श्री भैणी साहिब पहुंचे राज्यपाल कटारिया, नामधारी विरासत और कूका आंदोलन के योगदान को किया नमन

श्री भैणी साहिब पहुंचे राज्यपाल कटारिया, नामधारी विरासत और कूका आंदोलन के योगदान को किया नमन

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने लुधियाना जिले स्थित ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक केंद्र श्री भैणी साहिब का दौरा कर नामधारी पंथ की धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रवादी परंपराओं को श्रद्धापूर्वक नमन किया। राज्यपाल बनने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा थी, जिसे नामधारी समुदाय के लिए विशेष महत्व का माना जा रहा है।

इस अवसर पर नामधारी संप्रदाय के प्रमुख सतगुरु उदय सिंह ने उनका स्वागत किया और समुदाय की आध्यात्मिक विरासत, सामाजिक सुधार आंदोलनों तथा राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गुरमत समागम में लिया हिस्सा, कीर्तन का किया श्रवण

राज्यपाल ने गुरमत समागम में भाग लेकर धार्मिक वातावरण का अनुभव किया और कीर्तन का श्रवण किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती संतों, गुरुओं और समाज सुधारकों की भूमि रही है, जिन्होंने मानवता, भाईचारे और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक केंद्र आज भी समाज को नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने नामधारी समुदाय की सादगीपूर्ण जीवनशैली और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि यह परंपरा आधुनिक समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कूका आंदोलन के इतिहास को किया याद

दौरे के दौरान राज्यपाल ने परिसर में स्थित ऐतिहासिक राम मंदिर और उससे जुड़े संग्रहित दस्तावेजों व चित्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में कूका आंदोलन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इसके नायकों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की ऐसी लौ जलाई, जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी।

राज्यपाल ने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी ने सामाजिक जागरण, स्वदेशी विचारधारा और असहयोग की भावना को बढ़ावा देकर स्वतंत्रता आंदोलन की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि उनके विचार आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

शहीदों के बलिदान को बताया अमूल्य विरासत

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कूका आंदोलन से जुड़े शहीदों के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए अनेक नामधारी अनुयायियों ने अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि इतिहास में दर्ज ये बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि पंजाब ने स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अधिक योगदान देने वाले राज्यों में अग्रणी भूमिका निभाई है और नामधारी समुदाय का इतिहास इस गौरवशाली विरासत का अहम हिस्सा है।

गौ संरक्षण और सामाजिक सेवा की सराहना

राज्यपाल ने नामधारी गौशाला का भी दौरा किया और वहां चल रही गौ संरक्षण गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने गौसेवा और पशु कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं।

इसके अलावा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक जीवनशैली और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नामधारी समुदाय द्वारा किए जा रहे योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

नशामुक्त समाज के लिए बताया आदर्श मॉडल

राज्यपाल कटारिया ने कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए सामाजिक और आध्यात्मिक संगठनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने नामधारी समुदाय को अनुशासन और नशामुक्त जीवनशैली का उदाहरण बताते हुए कहा कि समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाए तो नशे जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

सम्मान समारोह भी रहा आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल को एक विशेष स्मृति-चिह्न भी भेंट किया गया, जिसमें सिख धार्मिक विरासत की झलक दिखाई गई। साथ ही विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों को सिरोपा और सम्मान चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

यह दौरा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर भी बना। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्रों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए अत्यंत आवश्यक है।