Haryana सरकार की ओर से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले सभी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों तक समय पर पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सरकार ने पहले 15 अप्रैल और बाद में 21 अप्रैल तक सभी विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध कराने का दावा किया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को किताबें नहीं मिल सकी हैं।
शिक्षा विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राज्य में लाखों विद्यार्थी अभी भी अपनी पाठ्यपुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को अपने-अपने जिलों में पुस्तक वितरण की स्थिति की समीक्षा करने और विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि किताबों के वितरण की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जिन जिलों में वितरण अधूरा है, वहां जल्द से जल्द पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

शिक्षा निदेशालय ने मांगी सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट
राज्य शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने जिले के प्रत्येक सरकारी विद्यालय में किताबों की उपलब्धता की समीक्षा करें। इसके साथ ही यह भी बताया जाए कि कितने विद्यार्थियों को किताबें मिल चुकी हैं और कितने छात्र अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यालय ने यह जानकारी भी मांगी है कि जिन स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं, वहां देरी का कारण क्या है तथा वितरण कार्य कब तक पूरा किया जा सकता है।
करीब साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को अब तक नहीं मिली किताबें
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 10 लाख 50 हजार 35 पुस्तक सेट विद्यार्थियों तक पहुंचाए जाने थे। इनमें से अभी तक लगभग 6 लाख 85 हजार 355 सेट वितरित किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 3 लाख 64 हजार 680 विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्हें अब तक नई कक्षाओं की किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं।
नई शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के पास पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से शिक्षण कार्य प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार ने पहले तय की थी समय सीमा, फिर भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समीक्षा बैठक के बाद कहा था कि 15 अप्रैल तक प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। बाद में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने भी समीक्षा बैठक के दौरान 21 अप्रैल तक पुस्तक वितरण पूरा करने की बात कही थी।
हालांकि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कई जिलों में पुस्तक वितरण का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद विभाग ने एक बार फिर स्थिति की समीक्षा शुरू की है।
प्रकाशकों द्वारा समय पर आपूर्ति नहीं होने की चर्चा
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर पुस्तकों की आपूर्ति निर्धारित समय के भीतर पूरी नहीं हो सकी। इसी कारण अनेक विद्यालयों में विद्यार्थियों तक किताबें समय पर नहीं पहुंच पाईं।
रिपोर्टों के अनुसार अभी तक संबंधित प्रकाशकों पर किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या आर्थिक जुर्माने की जानकारी सामने नहीं आई है। विभाग फिलहाल वितरण कार्य को जल्द पूरा कराने पर ध्यान दे रहा है।
शिक्षा मंत्री ने मांगी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया कि सभी जिलों से पुस्तक वितरण की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है। संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर शेष स्कूलों तक पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
पहली कक्षा के हजारों विद्यार्थियों को नहीं मिली पुस्तकें
राज्य के सरकारी विद्यालयों में पहली कक्षा में लगभग 1,27,408 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों के लिए आवश्यक पुस्तक सेट उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों को अब तक किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं।
नई कक्षा में प्रवेश लेने वाले छोटे बच्चों के लिए समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध होना प्रारंभिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दूसरी कक्षा में भी हजारों छात्र इंतजार में
दूसरी कक्षा में लगभग 1,23,631 विद्यार्थी नामांकित हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस कक्षा में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। लगभग 31 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अभी भी किताबों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विद्यालयों में शिक्षण कार्य जारी है, लेकिन कई स्थानों पर विद्यार्थियों को साझा पुस्तकों या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है।
तीसरी कक्षा में भी वितरण अधूरा
तीसरी कक्षा में लगभग 1,34,821 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस कक्षा में भी हजारों बच्चों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अभी तक नहीं मिल पाई हैं।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार लगभग 42 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पुस्तक वितरण शेष है।
चौथी कक्षा में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर
चौथी कक्षा में लगभग 1,77,611 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इस कक्षा में अधिकांश विद्यार्थियों तक किताबें पहुंच चुकी हैं, हालांकि कुछ बच्चों को अभी भी पुस्तकें मिलना बाकी है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस श्रेणी में शेष विद्यार्थियों तक जल्द वितरण पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी इंतजार
राज्य के सरकारी विद्यालयों में पांचवीं कक्षा में लगभग 2,10,257 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को अभी तक नई पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं।
प्राथमिक शिक्षा के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता माना जा रहा है।
छठी कक्षा में सबसे अधिक प्रभावित विद्यार्थियों में शामिल
छठी कक्षा में लगभग 2,19,212 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस कक्षा में लगभग 87 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक किताबें नहीं पहुंच सकी हैं।
माध्यमिक स्तर की पढ़ाई शुरू होने के कारण इस कक्षा में समय पर पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता विशेष महत्व रखती है।
सातवीं कक्षा के हजारों छात्र भी प्रभावित
सातवीं कक्षा में लगभग 2,08,785 विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें से लगभग 84 हजार से अधिक विद्यार्थियों को अभी तक निशुल्क पुस्तकें प्राप्त नहीं हुई हैं।
विभाग का कहना है कि संबंधित जिलों में वितरण कार्य तेज करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
आठवीं कक्षा में भी शेष है वितरण कार्य
आठवीं कक्षा में लगभग 2,12,990 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार लगभग 65 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक अभी भी किताबें नहीं पहुंची हैं।
विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही पुस्तकें उपलब्ध हों, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विद्यार्थियों में वितरित किया जाए।
समय पर किताबें मिलने से पढ़ाई पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि नए सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध होना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है। इससे शिक्षक निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई शुरू कर सकते हैं और विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया भी नियमित बनी रहती है।
सरकारी विद्यालयों में निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को बिना अतिरिक्त खर्च के शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराना है। इसलिए समय पर वितरण सुनिश्चित करना शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
विभाग ने जल्द वितरण पूरा करने के दिए निर्देश
शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों और वितरण एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यालयों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जिला स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है और मुख्यालय को नियमित रिपोर्ट भेजी जा रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष विद्यार्थियों तक भी जल्द से जल्द पुस्तकें पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और वितरण संबंधी कार्रवाई जारी है ताकि नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित हो सके।



