बच्चों के टिफिन से लेकर घर की रसोई तक: ‘हेल्दी’ पैकेट के पीछे छिपी चीनी, नमक और प्रोसेस्ड फूड की हकीकत

आज के दौर में सुपरमार्केट की अलमारियां ऐसे खाद्य उत्पादों से भरी हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि वे हमारी सेहत का ख्याल रखने के लिए ही बनाए गए हैं। किसी पैकेट पर ‘मल्टीग्रेन’ लिखा है, किसी पर ‘नेचुरल’, तो कहीं ‘हाई फाइबर’, ‘बेक्ड’ या ‘जीरो मैदा’ जैसे दावे नजर आते हैं। आकर्षक पैकेजिंग और स्मार्ट विज्ञापन खासतौर पर बच्चों और अभिभावकों को यह भरोसा दिलाते हैं कि पैकेट में बंद चीज पारंपरिक भोजन का बेहतर और सुविधाजनक विकल्प है। लेकिन असली कहानी अक्सर पैकेट के सामने नहीं, बल्कि उसके पीछे लिखी सामग्री सूची और पोषण संबंधी जानकारी में छिपी…

डायबिटीज कंट्रोल से वजन घटाने तक, लो-GI डाइट हो सकती है फायदेमंद; जानें क्या खाएं और कैसे काम करती है

बढ़ता वजन, बिगड़ता ब्लड शुगर और मेटाबॉलिक से जुड़ी समस्याएं आज तेजी से आम हो रही हैं। ऐसे में खानपान में छोटे लेकिन सही बदलाव लंबे समय में काफी असर डाल सकते हैं। खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज, प्रीडायबिटीज या वजन बढ़ने की समस्या से परेशान हैं, भोजन में कार्बोहाइड्रेट की गुणवत्ता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी संदर्भ में लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी लो-GI डाइट की चर्चा बढ़ी है। इस डाइट का मकसद कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह बंद करना नहीं है, बल्कि ऐसे कार्बोहाइड्रेट चुनना है जो शरीर में अपेक्षाकृत धीरे पचें और ब्लड ग्लूकोज को…

लंबी उम्र के लिए क्या खाएं? वेज और नॉनवेज में किसकी डाइट ज्यादा फायदेमंद है?

खाने को लेकर लोगों की पसंद अलग-अलग हो सकती है। किसी की थाली में दाल, सब्जियां और फल ज्यादा होते हैं, तो कोई अंडे, मछली या मीट को अपनी डाइट का जरूरी हिस्सा मानता है। यही वजह है कि वेजिटेरियन और नॉनवेजिटेरियन डाइट को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इनमें से कौन सी डाइट इंसान को ज्यादा स्वस्थ रखती है और लंबी उम्र तक जीने में मदद कर सकती है? अक्सर माना जाता है कि शाकाहारी भोजन ज्यादा हेल्दी होता है, क्योंकि इसमें फल, सब्जियां, अनाज, दालें, नट्स और दूसरे…

बार-बार होती है एसिडिटी? इन खाने-पीने की चीजों से रहें सतर्क, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी

आजकल बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण एसिडिटी की समस्या बेहद आम हो गई है। कई लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन या पेट में भारीपन जैसी शिकायतें लगातार बनी रहती हैं, तो यह शरीर का संकेत हो सकता है कि आपकी डाइट और दिनचर्या में बदलाव की जरूरत है। अक्सर लोग दवा लेकर कुछ समय के लिए राहत तो पा लेते हैं, लेकिन यदि एसिडिटी की असली वजह पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या बार-बार लौट सकती है। एसिडिटी केवल पेट से जुड़ी छोटी…

बारिश में स्ट्रीट फूड का स्वाद पड़ सकता है भारी, लिवर को संक्रमण से बचाने के लिए बरतें ये जरूरी सावधानियां

बारिश का मौसम आते ही गर्मागर्म पकौड़े, चाट, गोलगप्पे, समोसे, मोमोज, टिक्की और दूसरी सड़क किनारे मिलने वाली चीजों का स्वाद लोगों को अपनी ओर खींचने लगता है। हल्की फुहारों के बीच स्ट्रीट फूड का आनंद लेना कई लोगों की पसंद होती है, लेकिन यही आदत कई बार सेहत के लिए गंभीर परेशानी भी बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। यदि ऐसे दूषित भोजन का सेवन किया जाए तो यह केवल पेट की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लिवर…

