सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट देखने को मिली है। पिछले कुछ समय में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाली दोनों कीमती धातुओं के दाम अब नीचे आ गए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत में इस हफ्ते करीब ₹5 हजार की कमी दर्ज की गई है, जबकि चांदी के भाव में ₹15 हजार से ज्यादा की गिरावट आई है।
IBJA के आंकड़ों के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत अब घटकर करीब ₹1.40 लाख रह गई है। पिछले हफ्ते 20 जून को यही कीमत लगभग ₹1.45 लाख रुपए थी। यानी एक सप्ताह के अंदर सोने के भाव में करीब ₹5,097 की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी तरफ चांदी की कीमत भी तेजी से नीचे आई है। एक किलो चांदी जो पहले ₹2.32 लाख रुपए के आसपास बिक रही थी, वह अब गिरकर लगभग ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो रह गई है। यानी चांदी में करीब ₹15,432 रुपए की कमी आई है।
पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी ने निवेशकों को काफी आकर्षित किया था। दोनों धातुओं ने अपने रिकॉर्ड स्तर बनाए थे, लेकिन अब वैश्विक हालात बदलने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की रणनीति बदलने से कीमती धातुओं में यह गिरावट देखने को मिल रही है।
रिकॉर्ड तेजी के बाद अब सोने-चांदी में बड़ी गिरावट
साल 2025 के अंत से लेकर 2026 की शुरुआत तक सोने और चांदी के दामों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी। 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत करीब ₹1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद इसमें तेजी आई और 29 जनवरी को सोना बढ़कर लगभग ₹1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अब सोने में लगातार गिरावट देखने को मिली है। मौजूदा स्तर की तुलना करें तो जनवरी के सबसे ऊंचे भाव से सोना करीब ₹36 हजार रुपए तक सस्ता हो चुका है। यानी कुछ ही महीनों में सोने की चमक कमजोर हुई है।
चांदी में गिरावट और भी ज्यादा देखने को मिली है। साल के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत करीब ₹2.30 लाख रुपए किलो थी। इसके बाद जनवरी में इसमें जबरदस्त उछाल आया और 29 जनवरी को चांदी का भाव करीब ₹3.86 लाख रुपए किलो तक पहुंच गया था। यह चांदी का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना गया।
लेकिन इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट शुरू हुई। पिछले 149 दिनों में चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब ₹1.69 लाख रुपए तक गिर चुकी है। यानी जिस चांदी ने कुछ समय पहले निवेशकों को भारी रिटर्न दिया था, अब उसमें बड़ी बिकवाली का असर दिखाई दे रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने से बदला निवेशकों का रुख
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक वैश्विक तनाव में कमी को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और युद्धविराम समझौते की खबरों के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष का खतरा कम हुआ है।
जब दुनिया में युद्ध या आर्थिक संकट का डर बढ़ता है तो निवेशक सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में खरीदते हैं। इसे “सेफ हेवन एसेट” कहा जाता है। लेकिन जब हालात सामान्य होने लगते हैं तो निवेशक इन धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों में निवेश करना शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद सोने और चांदी की मांग में कमी आई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
अमेरिकी फेड के संकेतों से भी दबाव बढ़ा
सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों का भी बड़ा असर पड़ता है। हाल ही में फेड की ओर से मिले संकेतों ने बाजार की उम्मीदों को बदल दिया है। फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की बजाय उन्हें ऊंचे स्तर पर बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना हो सकती है। इसका सीधा असर सोने पर पड़ता है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता।
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक अक्सर ऐसे विकल्पों की ओर जाते हैं जहां उन्हें रिटर्न मिल सके। इससे सोने जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश की मांग कम हो जाती है और कीमतों में गिरावट आने लगती है।
डॉलर मजबूत होने से भी टूटा सोना-चांदी का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करती है। फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है।आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी कमजोर पड़ते हैं। इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं की कीमत डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग घट सकती है।
यही कारण है कि डॉलर में तेजी का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिला है और सोने-चांदी के भाव नीचे आए हैं।
रिकॉर्ड भाव के बाद निवेशकों ने की मुनाफावसूली
सोने और चांदी की कीमतें जब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं तो कई बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने अपने निवेश से मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसे मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग कहा जाता है।
जब किसी संपत्ति की कीमत बहुत तेजी से बढ़ती है तो निवेशक ऊंचे स्तर पर उसे बेचकर फायदा कमाते हैं। बड़ी मात्रा में बिक्री होने से बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतों में गिरावट आने लगती है। सोने और चांदी में भी यही देखने को मिला। रिकॉर्ड तेजी के बाद बड़े निवेशकों की बिकवाली ने कीमतों को नीचे खींच दिया।
गोल्ड और सिल्वर ETF में भी भारी बिकवाली
कीमती धातुओं से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में भी हाल के दिनों में बिकवाली देखने को मिली है। निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश से हटने के कारण गोल्ड और सिल्वर ETF पर दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिल्वर ETF में करीब 6% तक गिरावट देखी गई है, जबकि गोल्ड ETF में भी लगभग 3% की कमजोरी आई है। ETF में होने वाली खरीद-बिक्री का असर बाजार की कीमतों पर भी पड़ता है।
जानकारों के मुताबिक, अगर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम रहती है और डॉलर मजबूत बना रहता है तो सोने-चांदी की कीमतों पर आगे भी दबाव रह सकता है। हालांकि लंबे समय में महंगाई, ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के आधार पर इनकी कीमतों में फिर बदलाव संभव है।
फिलहाल इस हफ्ते की गिरावट के बाद सोना और चांदी दोनों अपने हालिया रिकॉर्ड स्तरों से काफी नीचे आ चुके हैं। निवेशकों की नजर अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक बाजार की दिशा पर बनी हुई है।




