हॉकी वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान की टक्कर 19 अगस्त को, महिला टीम 16 अगस्त को चीन से भिड़ेगी

हॉकी वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान की टक्कर 19 अगस्त को, महिला टीम 16 अगस्त को चीन से भिड़ेगी

हॉकी प्रेमियों के लिए अगस्त का महीना बेहद खास रहने वाला है। 15 अगस्त से नीदरलैंड्स और बेल्जियम की मेजबानी में पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप का आगाज होने जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट में सिर्फ भारत के मुकाबलों पर ही नहीं, बल्कि बदले हुए फॉर्मेट पर भी सभी की नजरें रहेंगी। प्रतियोगिता में पहली बार ऐसा फॉर्मेट देखने को मिलेगा, जिसमें क्वार्टर फाइनल मुकाबले नहीं खेले जाएंगे।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए टूर्नामेंट की शुरुआत 15 अगस्त से होगी। टीम अपने पहले मैच में वेल्स का सामना करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को भारत और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे। ग्रुप स्टेज का सबसे हाई-वोल्टेज मुकाबला 19 अगस्त को खेला जाएगा, जब भारत की भिड़ंत पाकिस्तान से होगी। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस से शुरू होने वाला यह टूर्नामेंट भारतीय प्रशंसकों के लिए शुरुआत से ही रोमांच से भरा रहने वाला है।

चार पूल में बांटी गईं 16 टीमें

इस बार पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं। सभी टीमों को चार अलग-अलग पूल में रखा गया है और हर पूल में चार टीमें शामिल हैं। भारतीय टीम को पूल-D में जगह मिली है। इस ग्रुप में भारत के साथ इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स हैं।

भारत का कार्यक्रम भी काफी चुनौतीपूर्ण है। अभियान की शुरुआत वेल्स के खिलाफ होगी, जबकि दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम सामने होगी। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला होगा। यानी भारतीय टीम को शुरुआती दौर में ही ऐसी टीमों के खिलाफ खेलना पड़ेगा, जिनके खिलाफ एक छोटी सी गलती भी आगे की राह मुश्किल कर सकती है।

ग्रुप स्टेज में प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार अगले चरण का रास्ता पारंपरिक तरीके से नहीं खुलेगा। टीमों को सिर्फ मुकाबले जीतने पर ही ध्यान नहीं देना होगा, बल्कि ग्रुप में अपनी स्थिति मजबूत करना भी जरूरी होगा।

क्वार्टर फाइनल का दौर खत्म

हॉकी वर्ल्ड कप के इस संस्करण में सबसे बड़ा बदलाव प्रतियोगिता के फॉर्मेट में किया गया है। पहले ग्रुप स्टेज के बाद क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेले जाते थे, लेकिन इस बार उन्हें हटा दिया गया है। अब हर पूल की शीर्ष दो टीमें अगले चरण में प्रवेश करेंगी।

चारों पूल से दो-दो टीमों के आगे बढ़ने का मतलब है कि कुल आठ टीमें दूसरे चरण में पहुंचेंगी। इसके बाद इन आठ टीमों को दो नए ग्रुप में बांटा जाएगा। इस स्टेज पर टीमों को सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए फिर से दम लगाना होगा।

दूसरे चरण के दोनों ग्रुप से शीर्ष दो टीमें अंतिम चार में पहुंचेंगी। इसके बाद सेमीफाइनल मुकाबले खेले जाएंगे और विजेता टीमें फाइनल में खिताब के लिए आमने-सामने होंगी। इस बदलाव ने टूर्नामेंट की रणनीति को काफी हद तक बदल दिया है।

शुरुआती मैचों का नतीजा आगे भी असर डालेगा

नए फॉर्मेट में ग्रुप स्टेज के मुकाबले पहले से कहीं अधिक अहम हो गए हैं। भारतीय टीम को पूल-D में इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों का सामना करना है। इसलिए भारत के लिए शुरुआती तीन मुकाबलों में अंक हासिल करना बेहद जरूरी होगा।

भारतीय टीम के कोच क्रेग फुल्टन भी इस नए सिस्टम की अहमियत पर जोर दे चुके हैं। उनके मुताबिक, टीम का पहला लक्ष्य पूल में शीर्ष दो स्थानों पर रहना होगा। खास बात यह है कि शुरुआती चरण में एक-दूसरे के खिलाफ खेले गए मुकाबलों का प्रभाव आगे के चरण में भी पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ अगले राउंड में पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ग्रुप स्टेज में मजबूत प्रदर्शन करना भी जरूरी रहेगा।

भारत अगर अपने पूल में अच्छी स्थिति हासिल करता है तो दूसरे चरण में उसे इसका फायदा मिल सकता है। वहीं शुरुआती मुकाबलों में खराब प्रदर्शन आगे के सफर को मुश्किल बना सकता है।

19 अगस्त को भारत-पाकिस्तान मुकाबला

भारत और पाकिस्तान के बीच हॉकी मुकाबला हमेशा से ही खास आकर्षण का केंद्र रहा है। इस वर्ल्ड कप में दोनों टीमें 19 अगस्त को आमने-सामने होंगी। यह मैच पूल-D के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारतीय टीम के सामने इस मुकाबले से पहले वेल्स और इंग्लैंड की चुनौती होगी। इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ मैदान पर उतरने से पहले टीम को अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा। हालांकि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में सिर्फ अंक ही नहीं, बल्कि दबाव और प्रतिष्ठा भी जुड़ी होगी।

भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत को लेकर दोनों देशों के हॉकी प्रशंसकों में खास उत्साह देखने को मिल सकता है। वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर होने वाला यह मुकाबला टूर्नामेंट के शुरुआती दौर के सबसे चर्चित मैचों में शामिल रहेगा।

15 अगस्त से शुरुआत, 30 अगस्त को खिताबी मुकाबला

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप का आयोजन 15 अगस्त से शुरू होकर 30 अगस्त तक चलेगा। सेमीफाइनल मुकाबले 28 और 29 अगस्त को खेले जाएंगे। इसके बाद 30 अगस्त को तीसरे स्थान यानी ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला होगा।

ब्रॉन्ज मेडल मैच शाम 5:30 बजे खेला जाएगा, जबकि फाइनल मुकाबला रात 8 बजे शुरू होगा। इस तरह टूर्नामेंट के आखिरी दिन हॉकी प्रशंसकों को दो बड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे।

भारत की नजर दूसरे वर्ल्ड कप खिताब पर

भारतीय पुरुष हॉकी टीम का वर्ल्ड कप इतिहास काफी पुराना है। टीम ने 1971 में आयोजित पहले हॉकी वर्ल्ड कप से ही इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। भारत अब तक 15 बार वर्ल्ड कप में खेल चुका है।

हालांकि इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत सिर्फ एक बार विश्व चैंपियन बन सका है। यह खिताब टीम ने 1975 में जीता था। कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित उस वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी।

अब भारतीय टीम की कोशिश लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर विश्व चैंपियन बनने की होगी। टीम के सामने चुनौती आसान नहीं है, लेकिन नए फॉर्मेट में अच्छी शुरुआत करने वाली टीम के पास आगे बढ़ने का मजबूत मौका रहेगा।

महिला टीम का अभियान भी 16 अगस्त से

पुरुष टीम के साथ ही महिला हॉकी वर्ल्ड कप भी 15 अगस्त से नीदरलैंड्स और बेल्जियम में शुरू होगा। महिला टूर्नामेंट में भी 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं और उन्हें चार पूल में बांटा गया है।

भारतीय महिला हॉकी टीम को पूल-D में रखा गया है। इस ग्रुप में भारत के अलावा चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीमें हैं। महिला टीम अपने अभियान की शुरुआत 16 अगस्त को चीन के खिलाफ करेगी।

इसके बाद 18 अगस्त को भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा। ग्रुप स्टेज का तीसरा मुकाबला 20 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ खेला जाएगा। पुरुष टीम की तरह महिला टीम के लिए भी शुरुआती मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करना बेहद जरूरी होगा।

महिला वर्ल्ड कप का खिताबी मुकाबला 29 अगस्त को शाम 7:30 बजे खेला जाएगा। यानी पुरुष और महिला प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम में अंतर होने के बावजूद दोनों टूर्नामेंट लगभग एक ही अवधि में खेले जाएंगे।

महिला टीम की नजर पहली वर्ल्ड कप ट्रॉफी पर

भारतीय महिला हॉकी टीम का वर्ल्ड कप इतिहास भी काफी पुराना है। टीम ने 1974 में पहली बार वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था। 2026 संस्करण सहित भारतीय महिला टीम अब तक नौ बार इस प्रतियोगिता में भाग ले चुकी है।

हालांकि पुरुष टीम के विपरीत भारतीय महिला टीम अभी तक वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम नहीं कर पाई है। इस बार भी टीम के सामने मजबूत विरोधियों की चुनौती होगी। चीन, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के खिलाफ ग्रुप मुकाबले भारतीय टीम के लिए आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

नए फॉर्मेट के कारण महिला टीम के लिए भी हर मुकाबला महत्वपूर्ण होगा। पूल की शीर्ष दो टीमों को अगले चरण में जगह मिलेगी और इसके बाद सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए दूसरे ग्रुप स्टेज में अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

एक ही मंच पर पुरुष और महिला टीमों की बड़ी चुनौती

इस बार हॉकी वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा आकर्षण भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों की मौजूदगी होगी। पुरुष टीम के सामने जहां 19 अगस्त को पाकिस्तान की चुनौती होगी, वहीं महिला टीम अपने अभियान की शुरुआत 16 अगस्त को चीन के खिलाफ करेगी।

दोनों टीमों के लिए ग्रुप स्टेज बेहद अहम रहने वाला है। क्वार्टर फाइनल की जगह सीधे दूसरे ग्रुप स्टेज की व्यवस्था ने मुकाबलों की रणनीति बदल दी है। ऐसे में भारत को शुरुआत से ही हर मैच में अंक और गोल अंतर पर ध्यान देना होगा।

15 अगस्त से शुरू होने वाला यह वर्ल्ड कप 30 अगस्त तक हॉकी प्रशंसकों का ध्यान खींचेगा। भारतीय पुरुष टीम जहां 1975 के बाद दूसरी बार विश्व कप जीतने का सपना देखेगी, वहीं महिला टीम पहली बार खिताब हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरेगी। भारत-पाकिस्तान मुकाबले के साथ-साथ दोनों भारतीय टीमों का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी खबरों में शामिल रहने वाला है।