हरियाणा सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए राज्य की आर्थिक और औद्योगिक तस्वीर बदलने का खाका तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तैयार किए जा रहे ‘विकसित हरियाणा’ विज़न के तहत उद्योग, तकनीक, कृषि, निर्यात और रोजगार को केंद्र में रखकर व्यापक विकास रणनीति लागू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक हरियाणा को देश के सबसे अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करना है।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ संकल्प के अनुरूप हरियाणा के लिए दीर्घकालिक विकास योजना पर काम कर रही है। इसके तहत प्रत्येक विभाग के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समयबद्ध कार्ययोजना और प्रदर्शन आधारित समीक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि निवेश, रोजगार, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे को एक साथ जोड़कर समग्र आर्थिक विकास का मॉडल तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न विभागों की प्रगति की निगरानी कर रहे हैं ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
राव नरबीर सिंह के अनुसार, हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 10 नई नीतियों को मंजूरी दी है। इन नीतियों का उद्देश्य हरियाणा को इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी सेवाओं, एग्री-बिजनेस, खिलौना निर्माण और उभरती तकनीकों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है। नई औद्योगिक नीति का औपचारिक शुभारंभ 1 जून को गुरुग्राम से किया जाएगा।
सरकार का अनुमान है कि नई नीतियों के प्रभाव से वर्ष 2030-31 तक राज्य में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं भी तैयार की गई हैं। उद्योगों को स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर वित्तीय सहायता और विभिन्न प्रकार की रियायतें उपलब्ध कराई जाएंगी।
औद्योगिक विस्तार के लिए राज्य में 10 नए इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इनमें से पांच परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। तोशाम, जींद, रेवाड़ी, फरीदाबाद और राई को शुरुआती चरण में विकसित किए जाने वाले औद्योगिक केंद्रों में शामिल किया गया है।
सरकार ने निवेशकों के लिए औद्योगिक भूखंड प्राप्त करना भी आसान बनाने का निर्णय लिया है। HSIIDC की नई ‘लैंड ऑन लीज’ नीति के तहत उद्योगपतियों को लंबे समय के लिए भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें भूमि खरीदने पर भारी पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ेगी।
राव नरबीर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास विकसित होने वाले नए औद्योगिक केंद्र दिल्ली-एनसीआर की बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों के दबाव को कम करने में सहायक साबित होंगे। कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित होने वाले औद्योगिक क्लस्टर निवेशकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम ने जिस प्रकार आईटी और कॉरपोरेट क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है, उसी प्रकार राज्य के अन्य जिलों को भी उद्योग, विनिर्माण और निर्यात के नए केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विकास को केवल कुछ शहरों तक सीमित रखने के बजाय पूरे हरियाणा में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना है।
मंत्री ने विश्वास जताया कि नई औद्योगिक नीति, आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेशक-अनुकूल माहौल के कारण आने वाले वर्षों में हरियाणा देश की औद्योगिक प्रगति का प्रमुख इंजन बनकर उभरेगा। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, किसानों के लिए नए बाजार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।


