प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे। हिंद महासागर में बसे इस छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। राजधानी विक्टोरिया में सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की। इस दौरान दोनों नेताओं ने प्रसिद्ध नेशनल बोटैनिकल गार्डन का दौरा किया और वहां मौजूद दुनिया की सबसे खास प्रजातियों में शामिल एल्डाब्रा जायंट कछुओं को पत्तियां खिलाईं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच सदियों पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी सामने लाता है। करीब 256 साल पहले इस द्वीपीय देश में बसने वाले शुरुआती लोगों में भारतीय भी शामिल थे। आज भी सेशेल्स की आबादी में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी है।
मोदी 29 जून को सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
पहली बस्ती से ही भारत का जुड़ा रिश्ता
सेशेल्स का इतिहास काफी पुराना है। 1502 में पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा ने इन द्वीपों की खोज की थी। हालांकि लंबे समय तक यहां कोई स्थायी आबादी नहीं थी। अलग-अलग देशों के जहाज यहां रुकते थे, लेकिन बसावट नहीं हुई थी।
साल 1770 में फ्रांस ने पहली बार सेशेल्स में स्थायी बस्ती स्थापित की। उस समय यहां पहुंचे 27 लोगों के समूह में 15 फ्रांसीसी लोग, 7 अफ्रीकी गुलाम और 5 भारतीय भी शामिल थे। यही लोग सेशेल्स के शुरुआती स्थायी निवासियों में गिने जाते हैं।
इसके बाद 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। खासतौर पर बिहार के भोजपुरी भाषी इलाकों से आए मजदूरों और कामगारों ने यहां अपनी नई जिंदगी शुरू की। बाद के वर्षों में तमिलनाडु और गुजरात से भी व्यापारी और अन्य लोग सेशेल्स पहुंचे। धीरे-धीरे भारतीय समुदाय ने यहां की अर्थव्यवस्था और समाज में अपनी मजबूत पहचान बनाई। आज सेशेल्स में रहने वाले भारतीय मूल के लोग दोनों देशों के रिश्तों की एक अहम कड़ी माने जाते हैं।
सेशेल्स की आबादी में भारतीयों की बड़ी मौजूदगी
सेशेल्स की कुल आबादी करीब 1.20 लाख है। इनमें लगभग हर आठवां व्यक्ति भारतीय मूल से जुड़ा हुआ माना जाता है। भारतीय समुदाय ने यहां व्यापार, शिक्षा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सेशेल्स के राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन का संबंध भी भारत से जुड़ा हुआ है। उनके पूर्वज बिहार के गोपालगंज जिले के परसौनी गांव से जुड़े थे। बताया जाता है कि उनके परदादा करीब 138 साल पहले बिहार से निकलकर कोलकाता पहुंचे थे। इसके बाद वे मजदूरी के लिए मॉरीशस गए और बाद में उनका परिवार सेशेल्स में बस गया।
रामकलावन ने साल 2018 में अपने पूर्वजों के गांव परसौनी का दौरा भी किया था। उनकी कहानी भारत और सेशेल्स के बीच मौजूद ऐतिहासिक रिश्तों को दर्शाती है।
एल्डाब्रा कछुए बने मोदी दौरे का खास आकर्षण
प्रधानमंत्री मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान एल्डाब्रा जायंट कछुए भी चर्चा में रहे। यह प्रजाति दुनिया की सबसे प्रसिद्ध विशाल कछुआ प्रजातियों में से एक है। अपनी लंबी उम्र और विशाल आकार के कारण ये कछुए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। एल्डाब्रा जायंट कछुओं की औसत उम्र करीब 150 साल तक हो सकती है। इनकी धीमी जीवनशैली और लंबी आयु वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय रही है।
दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। उसकी उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। बाद में उसे सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था। वैज्ञानिक जोनाथन और इस प्रजाति के अन्य कछुओं का अध्ययन कर रहे हैं ताकि लंबी उम्र के रहस्यों को समझा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इन जीवों की कोशिकाओं में इंसानों की तुलना में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया काफी अलग होती है।
भारत-सेशेल्स रिश्तों के 50 साल पूरे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस यात्रा से पहले कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने सेशेल्स को भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी बताया। मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते भरोसे, लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी सम्मान और लोगों के बीच मजबूत संपर्क पर आधारित हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
भारत के लिए सेशेल्स रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हिंद महासागर के अहम क्षेत्र में स्थित है। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, आपदा प्रबंधन और विकास परियोजनाओं में दोनों देश लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि वह सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। उन्होंने इसे दोनों देशों के लोकतांत्रिक संबंधों का प्रतीक बताया। स यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। भारतीय मूल के लोगों ने पीढ़ियों से दोनों देशों के बीच दोस्ती को मजबूत करने का काम किया है। मोदी ने कहा कि भारतीय समुदाय ने सेशेल्स के विकास और दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हिंद महासागर में बढ़ेगा सहयोग
भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों तक सीमित नहीं है। दोनों देश समुद्री क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं। हिंद महासागर में बदलती परिस्थितियों के बीच भारत सेशेल्स को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है। दोनों देशों के बीच समुद्री निगरानी, सुरक्षा सहयोग और विकास योजनाओं को लेकर लगातार बातचीत होती रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
सेशेल्स की धरती पर मोदी का कछुओं को पत्तियां खिलाने वाला वीडियो भले ही सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बना, लेकिन इसके पीछे भारत और सेशेल्स के बीच छिपा 256 साल पुराना रिश्ता और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी सबसे बड़ी कहानी है।



