आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड हमारी डेली लाइफ का हिस्सा बन चुका है। कई बार ऐसा होता है कि पेट भरा होता है, शरीर को खाने की जरूरत भी नहीं होती, फिर भी दिमाग बार-बार कुछ स्वादिष्ट और अनहेल्दी खाने के लिए मजबूर करता है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कुकीज और पैकेट वाले स्नैक्स जैसी चीजों की क्रेविंग धीरे-धीरे आदत में बदल जाती है।
यही आदत आगे चलकर वजन बढ़ने, मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर और दूसरी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है। बहुत से लोग वजन कम करने के लिए जिम जाना शुरू करते हैं या डाइट प्लान फॉलो करते हैं, लेकिन इसके बावजूद बार-बार जंक फूड खाने की इच्छा उन्हें पीछे खींच लेती है। इसकी वजह सिर्फ भूख नहीं बल्कि हमारा दिमाग भी होता है, जो स्वाद और तुरंत मिलने वाले आनंद के कारण बार-बार ऐसी चीजों की मांग करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिस तरह दिमाग को कोई नई आदत या स्किल सीखने के लिए ट्रेन किया जा सकता है, उसी तरह खाने की पसंद को भी बदला जा सकता है। कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके दिमाग को धीरे-धीरे हेल्दी फूड की तरफ मोड़ा जा सकता है।
सबसे पहले समझें भूख और क्रेविंग का अंतर
अक्सर लोग भूख और क्रेविंग को एक ही समझ लेते हैं। असली भूख शरीर की जरूरत होती है, लेकिन क्रेविंग दिमाग की इच्छा होती है। जब हमें बिना भूख के भी कुछ मीठा, नमकीन या तला हुआ खाने का मन करता है तो यह शरीर की जरूरत नहीं बल्कि दिमाग का सिग्नल होता है। जंक फूड में मौजूद ज्यादा नमक, चीनी और फैट दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को एक्टिव कर देते हैं। इससे थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है और फिर वही चीज दोबारा खाने का मन करता है। इस चक्र को तोड़ने के लिए दिमाग की सोच बदलना जरूरी है।
हेल्दी खाने को लेकर सोच बदलें
दिमाग वही चीज पसंद करता है जिसे वह फायदा या खुशी से जोड़ता है। अगर लंबे समय तक हेल्दी खाने को फीका या बोरिंग समझा जाए तो उसे अपनाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए सबसे पहले अपनी सोच बदलनी होगी। खुद को यह समझाना जरूरी है कि पौष्टिक खाना सिर्फ वजन कम करने के लिए नहीं बल्कि शरीर को एनर्जी देने, मांसपेशियों को मजबूत रखने और लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है। जब दिमाग बार-बार यह समझेगा कि हेल्दी फूड शरीर की जरूरत पूरी कर रहा है, तो धीरे-धीरे अनहेल्दी चीजों की तरफ आकर्षण कम होने लगेगा।
खाने को बनाएं मजेदार और आकर्षक
हेल्दी खाना अगर हमेशा एक जैसा और बोरिंग होगा तो दिमाग आसानी से जंक फूड की तरफ जाएगा। इसलिए खाने में थोड़ी क्रिएटिविटी लाना जरूरी है। सलाद को अलग-अलग सब्जियों, फलों और ड्रेसिंग के साथ तैयार किया जा सकता है। हेल्दी स्नैक्स को भी स्वादिष्ट तरीके से बनाया जा सकता है। खाने को सुंदर तरीके से सजाने से भी दिमाग पर सकारात्मक असर पड़ता है। जब कोई खाना देखने में अच्छा लगता है तो दिमाग उसे ज्यादा पसंद करता है। इस छोटी सी ट्रिक से हेल्दी फूड को लेकर उत्साह बढ़ाया जा सकता है।
खाने में रखें ज्यादा विकल्प
कई लोग हेल्दी डाइट शुरू करते ही रोज एक ही तरह का खाना खाने लगते हैं। कुछ दिन बाद उन्हें बोरियत महसूस होने लगती है और वे फिर से जंक फूड की तरफ लौट जाते हैं। इससे बचने के लिए खाने में वैरायटी रखना जरूरी है। नाश्ते से लेकर डिनर तक अलग-अलग हेल्दी विकल्प शामिल करें। कभी पोहा, कभी ओट्स, कभी अंडे, कभी स्प्राउट्स तो कभी अलग-अलग तरह के सलाद और प्रोटीन वाले फूड शामिल किए जा सकते हैं। जितने ज्यादा विकल्प होंगे, उतना ही दिमाग को लगेगा कि हेल्दी खाना भी स्वादिष्ट और दिलचस्प हो सकता है।
जंक फूड खाने से पहले खुद से पूछें सवाल
माइंडफुल ईटिंग यानी सोच-समझकर खाना जंक फूड की आदत कम करने में काफी मदद कर सकता है।
जब भी कोई अनहेल्दी चीज खाने का मन करे तो कुछ सेकंड रुककर खुद से सवाल करें-
क्या मुझे सच में भूख लगी है?
क्या यह खाना मेरे शरीर के लिए फायदेमंद है?
क्या इसे खाने के बाद मुझे अच्छा महसूस होगा?
बार-बार खुद से ये सवाल करने से दिमाग धीरे-धीरे खाने के फैसलों को लेकर जागरूक होने लगता है। इससे अचानक होने वाली क्रेविंग पर कंट्रोल करना आसान हो जाता है।
छोटी प्लेट का इस्तेमाल करें
पोर्शन कंट्रोल यानी कितनी मात्रा में खाना है, यह वजन कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। कई बार खाना हेल्दी होने के बावजूद ज्यादा मात्रा में खाने से कैलोरी बढ़ जाती है। छोटी प्लेट में खाना लेने से मात्रा अपने आप नियंत्रित हो जाती है। दिमाग को लगता है कि प्लेट पूरी भरी हुई है, जिससे संतुष्टि का एहसास बढ़ता है। हालांकि यह तरीका तभी काम करता है जब व्यक्ति अपने लक्ष्य को लेकर जागरूक हो और खाने की मात्रा पर ध्यान दे।
धीरे-धीरे बदलें अपनी आदत
जंक फूड छोड़ना एक दिन में संभव नहीं होता। अचानक पूरी तरह से बदलाव करने पर कई लोगों को ज्यादा क्रेविंग होने लगती है और वे फिर पुराने पैटर्न पर लौट जाते हैं।
इसलिए छोटे कदम उठाना बेहतर होता है। अगर रोज चिप्स खाते हैं तो पहले इसकी मात्रा कम करें। फिर धीरे-धीरे इसकी जगह नट्स, फल या हेल्दी स्नैक्स शामिल करें।
दिमाग को नई आदत अपनाने में समय लगता है। लगातार कोशिश करने से धीरे-धीरे स्वाद और पसंद दोनों बदलने लगते हैं।
अच्छी नींद और तनाव पर भी दें ध्यान
जंक फूड की क्रेविंग सिर्फ खाने की आदत से नहीं बल्कि तनाव और नींद की कमी से भी जुड़ी हो सकती है। जब व्यक्ति कम सोता है या ज्यादा तनाव में रहता है तो दिमाग जल्दी मिलने वाली खुशी के लिए ज्यादा मीठे और फैटी फूड की मांग कर सकता है। इसलिए पर्याप्त नींद लेना, पानी पीना और तनाव कम करने वाली एक्टिविटी करना भी जरूरी है।
जंक फूड की आदत सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी नहीं बल्कि दिमाग के काम करने के तरीके से जुड़ी होती है। अगर दिमाग को सही तरीके से ट्रेन किया जाए तो खाने की पसंद बदली जा सकती है।
हेल्दी खाने को स्वादिष्ट बनाना, ज्यादा विकल्प रखना, सोच-समझकर खाना और छोटी प्लेट जैसे आसान तरीके धीरे-धीरे जंक फूड की क्रेविंग कम कर सकते हैं। सही आदतें अपनाकर न सिर्फ वजन कंट्रोल किया जा सकता है बल्कि शरीर और दिमाग दोनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।




