हरियाणा का ‘विज़न 2031’: उद्योगों का मेगा ब्लूप्रिंट तैयार, 10 लाख नौकरियां और 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

हरियाणा का ‘विज़न 2031’: उद्योगों का मेगा ब्लूप्रिंट तैयार, 10 लाख नौकरियां और 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

हरियाणा सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और रोजगार के क्षेत्र में दीर्घकालिक बदलाव लाने के उद्देश्य से अगले पांच वर्षों के लिए व्यापक विकास रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तैयार किए जा रहे ‘विकसित हरियाणा’ विज़न के तहत उद्योग, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास, कृषि, निर्यात, बुनियादी ढांचे और निवेश को विकास की मुख्य धुरी बनाया गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक हरियाणा को देश के सबसे अग्रणी औद्योगिक राज्यों में शामिल करना है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह केवल नई फैक्ट्रियां स्थापित करने की योजना नहीं है, बल्कि ऐसा समग्र आर्थिक मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसमें निवेशकों को बेहतर सुविधाएं, युवाओं को रोजगार, किसानों को नए बाजार, उद्योगों को आधुनिक बुनियादी ढांचा और विभिन्न जिलों को संतुलित औद्योगिक विकास का अवसर मिले। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, समयबद्ध कार्ययोजना और नियमित समीक्षा व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित योजनाएं निर्धारित समय के भीतर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो हरियाणा राष्ट्रीय स्तर पर विनिर्माण, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और निर्यात आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, दिल्ली-एनसीआर से निकटता और मजबूत सड़क नेटवर्क इस दिशा में अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं।

‘विकसित भारत-2047’ के अनुरूप तैयार हो रहा दीर्घकालिक रोडमैप

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के अनुसार राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ संकल्प के अनुरूप हरियाणा के लिए दीर्घकालिक विकास योजना पर काम कर रही है। इस योजना का उद्देश्य केवल अल्पकालिक औद्योगिक विस्तार नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के लिए स्थायी आर्थिक विकास का आधार तैयार करना है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक विभाग के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्येक योजना के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और प्रदर्शन आधारित समीक्षा प्रणाली विकसित की जा रही है ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

सरकार का मानना है कि नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति दोनों आएंगी।

निवेश, उद्योग और रोजगार को एक साथ जोड़ने की रणनीति

राव नरबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित करना चाहती है जिसमें निवेश, कौशल विकास, तकनीकी नवाचार, बुनियादी ढांचा और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हों।

सरकार का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी वातावरण प्रदान करना है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्य प्रणाली विकसित की जा रही है।

मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न परियोजनाओं और विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि विकास कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

10 नई औद्योगिक नीतियों को मिली मंजूरी

राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से 10 नई नीतियों को मंजूरी दी है। इन नीतियों का लक्ष्य हरियाणा को पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई तकनीकों और भविष्य के उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाना है।

इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT), एग्री-बिजनेस, खिलौना निर्माण, उभरती तकनीक और नवाचार आधारित उद्योग शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि विविध क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने से राज्य की औद्योगिक संरचना अधिक संतुलित और प्रतिस्पर्धी बनेगी।

1 जून को गुरुग्राम से होगी नई औद्योगिक नीति की शुरुआत

उद्योग मंत्री के अनुसार नई औद्योगिक नीति का औपचारिक शुभारंभ 1 जून को गुरुग्राम से किया जाएगा। गुरुग्राम पहले से ही आईटी, कॉरपोरेट और सेवा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र माना जाता है, इसलिए सरकार ने इसी शहर से नई नीति लागू करने का निर्णय लिया है।

नई नीति में निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, उद्योगों को आवश्यक अनुमतियां समय पर उपलब्ध कराने, डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने और उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी वातावरण प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

उद्योग जगत को उम्मीद है कि नीति लागू होने के बाद निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी हो सकती है।

5 लाख करोड़ निवेश, 10 लाख रोजगार और नए औद्योगिक शहरों पर सरकार का फोकस

2030-31 तक 5 लाख करोड़ रुपये निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य

हरियाणा सरकार का अनुमान है कि नई औद्योगिक नीतियों और निवेशक-अनुकूल सुधारों के प्रभाव से वर्ष 2030-31 तक राज्य में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित किया जा सकता है। यह निवेश विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी उद्योग और निर्यात आधारित क्षेत्रों में आने की संभावना जताई गई है।

सरकार का मानना है कि बड़े निवेश से राज्य की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा और निर्यात क्षमता में भी वृद्धि होगी।

यदि निर्धारित लक्ष्य प्राप्त होते हैं, तो हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक निवेश केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

10 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की योजना

राज्य सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीतियों के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसमें विनिर्माण उद्योग, आईटी सेवाएं, डेटा सेंटर, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निर्माण कार्य और सहायक उद्योगों में रोजगार शामिल हो सकते हैं।

युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार विशेष प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू करने की तैयारी कर रही है। स्थानीय युवाओं को नियुक्त करने वाले उद्योगों को वित्तीय सहायता, प्रोत्साहन और अन्य रियायतें प्रदान करने का प्रस्ताव है।

सरकार का उद्देश्य उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देना है ताकि रोजगार और उद्योग दोनों की आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

10 नए इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) होंगे विकसित

औद्योगिक विस्तार को गति देने के लिए राज्य में 10 नए इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इनमें से पांच परियोजनाओं को प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है और संबंधित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

तोशाम, जींद, रेवाड़ी, फरीदाबाद और राई को शुरुआती चरण में विकसित किए जाने वाले प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में आधुनिक औद्योगिक बुनियादी ढांचा, सड़क संपर्क, बिजली, जलापूर्ति और लॉजिस्टिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि नए औद्योगिक शहरों के विकास से क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा और विभिन्न जिलों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

‘लैंड ऑन लीज’ नीति से उद्योगों को मिलेगी राहत

निवेशकों के लिए औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) ने नई ‘लैंड ऑन लीज’ नीति लागू करने का निर्णय लिया है।

इस नीति के तहत उद्योगपतियों को भूमि लंबे समय के लिए पट्टे (लीज) पर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को लाभ मिलने की संभावना है क्योंकि उन्हें प्रारंभिक चरण में भूमि खरीदने पर बड़ी पूंजी निवेश नहीं करनी पड़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नए उद्यमियों के लिए उद्योग स्थापित करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है।

केएमपी एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित होंगे नए औद्योगिक क्लस्टर

सरकार ने बताया कि कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क, दिल्ली-एनसीआर के निकटता और लॉजिस्टिक सुविधाओं के कारण निवेशकों की विशेष रुचि रहने की संभावना है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास विकसित होने वाले ये औद्योगिक केंद्र दिल्ली पर बढ़ते औद्योगिक और आबादी के दबाव को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं।

इसके साथ ही राज्य के अन्य जिलों में भी उद्योगों का विस्तार कर संतुलित आर्थिक विकास सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

गुरुग्राम मॉडल को अन्य जिलों तक पहुंचाने की तैयारी

राव नरबीर सिंह ने कहा कि जिस प्रकार गुरुग्राम ने सूचना प्रौद्योगिकी, कॉरपोरेट सेवाओं और वैश्विक निवेश के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है, उसी प्रकार हरियाणा के अन्य जिलों को भी विनिर्माण, निर्यात और आधुनिक उद्योगों के नए केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य विकास को केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय पूरे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना है। इसके लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर कनेक्टिविटी, निवेशक-अनुकूल नीतियों और कौशल विकास कार्यक्रमों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।