नेपाल में कांवड़ यात्रा के विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो लोगों की मौत के बाद दो जिलों में कर्फ्यू

नेपाल में कांवड़ यात्रा के विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो लोगों की मौत के बाद दो जिलों में कर्फ्यू

नेपाल के तराई क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू हुआ एक स्थानीय विवाद अब बड़े सांप्रदायिक तनाव का कारण बन गया है। सुनसरी जिले से शुरू हुई हिंसा धीरे-धीरे आसपास के इलाकों तक फैल गई, जिसके बाद प्रशासन को हालात संभालने के लिए कर्फ्यू लागू करना पड़ा। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि आखिरकार सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी। इस पूरी घटना में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। हिंसा के बाद नेपाल की तीन साल पुरानी एक गोपनीय सुरक्षा रिपोर्ट भी फिर से चर्चा का विषय बन गई है।

पुलिस और भीड़ के बीच बढ़ा टकराव

जानकारी के मुताबिक, हालात उस समय ज्यादा बिगड़ गए जब दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। हिंसा को नियंत्रित करने पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया, जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर सहित आठ सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।

पुलिस अधिकारियों ने पहले भीड़ को समझाने और शांत करने की कोशिश की। इसके बाद भी जब लोग पीछे नहीं हटे तो चेतावनी के तौर पर हवाई फायरिंग की गई। अधिकारियों का कहना है कि हवाई गोलियां चलाने के बावजूद भीड़ लगातार उग्र बनी रही और हालात नियंत्रण से बाहर जाने लगे। इसके बाद देर रात पुलिस को मजबूर होकर भीड़ पर गोली चलानी पड़ी।

गोलीबारी में दो लोगों की गई जान

पुलिस की कार्रवाई के दौरान चली गोली से ओम प्रकाश मेहता गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। इस घटना में कई अन्य लोग भी घायल हुए थे। बाद में इलाज के दौरान जयप्रकाश मेहता ने भी दम तोड़ दिया। दोनों मौतों के बाद पूरे इलाके में तनाव और अधिक बढ़ गया।

घटना के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर तैनात किया। आसपास के पुलिस थानों के साथ-साथ आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की अतिरिक्त टुकड़ियों को भी प्रभावित इलाकों में भेजा गया ताकि स्थिति पर जल्द नियंत्रण पाया जा सके।

कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू हुआ था विवाद

बताया जा रहा है कि पूरा मामला रविवार को उस समय शुरू हुआ जब कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु कोसी बैराज से जल लेकर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर की तेज आवाज को लेकर दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच केवल कहासुनी हुई, लेकिन थोड़ी ही देर में बहस ने हिंसक रूप ले लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद दोनों समुदायों के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए। कुछ लोग हथियार लेकर भी पहुंच गए, जिसके बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते पूरा इलाका हिंसा की चपेट में आ गया और पुलिस को स्थिति संभालने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

कई इलाकों में लगाया गया कर्फ्यू

हिंसा के फैलने के बाद प्रशासन ने सुनसरी और सिराहा जिलों के संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है और बिना जरूरी कारण बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार फ्लैग मार्च कर रही हैं ताकि किसी नई घटना को रोका जा सके।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इंटरनेट और स्थानीय संचार माध्यमों पर भी प्रशासन लगातार निगरानी रखे हुए है ताकि किसी भ्रामक सूचना से हालात और खराब न हों।

पूरे तराई-मधेश क्षेत्र में दिखा असर

सुनसरी की घटना के बाद इसका असर नेपाल के अन्य तराई-मधेश क्षेत्रों में भी देखने को मिला। कई जगहों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई है और स्थानीय प्रशासन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर शांति बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

तीन साल पुरानी रिपोर्ट फिर बनी चर्चा का विषय

हालिया हिंसा के बाद नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों की एक पुरानी गोपनीय रिपोर्ट फिर सामने आ गई है। बताया जा रहा है कि करीब तीन वर्ष पहले आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें तराई और मधेश क्षेत्रों में बढ़ रहे सांप्रदायिक तनाव को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ संगठित समूह धर्म और जातीय पहचान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को सुझाव दिया था कि समय रहते राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़े विवाद से बचा जा सके।

हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि उस समय इस रिपोर्ट को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया। अब सुनसरी में हुई हिंसा के बाद वही रिपोर्ट दोबारा चर्चा में है और सवाल उठ रहे हैं कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए होते तो शायद हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते।

रिपोर्ट में पड़ोसी देशों के अनुभव से सीख लेने की सलाह

गोपनीय रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि नेपाल को दक्षिण एशिया के अन्य देशों में हुई सांप्रदायिक घटनाओं से सबक लेना चाहिए। रिपोर्ट में विशेष रूप से ऐसे मामलों का अध्ययन कर समय रहते रोकथाम की रणनीति बनाने की सिफारिश की गई थी ताकि किसी भी तरह की सामाजिक अशांति को फैलने से पहले ही नियंत्रित किया जा सके।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों में प्रशासन को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित रहने के बजाय लगातार संवाद और विश्वास बहाली के प्रयास भी करने चाहिए। उनका कहना है कि समय पर हस्तक्षेप और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहयोग से ऐसे विवादों को बड़े संघर्ष में बदलने से रोका जा सकता है।

प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की

नेपाल प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि घटना की जांच की जा रही है और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स संयुक्त रूप से गश्त कर रही हैं ताकि स्थिति सामान्य बनाई जा सके। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और शांति बहाल होने तक आवश्यक प्रतिबंध जारी रहेंगे। वहीं स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि क्षेत्र में सामान्य जनजीवन जल्द से जल्द पटरी पर लौट सके।