवाई किसी भी पक्ष के हित में नहीं होगी और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और राजनीतिक समाधान तलाशने की अपील की।

हूती संगठन ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि संगठन ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया है। हालांकि संगठन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह जानकारी सही नहीं है। हूती नेतृत्व का कहना है कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग सामान्य रूप से खुला हुआ है और अंतरराष्ट्रीय नौवहन पूरी तरह बाधित नहीं किया गया है।

समूह के मुख्य वार्ताकार और प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि बाब-अल-मंदेब को पूरी तरह बंद किए जाने की खबरें भ्रामक हैं। उनके अनुसार संगठन की नई समुद्री पाबंदियां केवल उन जहाजों पर लागू हैं जिनका संबंध सऊदी अरब से है। उन्होंने कहा कि अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए सामान्य आवाजाही पर कोई व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच होने वाले बड़े पैमाने के व्यापार के लिए यह मार्ग बेहद अहम माना जाता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक बाजारों और तेल आपूर्ति पर प्रभाव डाल सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष ने पहले ही पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। अब यदि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य गतिविधियां और तेज होती हैं तो इसका असर केवल दोनों पक्षों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के देशों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कई देश स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

हूती संगठन लगातार यह दोहरा रहा है कि वह अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। दूसरी ओर सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन भी अपने सैन्य अभियानों को सुरक्षा आवश्यकताओं से जोड़कर देख रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच फिलहाल तनाव कम होने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। कूटनीतिक स्तर पर समाधान की अपीलें जरूर हो रही हैं, लेकिन जमीन पर सैन्य गतिविधियां जारी रहने से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

मध्य पूर्व में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच यह नया घटनाक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता है तो लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या दोनों पक्ष किसी शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं।