हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए लंबित मेडिकल प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए 20 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया है। इस कदम से निगम के हजारों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को लंबे समय से लंबित भुगतान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के इस निर्णय को एचआरटीसी परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि काफी समय से कर्मचारी और पेंशनर मेडिकल खर्चों की प्रतिपूर्ति का इंतजार कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार, इस राशि का लाभ करीब 11 हजार कार्यरत कर्मचारियों और लगभग पांच हजार पेंशनरों को मिलेगा। निगम प्रबंधन को धनराशि उपलब्ध होने के बाद भुगतान प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पात्र लाभार्थियों के खातों में भुगतान पहुंचना शुरू हो जाएगा। जारी की गई राशि का उपयोग मार्च 2026 तक लंबित पड़े मेडिकल प्रतिपूर्ति दावों के निपटारे के लिए किया जाएगा।
लंबे समय से अटके थे मेडिकल भुगतान
एचआरटीसी कर्मचारियों और पेंशनरों के सामान्य मेडिकल प्रतिपूर्ति दावे काफी समय से लंबित चल रहे थे। इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर स्वयं खर्च की गई राशि की वापसी न होने से कई परिवार आर्थिक दबाव महसूस कर रहे थे। कर्मचारियों के संगठनों और पेंशनर प्रतिनिधियों द्वारा भी इस मुद्दे को लगातार सरकार और निगम प्रबंधन के समक्ष उठाया जा रहा था।
हालांकि गंभीर बीमारियों से संबंधित मामलों में निगम समय-समय पर भुगतान करता रहा है। बताया जाता है कि ऐसे मामलों में हर महीने 30 से 40 लाख रुपये तक की राशि जारी की जाती रही है, ताकि गंभीर रोगों से जूझ रहे कर्मचारियों और पेंशनरों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद सामान्य श्रेणी के हजारों दावे वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण लंबित बने हुए थे।
कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगी आर्थिक राहत
सरकार द्वारा 20 करोड़ रुपये जारी किए जाने के बाद कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। कई परिवारों ने चिकित्सा उपचार के लिए अपनी बचत खर्च की थी और प्रतिपूर्ति राशि मिलने का इंतजार कर रहे थे। भुगतान शुरू होने से उनके ऊपर पड़ा आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम होगा।
निगम प्रबंधन ने भी संकेत दिए हैं कि भुगतान प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द समाधान हो सके। इससे कर्मचारियों और पेंशनरों में संतोष का माहौल बनने की संभावना है।
कर्मचारी संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
सरकार के इस निर्णय का विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि मेडिकल प्रतिपूर्ति का मुद्दा लंबे समय से लंबित था और इसे लेकर कई बार सरकार से मांग की गई थी। संगठनों का मानना है कि इससे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा तथा उन्हें आर्थिक सुरक्षा का एहसास होगा।
प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी मेडिकल प्रतिपूर्ति और अन्य वित्तीय देनदारियों के भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होगी और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
वेतन, पेंशन और ओवरटाइम को लेकर भी बढ़ा दबाव
मेडिकल बिलों के भुगतान के साथ-साथ एचआरटीसी कर्मचारियों के अन्य मुद्दे भी चर्चा में हैं। कर्मचारियों की ओर से समय पर वेतन, पेंशन, लंबित एरियर, ओवरटाइम भुगतान और नियमितीकरण जैसी मांगें लगातार उठाई जा रही हैं। पेंशनरों का कहना है कि उन्हें निर्धारित समय पर पेंशन नहीं मिल रही, जिससे दैनिक जरूरतों और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को पूरा करने में कठिनाई हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, वित्त विभाग ने पेंशन भुगतान के लिए भी धनराशि मंजूर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद राशि जारी की जाएगी, जिससे पेंशन भुगतान की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। कर्मचारी संगठन पहले भी यह मांग कर चुके हैं कि वेतन और पेंशन की तिथि तय कर उसे सख्ती से लागू किया जाए।
उपमुख्यमंत्री के साथ आज महत्वपूर्ण बैठक
एचआरटीसी कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर 25 जून से बस सेवाएं प्रभावित करने की चेतावनी दिए जाने के बाद सरकार भी सक्रिय हो गई है। इसी संदर्भ में मंगलवार को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में संयुक्त समन्वय समिति और कर्मचारी प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की जा रही है।
इस बैठक में कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें समय पर वेतन और पेंशन भुगतान, लंबित एरियर, ओवरटाइम की अदायगी, नियमितीकरण और अन्य प्रशासनिक विषय शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि बैठक में सकारात्मक और ठोस निर्णय लिए जाते हैं तो प्रस्तावित आंदोलन पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
हड़ताल को लेकर बैठक के नतीजों पर नजर
कर्मचारी संगठनों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि 25 जून से बसों का संचालन प्रभावित करने संबंधी निर्णय अंतिम नहीं है और यह सरकार के साथ होने वाली वार्ता के परिणाम पर निर्भर करेगा। यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों के समाधान के लिए स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करती है तो आंदोलन टाला जा सकता है।
दूसरी ओर, यदि कर्मचारियों को संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलता है, तो परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में मंगलवार की बैठक को एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तबादले का मुद्दा भी उठेगा
कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि बैठक में संगठन से जुड़े एक कर्मचारी नेता के चंबा तबादले का मामला भी उठाया जाएगा। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि यह विषय भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है और वे इसे सरकार के समक्ष मजबूती से रखेंगे।
फिलहाल सभी की नजर उपमुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। एक ओर सरकार मेडिकल दावों के भुगतान के लिए धनराशि जारी कर कर्मचारियों को राहत देने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान पर भी चर्चा होने जा रही है। ऐसे में बैठक के परिणाम से यह तय होगा कि 25 जून से प्रस्तावित आंदोलन आगे बढ़ेगा या फिर सहमति के जरिए विवाद का समाधान निकल सकेगा।


