संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान की नीतियों और सैन्य गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अफगानिस्तान में आम नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों ने अफगान जनता के लिए नई परेशानियां खड़ी कर दी हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रभावित किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि अफगानिस्तान वर्षों से संघर्ष और अस्थिरता का सामना कर रहा है, लेकिन हाल के महीनों में हुई घटनाओं ने वहां के आम लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की मौत को किसी भी प्रकार की सुरक्षा कार्रवाई का हिस्सा नहीं माना जा सकता। यदि किसी अभियान में महिलाएं, बच्चे और अन्य आम लोग प्रभावित होते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
भारत ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों के सामने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2026 की शुरुआत के पहले तीन महीनों में सैकड़ों नागरिक हिंसा का शिकार हुए। भारतीय पक्ष के अनुसार, इस दौरान 372 लोगों की मौत हुई जबकि लगभग 397 अन्य घायल हुए। भारत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग रमजान के दौरान प्रभावित हुए, जब सामान्य रूप से शांति और संयम की अपेक्षा की जाती है।
बैठक में भारत ने कहा कि केवल सैन्य तर्क देकर नागरिकों की मौतों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़े, उनके परिवार उजड़ जाएं या बच्चे अनाथ हो जाएं, तो यह मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की।
भारत ने पाकिस्तान पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अफगानिस्तान के साथ व्यापार और पारगमन से जुड़े रास्तों में भी कई प्रकार की बाधाएं खड़ी की हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अफगानिस्तान एक स्थलरुद्ध (Landlocked) देश है, जिसकी समुद्री मार्गों तक सीधी पहुंच नहीं है। ऐसे में पड़ोसी देशों की जिम्मेदारी बनती है कि वे व्यापार और मानवीय सहायता के लिए सहयोग करें, लेकिन पाकिस्तान ने इस भौगोलिक स्थिति का उपयोग दबाव बनाने के साधन के रूप में किया है।
भारत के अनुसार, अफगान सामानों और व्यापारिक गतिविधियों पर लगाए गए विभिन्न प्रतिबंध न केवल क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रभावित करते हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों की भावना के भी विपरीत हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा भूमि से घिरे विकासशील देशों के लिए बनाए गए सिद्धांतों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारिक मार्गों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना क्षेत्रीय सहयोग की भावना को कमजोर करता है।
सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने अपने उन प्रयासों का भी उल्लेख किया जिनके माध्यम से उसने अफगानिस्तान की जनता की सहायता की है। भारत ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने लगातार मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं को जारी रखा है। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार, देश के सभी 34 प्रांतों में भारत समर्थित परियोजनाएं संचालित हो रही हैं और इनकी संख्या 500 से अधिक है।
भारत ने बताया कि वर्ष 2021 के बाद से उसने अफगानिस्तान को बड़े पैमाने पर राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इनमें 50 हजार टन गेहूं, सैकड़ों टन दवाइयां और वैक्सीन की खेप शामिल हैं। इसके अलावा कृषि क्षेत्र को सहायता देने के लिए हजारों लीटर कीटनाशक भी भेजे गए हैं। भारत ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल तत्काल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि अफगान समाज को दीर्घकालिक सहयोग देना भी है।
भारतीय प्रतिनिधि ने हाल में भेजी गई सहायता का जिक्र करते हुए बताया कि अप्रैल 2026 में भी भारत ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री और आवश्यक टीकों की आपूर्ति की। काबुल को भेजी गई इस सहायता में बच्चों और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संसाधन शामिल थे। भारत का कहना है कि संकट की हर घड़ी में उसने अफगानिस्तान के साथ खड़े रहने का प्रयास किया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के योगदान का भी विस्तार से उल्लेख किया गया। भारत ने बताया कि अफगानिस्तान के विभिन्न इलाकों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष परियोजनाएं चलाई गई हैं। पक्तिका, खोस्त और पक्तिया जैसे क्षेत्रों में मातृत्व स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
इसके अतिरिक्त काबुल स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के उन्नयन का कार्य भी भारत के सहयोग से किया गया है। भारत ने कैंसर उपचार केंद्र, ट्रॉमा सेंटर और अस्पतालों के निर्माण में भी योगदान दिया है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना नहीं बल्कि अफगान नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।
भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी दोहराया कि अफगानिस्तान की स्थिरता पूरे क्षेत्र की शांति और विकास के लिए आवश्यक है। यदि वहां अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर पड़ोसी देशों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर भी पड़ सकता है। इसलिए सभी देशों को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो अफगान जनता के हितों को प्राथमिकता दें।
बैठक के दौरान भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। भारत का कहना है कि अफगान जनता को इस समय सबसे अधिक जरूरत सुरक्षा, आर्थिक अवसरों और बुनियादी सुविधाओं की है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या व्यापारिक अवरोध उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण, विकास और मानवीय सहायता के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। सुरक्षा परिषद में दिए गए इस बयान को दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



