संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि जम्मू-कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं था और न ही भविष्य में होगा। वहीं, भारत ने पाकिस्तान के इस रुख को खारिज करते हुए साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और पूरी तरह आंतरिक मामला है।
यह विवाद उस समय सामने आया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कश्मीर को लेकर अपनी-अपनी स्थिति रखी। भारत ने जहां संयुक्त राष्ट्र के मंच के राजनीतिक इस्तेमाल पर पाकिस्तान की आलोचना की, वहीं पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों का हवाला देते हुए कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बताया।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने भारत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कश्मीर का मुद्दा अभी भी सुरक्षा परिषद के एजेंडे में मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने से इनकार कर रहा है और इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग नहीं कर रहा।
असीम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद में पाकिस्तान एक पक्ष है और इस मुद्दे को लेकर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की मध्यस्थता की कोशिशों और अध्याय-6 के तहत आने वाले प्रावधानों का भी जिक्र किया।
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कहा कि कश्मीर को भारत का हिस्सा बताना सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की भावना के खिलाफ है। उनका कहना था कि इस क्षेत्र का अंतिम दर्जा तय होना बाकी है और इसी वजह से पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय विवाद मानता है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य वहां के लोगों की इच्छा के आधार पर तय होना चाहिए। पाकिस्तान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार इस मुद्दे का समाधान होना चाहिए। हालांकि भारत लंबे समय से पाकिस्तान के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता आया है और इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा विषय बताता है।
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान के रुख का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
पी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर यह भी कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद के पुराने जनादेशों की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर चल रही समीक्षा प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जब महासभा के फैसलों और जनादेशों की समीक्षा हो रही है, तो सुरक्षा परिषद के फैसलों को भी इससे अलग नहीं रखा जाना चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-6 से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता और बातचीत से जुड़े उपाय उस समय की परिस्थितियों के अनुसार बनाए गए थे और बदलते समय के साथ उनकी समीक्षा जरूरी हो सकती है।
भारत का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े हालात पिछले दशकों में काफी बदल चुके हैं और वर्तमान स्थिति को पुराने संदर्भों से नहीं देखा जा सकता। भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया, विकास और प्रशासनिक व्यवस्था भारत के संवैधानिक ढांचे के तहत चल रही है।
इस पूरे विवाद में दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपनी पुरानी नीतियों को दोहराया। पाकिस्तान ने जहां सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया, वहीं भारत ने इसे पूरी तरह आंतरिक मामला बताते हुए पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
बैठक के दौरान चर्चा में आया ‘आरिया फॉर्मूला’ भी सुर्खियों में रहा। आरिया फॉर्मूला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक प्रणाली है, जिसकी शुरुआत वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो अरिया के नाम पर हुई थी। इस प्रारूप के तहत सुरक्षा परिषद के सदस्य और अन्य पक्ष औपचारिक प्रक्रिया से अलग किसी मुद्दे पर बातचीत कर सकते हैं।
इस तरह की बैठकों में आमतौर पर किसी मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाता है, लेकिन इनके फैसले सुरक्षा परिषद के आधिकारिक निर्णय नहीं माने जाते। इसी वजह से आरिया फॉर्मूला के तहत हुई चर्चा को लेकर भी दोनों देशों ने अपने-अपने नजरिए से प्रतिक्रिया दी।
कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दोनों देशों के बीच 1947 के बाद से कई बार तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ था और यह मामला अब पूरी तरह भारत का आंतरिक विषय है।
वहीं पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला देता है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद अब भी कायम हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समय-समय पर इसको लेकर बयानबाजी होती रहती है।
संयुक्त राष्ट्र में हुई इस ताजा बहस ने एक बार फिर साफ कर दिया कि कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। पाकिस्तान जहां इसे अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश कर रहा है, वहीं भारत इसे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा मुद्दा मानता है।


