एक समय था जब Gold के दाम 17 साल तक गिरते रहे और इतने सस्ते हो गए थे।

एक समय था जब Gold के दाम 17 साल तक गिरते रहे और इतने सस्ते हो गए थे।

Gold Price History: 88 रुपये से 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक का सफर, जानिए सोने की कीमतों में बदलाव की पूरी कहानी

भारत में सोना केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि निवेश, बचत और पारिवारिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शादी-विवाह, त्योहारों और विशेष अवसरों पर सोने की खरीदारी लंबे समय से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है। पिछले कई दशकों में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। जहां आज सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर चुकी है, वहीं देश की आजादी के समय यही सोना 100 रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध था।

सोने की कीमतों का इतिहास यह बताता है कि इसमें हमेशा लगातार तेजी ही नहीं रही, बल्कि कुछ ऐसे दौर भी आए जब लंबे समय तक इसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद लंबी अवधि में सोने ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया और इसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) के रूप में पहचान मिली।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें केवल घरेलू मांग से प्रभावित नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, डॉलर की मजबूती, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, ब्याज दरें, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आजादी के समय सोने का भाव कितना था?

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ था, तब 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 88.62 रुपये थी। उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही थी और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था भी धीरे-धीरे स्थिर हो रही थी।

हालांकि आज के मुकाबले उस समय सोने की कीमत बेहद कम दिखाई देती है, लेकिन उस दौर में आम लोगों की आय, आर्थिक स्थिति और क्रय शक्ति भी वर्तमान समय की तुलना में काफी अलग थी। इसलिए उस समय की कीमतों की तुलना आज की परिस्थितियों से सीधे तौर पर करना उचित नहीं माना जाता।

17 वर्षों तक क्यों गिरती रही सोने की कीमत?

स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार तेजी नहीं आई। उपलब्ध ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार अगले लगभग 17 वर्षों तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और इस दौरान इसकी कीमत घटकर लगभग 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। यह स्तर वर्ष 1964 के आसपास दर्ज किया गया था।

विश्लेषकों के अनुसार उस समय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्था, डॉलर की मजबूती और विभिन्न आर्थिक कारणों का प्रभाव सोने की कीमतों पर पड़ा। इस अवधि के दौरान कई निवेशकों ने सोने में निवेश को लेकर सतर्क रुख अपनाया था।

63 रुपये के बाद कभी नहीं लौटा सोना उस स्तर पर

वर्ष 1964 में लगभग 63 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ। अगले कुछ वर्षों में कीमतें फिर बढ़ने लगीं और वर्ष 1967 तक सोना 100 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया। इसके बाद दीर्घकालिक रुझान में लगातार मजबूती देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह वह दौर था जब वैश्विक आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव शुरू हो रहे थे और सोने की कीमतें भी नए आर्थिक परिवेश के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही थीं।

1971 के फैसले का पड़ा बड़ा असर

सोने की कीमतों के इतिहास में वर्ष 1971 को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इसी वर्ष अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर और सोने के बीच स्थापित विनिमय व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला लिया। इस निर्णय को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय इतिहास में “निक्सन शॉक” के नाम से जाना जाता है।

इस फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ा बदलाव आया और सोने की कीमतों में भी तेजी का नया दौर शुरू हुआ। इसके बाद सोना लंबे समय तक 100 रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे नहीं आया और आने वाले वर्षों में इसकी कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई।

1980 तक कई गुना बढ़ गई कीमत

1970 के दशक के दौरान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, मुद्रास्फीति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण सोने की मांग में तेजी आई। इसी का असर कीमतों पर भी दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1980 तक 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,330 रुपये के स्तर तक पहुंच गई थी।

यह बढ़ोतरी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि वैश्विक आर्थिक घटनाएं किस प्रकार कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।

पिछले पांच वर्षों में क्यों बढ़े सोने के दाम, किन कारणों से लगातार मजबूत हो रही है कीमत?

पांच वर्षों में लगभग दोगुनी हुई कीमत

हाल के वर्षों में भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2020 में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 50,151 रुपये थी। इसके बाद लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा और वर्ष 2025 में यह कीमत 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गई।

इस अवधि के दौरान सोने ने निवेशकों को उल्लेखनीय रिटर्न दिया। विशेष रूप से उन निवेशकों को लाभ मिला जिन्होंने लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश बनाए रखा।

2023 और 2024 में भी बनी रही तेजी

मार्च 2023 में पहली बार सोने की कीमत 60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से ऊपर पहुंची थी। इसके बाद अप्रैल 2024 में यह 70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई। वर्ष 2025 में तेजी और अधिक मजबूत हुई तथा कीमतें 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चली गईं।

बाजार के आंकड़ों के अनुसार केवल वर्ष 2025 में ही सोने ने लगभग 32 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया, जिसने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर इस सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर आकर्षित किया।

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव का प्रभाव

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता, सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही है। जब वैश्विक व्यापार को लेकर अस्थिरता बढ़ती है, तब निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने की मांग बढ़ सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कम होती है और निवेशकों की प्राथमिकता पूंजी की सुरक्षा बन जाती है।

कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल का भी सोने की कीमतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तब कई बार सोने की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के उद्देश्य से सोने की खरीदारी करते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक सहित कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने हाल के वर्षों में अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि की है। इससे भी वैश्विक स्तर पर सोने की मांग को समर्थन मिला है।

भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग

दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोखिम बढ़ता है, तब निवेशक अपनी पूंजी को अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों में स्थानांतरित करने का प्रयास करते हैं।

इसी कारण सोने को लंबे समय से “सेफ हेवन एसेट” के रूप में देखा जाता है। आर्थिक या राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में इसकी मांग बढ़ने की संभावना अधिक रहती है।

निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि सोने की कीमतें समय-समय पर बदलती रहती हैं और इनमें उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए केवल अल्पकालिक तेजी या गिरावट के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेने के बजाय निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और पोर्टफोलियो विविधीकरण को ध्यान में रखना चाहिए।

सोने में निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें भौतिक सोना, गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड म्यूचुअल फंड शामिल हैं। निवेश का माध्यम चुनने से पहले संबंधित उत्पाद की विशेषताओं, जोखिम और लागत को समझना आवश्यक माना जाता है।

Leave a Reply