खामेनेई को चार महीने बाद दी जाएगी अंतिम विदाई, मशहद में होगा सुपुर्द-ए-खाक; करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना

खामेनेई को चार महीने बाद दी जाएगी अंतिम विदाई, मशहद में होगा सुपुर्द-ए-खाक; करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उनकी मौत के करीब चार महीने बाद अंतिम विदाई देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उन्हें उनकी इच्छा के अनुरूप देश के पवित्र शहर मशहद में इमाम रजा के दरगाह परिसर के निकट दफनाया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक अंतिम संस्कार कार्यक्रम जून के तीसरे सप्ताह में आयोजित किया जा सकता है। खामेनेई की मौत 28 फरवरी को तेहरान में हुए अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के दौरान हुई थी। सुरक्षा हालात और युद्ध की परिस्थितियों के कारण पहले प्रस्तावित अंतिम संस्कार को स्थगित कर दिया गया था।

अधिकारियों का अनुमान है कि तेहरान, कुम और मशहद में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में करीब दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। श्रद्धांजलि देने और अंतिम दर्शन के लिए जनता को तीन दिनों का समय दिया जाएगा।

मुख्य राजकीय समारोह राजधानी तेहरान में आयोजित होगा, जहां हजारों लोगों की मौजूदगी में खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर धार्मिक नगर कुम ले जाया जाएगा और वहां से मशहद पहुंचाया जाएगा। दफन से पहले दोनों शहरों में अंतिम यात्रा भी निकाली जाएगी।

यदि अनुमानित संख्या में लोग जनाजे में पहुंचते हैं तो यह आयोजन 1989 में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार से भी बड़ा साबित हो सकता है। खोमैनी के जनाजे में लगभग एक करोड़ लोग शामिल हुए थे, जिसे दुनिया के सबसे बड़े अंतिम संस्कारों में गिना जाता है।

ईरानी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतनी विशाल भीड़ को सुरक्षित ढंग से संभालने की है। पिछली बार भारी भीड़ के कारण भगदड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं, इसलिए इस बार सुरक्षा और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मुहर्रम की शुरुआत के आसपास अंतिम संस्कार कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।

मशहद को शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। यहां स्थित इमाम रजा का दरगाह दुनियाभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसी वजह से खामेनेई की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें इसी पवित्र स्थल के निकट दफनाया जाए।

गौरतलब है कि फरवरी में हुए सैन्य हमलों में खामेनेई के अलावा ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ वैज्ञानिक भी मारे गए थे। इन हमलों के बाद ईरान की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को बड़ा झटका लगा था।