दिल्ली पहुंचे ईरानी तेल मंत्री का बड़ा बयान: भारत के साथ नए आर्थिक रिश्तों की तैयारी, ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

दिल्ली पहुंचे ईरानी तेल मंत्री का बड़ा बयान: भारत के साथ नए आर्थिक रिश्तों की तैयारी, ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

ईरान और भारत के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद भारत दौरे पर पहुंचे हैं और उनके शुरुआती बयानों से संकेत मिले हैं कि दोनों देश आर्थिक और ऊर्जा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। नई दिल्ली पहुंचने के बाद ईरानी मंत्री ने भारत के साथ व्यापारिक और ऊर्जा साझेदारी को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया और कहा कि उनका देश भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।

मोहसिन पाकनेजाद भारत में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने आए हैं। इस दौरान वह भारतीय अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे। माना जा रहा है कि इन बैठकों में तेल, गैस, निवेश और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को लेकर चर्चा हो सकती है।

ईरानी मंत्री ने भारत पहुंचने के बाद कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल मौजूदा समय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे लंबा ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच पुराने समय से मजबूत रिश्ते रहे हैं और अब इन्हें आर्थिक क्षेत्र में नई दिशा देने की जरूरत है। खासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए ईरान पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, आने वाली बैठकों में जो भी बातचीत होगी, उसमें दोनों देशों के हितों और सहयोग के नए रास्तों पर ध्यान दिया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र को दोनों देशों के रिश्तों का एक अहम आधार माना जा रहा है।

तेल और गैस सहयोग पर होगी अहम बातचीत

ईरानी पेट्रोलियम मंत्री के इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। वहीं ईरान तेल और गैस संसाधनों के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में गिना जाता है।

दोनों देशों के बीच बातचीत में कच्चे तेल की आपूर्ति, ऊर्जा निवेश, गैस परियोजनाओं और भविष्य की संभावनाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रहे बदलावों और आने वाले समय की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।

भारत और ईरान पहले भी ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दोनों देशों के बीच तेल व्यापार में कई बार रुकावटें आई हैं। अब ईरान की ओर से आए नए संकेतों को ऊर्जा संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

प्रतिबंधों और 60 दिनों की छूट पर ईरानी मंत्री का बयान

ईरानी तेल मंत्री से जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल ईरान को 60 दिनों की छूट मिली हुई है और इसी स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।

मोहसिन पाकनेजाद ने कहा कि प्रतिबंधों से जुड़े मामलों पर फिलहाल मिली छूट के तहत काम किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर ज्यादा विस्तार से जानकारी बैठकों के खत्म होने के बाद ही साझा की जाएगी।

ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिसका असर उसके तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े बाजार के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ाने की कोशिश ईरान के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत के लिए भी ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा अहम

भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इसके लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में भारत अलग-अलग देशों के साथ ऊर्जा संबंध मजबूत करने की कोशिश करता रहा है ताकि कच्चे तेल की आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके।

ईरान भारत के लिए भौगोलिक और रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण देश रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों के अलावा परिवहन, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ता है तो इससे व्यापार के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रतिबंधों से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।

ब्रिक्स बैठक में ऊर्जा मुद्दों पर मंथन

ईरानी मंत्री की भारत यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भाग लेना भी है। इस बैठक में वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। दुनिया भर में ऊर्जा बाजार लगातार बदल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक मांग में बदलाव का असर तेल बाजार पर दिखाई देता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत इस मंच पर अपनी ऊर्जा जरूरतों और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा करेगा, वहीं ईरान भी अपने ऊर्जा संसाधनों और संभावित साझेदारियों को लेकर सक्रिय नजर आ रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से तेल बाजार को राहत

इस बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल देखने को मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही आसान होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

गुरुवार सुबह वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1.79 प्रतिशत यानी 1.32 डॉलर प्रति बैरल नीचे आकर 72.42 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी कमजोर हुआ और करीब 1.63 प्रतिशत यानी 1.15 डॉलर की गिरावट के साथ 69.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

तेल बाजार में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी मार्ग से होता है। यहां किसी भी तरह की परेशानी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत-ईरान संबंधों में आगे क्या?

ईरानी मंत्री के बयान से साफ है कि तेहरान भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने में रुचि रखता है। अब नजर इस बात पर होगी कि दिल्ली में होने वाली बैठकों में दोनों देशों के बीच किस तरह के फैसले सामने आते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अलावा निवेश और व्यापार के नए अवसरों पर भी बातचीत हो सकती है। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो आने वाले समय में भारत और ईरान के आर्थिक संबंधों को नई गति मिल सकती है।

फिलहाल ईरानी मंत्री की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाली बैठकों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि भारत और ईरान के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।