हरियाणा में संचालित निजी स्कूलों और उनसे जुड़ी शैक्षणिक सोसायटियों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। राज्य सरकार उन हजारों एजुकेशन सोसायटियों पर लगाए गए भारी-भरकम जुर्माने को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिन पर पिछले कई वर्षों से पेनल्टी का बोझ बना हुआ है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस विषय को प्रमुखता से उठाया। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जुर्माने के कारण बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थाओं के प्रशासनिक और कानूनी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल अपने कार्यालय के अधिकारियों से संबंधित फाइल मंगवाई और मामले के शीघ्र समाधान का भरोसा दिया।
लंबे समय से लंबित मांग को मिली नई उम्मीद
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि यह मुद्दा नया नहीं है और इसे लेकर सरकार के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि पूर्व में हुई बैठकों के दौरान भी एजुकेशन सोसायटियों पर लगाए गए जुर्माने को समाप्त करने का आश्वासन दिया गया था।
स्कूल संचालकों के अनुसार, आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक औपचारिक आदेश जारी नहीं होने से हजारों संस्थाएं असमंजस की स्थिति में हैं। कई मामलों में दस्तावेजी कार्य, नवीनीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं केवल इसी कारण लंबित पड़ी हुई हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार इस विषय पर शीघ्र अधिसूचना जारी करे ताकि लंबे समय से अटकी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा सके।
कैसे बढ़ता गया जुर्माने का बोझ?
निजी स्कूल संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सोसायटी पंजीकरण से जुड़े नियमों के तहत सभी पंजीकृत संस्थाओं को समय-समय पर अपने दस्तावेजों का नवीनीकरण कराना होता है। इसी व्यवस्था के तहत वर्ष 2017 में वार्षिक शुल्क जमा कराने की ऑनलाइन प्रणाली लागू की गई थी।
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के साथ यह भी निर्धारित किया गया कि यदि कोई संस्था निर्धारित समय पर शुल्क जमा नहीं करती है तो उस पर प्रतिदिन के हिसाब से आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यह पेनल्टी 20 रुपये प्रतिदिन तय की गई थी।
स्कूल संचालकों का आरोप है कि बड़ी संख्या में सोसायटियों को इस नई व्यवस्था और जुर्माने से जुड़े नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बावजूद कई मामलों में वर्षों का जुर्माना जोड़ दिया गया, जिससे राशि लगातार बढ़ती चली गई।
कई संस्थाओं पर लाखों रुपये की देनदारी
संघ के अनुसार वर्तमान स्थिति यह है कि अनेक शैक्षणिक सोसायटियों पर मूल शुल्क से कई गुना अधिक जुर्माना बकाया दिखाया जा रहा है। कुछ मामलों में यह राशि एक लाख रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है।
निजी स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इतनी बड़ी रकम जमा करना छोटे और मध्यम स्तर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए बेहद कठिन है। विशेष रूप से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों को इससे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उनका तर्क है कि यदि सरकार जुर्माना माफ कर देती है तो संस्थाएं केवल नियमित शुल्क जमा कर अपनी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगी।
शिक्षा संस्थानों के कामकाज पर पड़ा असर
स्कूल संचालकों के अनुसार, लंबित पेनल्टी के कारण कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित हुई हैं। अनेक सोसायटियां अपने दस्तावेज अपडेट नहीं कर पा रही हैं, जबकि कुछ मामलों में बैंकिंग, संपत्ति और प्रशासनिक कार्य भी बाधित हो रहे हैं।
संघ का कहना है कि शिक्षा संस्थान बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रहे हैं और उन्हें अनावश्यक प्रशासनिक बोझ से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जुर्माना माफी से संस्थानों को राहत मिलेगी और वे अपने संसाधनों का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में कर सकेंगे।
सरकार के सकारात्मक रुख से बढ़ी उम्मीद
मुख्यमंत्री के समक्ष मामला उठने के बाद निजी स्कूल संचालकों में उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही इस संबंध में स्पष्ट निर्णय ले सकती है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने विषय को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
सरकार का रुख भी इस दिशा में सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि पहले भी इस मुद्दे पर राहत देने का संकेत दिया जा चुका है। अब सभी की नजर उस आधिकारिक पत्र या आदेश पर टिकी है, जिसके जारी होने के बाद जुर्माना माफी की प्रक्रिया औपचारिक रूप से लागू हो सकेगी।
हजारों सोसायटियों को मिल सकता है सीधा लाभ
यदि सरकार जुर्माना माफ करने का निर्णय लागू करती है, तो इसका लाभ राज्यभर की हजारों पंजीकृत एजुकेशन सोसायटियों को मिलेगा। इनमें निजी स्कूलों के अलावा कई अन्य शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाएं भी शामिल हैं, जो सोसायटी पंजीकरण कानून के तहत संचालित होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संस्थानों को प्रशासनिक राहत मिलने के साथ-साथ सरकारी विभागों में लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी। बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन, जो केवल वित्तीय बकाया के कारण रुके हुए हैं, आगे बढ़ सकेंगे।
शिक्षा क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में कदम
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि सरकार यह निर्णय लागू करती है तो इसे शिक्षा संस्थानों के लिए राहत पैकेज के रूप में देखा जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे निजी स्कूलों को इससे महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी नियम से बचना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान प्राप्त करना है। वे नियमित शुल्क जमा करने और आवश्यक नियमों का पालन करने के पक्षधर हैं, लेकिन अत्यधिक जुर्माने के कारण कई संस्थाएं कठिनाई में हैं।
जल्द जारी हो सकता है आदेश
सरकारी स्तर पर हुई चर्चा के बाद माना जा रहा है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस मामले पर अंतिम निर्णय लेकर आदेश जारी कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो वर्षों से लंबित यह मुद्दा समाप्त हो जाएगा और हजारों शैक्षणिक सोसायटियों को राहत मिलेगी।
फिलहाल निजी स्कूल संचालक और सोसायटी प्रतिनिधि सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जुर्माना माफी का निर्णय न केवल संस्थानों को आर्थिक राहत देगा, बल्कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रशासनिक कार्यों को भी गति प्रदान करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से होने वाली घोषणा पर पूरे शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है।



