हरियाणा सरकार ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को लेकर अहम फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती चरण में ATS के लिए अलग से नई भर्तियां नहीं की जाएंगी। इसके बजाय पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत अनुभवी अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) के आधार पर इस विशेष इकाई में तैनात किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि मौजूदा संसाधनों का उपयोग करके ATS को कम समय में सक्रिय किया जा सकता है। नई भर्ती प्रक्रिया में समय और वित्तीय खर्च दोनों अधिक होते हैं, इसलिए फिलहाल अनुभवी कर्मियों की सेवाएं लेकर यूनिट को कार्यशील बनाने की योजना तैयार की गई है।
सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बनेगी विशेष टीम
हरियाणा में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, संगठित अपराध, गैंगस्टर नेटवर्क, अंतरराज्यीय अपराध गतिविधियों और संभावित आतंकवादी खतरों को देखते हुए लंबे समय से एक समर्पित ATS यूनिट की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी दिशा में सरकार ने विशेष बल के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, ATS का नेतृत्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे और इसमें विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। खुफिया जानकारी जुटाने, तकनीकी निगरानी, साइबर ट्रैकिंग और विशेष ऑपरेशन जैसी जिम्मेदारियां इस यूनिट के पास होंगी।
वित्तीय बोझ कम करने पर सरकार का फोकस
शुरुआती योजना में ATS के लिए बड़ी संख्या में नए पद सृजित करने का प्रस्ताव रखा गया था। कांस्टेबल से लेकर सब-इंस्पेक्टर और अन्य स्तरों पर सीधी भर्ती की संभावना पर भी विचार हुआ था। हालांकि वित्त विभाग द्वारा खर्च को लेकर जताई गई चिंताओं और प्रशासनिक समीक्षा के बाद सरकार ने फिलहाल डेप्यूटेशन मॉडल को अपनाने का फैसला किया है।
सरकार का मानना है कि इस मॉडल से न केवल अतिरिक्त वित्तीय भार कम होगा बल्कि प्रशिक्षित और अनुभवी पुलिसकर्मियों की उपलब्धता भी तुरंत सुनिश्चित हो सकेगी। इससे यूनिट को शुरू करने में होने वाली देरी से भी बचा जा सकेगा।
भविष्य में हो सकता है स्थायी ढांचा तैयार
सूत्रों का कहना है कि ATS के संचालन और आवश्यकता का आकलन करने के बाद सरकार भविष्य में स्थायी पदों के सृजन और भर्ती नियमों पर फैसला ले सकती है। यदि यूनिट का दायरा बढ़ता है और अतिरिक्त मानव संसाधन की जरूरत महसूस होती है, तो नियमित भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
फिलहाल सरकार का लक्ष्य ATS को जल्द से जल्द मैदान में उतारना है ताकि राज्य में सुरक्षा से जुड़े मामलों पर अधिक प्रभावी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। नई रणनीति के तहत अनुभवी अधिकारियों के सहारे ATS को सक्रिय करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।



