पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी सम्मेलन वीवाटेक के 10वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की डिजिटल और तकनीकी उपलब्धियों को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता सहयोग केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे यूरोप और भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को एक नए मंच पर जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने इस अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 भारत और यूरोप दोनों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। उन्होंने हाल ही में हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देगा, बल्कि निवेश, नवाचार, प्रतिभा और पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा। उनके अनुसार यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने में मदद करेगी।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया लगातार बदलावों और चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वे वर्ष 2021 में वीवाटेक सम्मेलन में शामिल हुए थे, तब पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से उत्पन्न संकट से जूझ रही थी। आज परिस्थितियां भले ही अलग हों, लेकिन चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। ऐसे समय में नवाचार और नई तकनीक ही समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में भारत ने तकनीक के माध्यम से अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। देश ने डिजिटल सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाकर शासन और विकास की दिशा में नई मिसाल कायम की है। उन्होंने बताया कि भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली विकसित की है, जिसके माध्यम से करोड़ों नागरिकों को विभिन्न सरकारी और निजी सेवाओं से जोड़ा गया है।
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की सफलता का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने वित्तीय लेन-देन की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने बताया कि आज दुनिया में होने वाले रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शनों का बड़ा हिस्सा भारत में किया जाता है। यूपीआई ने लोगों के लिए भुगतान को सरल, सुरक्षित और तेज बनाया है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि अब भारतीय पर्यटक और अन्य उपयोगकर्ता फ्रांस में भी यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकते हैं। एफिल टॉवर और पेरिस एयरपोर्ट जैसे प्रमुख स्थानों पर इसकी सुविधा उपलब्ध होना भारत की डिजिटल शक्ति का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का डिजिटल मॉडल केवल भुगतान तक सीमित नहीं है। देश ने ऐसे कई डिजिटल पब्लिक प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं जो करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बना रहे हैं। उन्होंने डिजिलॉकर का उदाहरण देते हुए बताया कि यह दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल दस्तावेज़ भंडारण प्लेटफॉर्म में से एक बन चुका है। इसके माध्यम से करोड़ों उपयोगकर्ता अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज कहीं भी और कभी भी सुरक्षित रूप से प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि डिजिलॉकर में हजारों प्रकार के आधिकारिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके कारण लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र या अन्य जरूरी दस्तावेजों की भौतिक प्रतियां साथ रखने की आवश्यकता कम हो गई है। यह पहल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के साथ-साथ नागरिकों की सुविधा भी बढ़ा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत आज दुनिया के सबसे गतिशील और ऊर्जावान नवाचार केंद्रों में से एक बन चुका है। यहां युवा उद्यमी नई तकनीकों के जरिए जटिल समस्याओं के समाधान विकसित कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने सम्मेलन में मौजूद निवेशकों, उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों को भारत मंडपम और इंडिया पैविलियन का दौरा करने का निमंत्रण दिया। पीएम मोदी ने कहा कि वहां आने वाले लोगों को भारत की नवाचार क्षमता और युवाओं की रचनात्मक सोच की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टार्टअप्स अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा प्रभाव समाज और अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। उन्होंने ऐसे स्टार्टअप्स का उल्लेख किया जो उन्नत चिकित्सा तकनीकों, आनुवंशिक उपचारों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान करने वाले समाधान विकसित कर रहे हैं। इसके अलावा कई कंपनियां साइबर सुरक्षा और नेटवर्क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए अत्याधुनिक एआई आधारित तकनीक तैयार कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में ऑटोनॉमस रोबोटिक्स, स्मार्ट सिटी तकनीक और आधुनिक मोबिलिटी समाधानों पर भी तेजी से काम हो रहा है। ये प्रयास न केवल देश के शहरी विकास को गति देंगे बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ और प्रभावी समाधान भी प्रदान करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स का उद्देश्य केवल कारोबार बढ़ाना नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजना भी है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत, फ्रांस और यूरोप के बीच तकनीकी सहयोग आने वाले समय में और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और उद्यमिता के क्षेत्र में साझेदारी दोनों पक्षों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। साथ ही यह दुनिया के सामने विकास और प्रौद्योगिकी सहयोग का एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगी।
उन्होंने कहा कि भारत आज केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। डिजिटल भुगतान से लेकर स्टार्टअप क्रांति तक, देश ने यह साबित किया है कि सही नीतियों और नवाचार के दम पर बड़े बदलाव संभव हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी प्रगति वैश्विक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