मॉनसून में कैसी हो आपकी डाइट? आयुर्वेद बताता है कौन-सी थाली रखेगी सेहत दुरुस्त

बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली और ठंडक तो लेकर आता है, लेकिन यही मौसम कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है। वातावरण में बढ़ी नमी, दूषित पानी, बैक्टीरिया और वायरस की सक्रियता तथा पाचन शक्ति में कमी के कारण इस समय वायरल संक्रमण, पेट संबंधी बीमारियां और फूड पॉइजनिंग जैसी परेशानियां तेजी से बढ़ती हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद मौसम बदलने के साथ खानपान में बदलाव करने पर विशेष जोर देता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर की जठराग्नि यानी पाचन क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके साथ ही वात दोष का…

बरसात में खानपान की ये छोटी लापरवाहियां पड़ सकती हैं भारी, ऐसे रखें फूड प्वाइजनिंग और पेट की बीमारियों से बचाव

बारिश का मौसम जहां भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को भी साथ लेकर आता है। वातावरण में बढ़ी हुई नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया-वायरस के तेजी से पनपने की वजह से इस मौसम में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। खासतौर पर पेट से जुड़ी बीमारियां, फूड प्वाइजनिंग, डायरिया, टायफाइड और उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं मानसून के दौरान सबसे अधिक देखने को मिलती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों की सबसे बड़ी वजह केवल मौसम नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की खानपान संबंधी आदतें भी होती हैं। कई बार…

जंक फूड की आदत से छुटकारा पाने के लिए दिमाग को करें री-प्रोग्राम, ये आसान तरीके बदल देंगे खाने की आदत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड हमारी डेली लाइफ का हिस्सा बन चुका है। कई बार ऐसा होता है कि पेट भरा होता है, शरीर को खाने की जरूरत भी नहीं होती, फिर भी दिमाग बार-बार कुछ स्वादिष्ट और अनहेल्दी खाने के लिए मजबूर करता है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कुकीज और पैकेट वाले स्नैक्स जैसी चीजों की क्रेविंग धीरे-धीरे आदत में बदल जाती है। यही आदत आगे चलकर वजन बढ़ने, मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर और दूसरी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है। बहुत से लोग वजन कम करने के लिए जिम जाना शुरू करते हैं…

रोज चिप्स और पैकेट फूड खाने की आदत से दिमाग पर पड़ सकता है असर, रिसर्च में सामने आई ये चिंता

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास खाना बनाने और सही डाइट लेने का समय कम होता जा रहा है। काम के बीच भूख लगने पर या खाली समय में लोग अक्सर चिप्स, बिस्किट, नमकीन, इंस्टेंट फूड और दूसरी पैकेट वाली चीजों का सहारा लेते हैं। ऑफिस में काम करते हुए, टीवी देखते समय या सफर के दौरान अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स खाना एक आम आदत बन चुकी है। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस आदत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन में दावा किया गया है कि ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन दिमाग…

नौतपा में खानपान की लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन चीजों से बनाएं दूरी

नौतपा की भीषण गर्मी में किन चीजों से करें परहेज? जानिए कौन से खाद्य पदार्थ बढ़ा सकते हैं डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा नौतपा के दौरान उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ जाता है। इस अवधि में तेज धूप, गर्म हवाएं (लू) और अत्यधिक गर्म वातावरण का असर सीधे शरीर पर पड़ता है। ऐसे मौसम में केवल बाहर निकलते समय सावधानी बरतना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि खानपान में भी विशेष सतर्कता आवश्यक मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में कुछ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ शरीर…

सिर्फ पेट भर रही भारतीय डाइट! रिसर्च में खुली प्रोटीन की भारी कमी की पोल

भारतीय भोजन अपनी विविधता, मसालों और पारंपरिक स्वाद के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। अलग-अलग राज्यों की अपनी खानपान संस्कृति है, जहां चावल, गेहूं, दालें, सब्जियां, दूध से बने उत्पाद और कई पारंपरिक व्यंजन रोजमर्रा की थाली का हिस्सा होते हैं। हालांकि बदलती जीवनशैली, शहरीकरण और खानपान की आदतों में आए बदलाव के बीच अब एक नया अध्ययन भारतीयों की डाइट को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में पाया गया है कि देश के अधिकांश लोग अपनी दैनिक ऊर्जा का बड़ा हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त कर रहे हैं, जबकि शरीर…

25 मई से नौतपा की शुरुआत, भीषण गर्मी में खानपान का रखें खास ध्यान, जानिए क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी

नौतपा 2026: भीषण गर्मी के नौ दिनों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं सही डाइट मई के अंतिम दिनों के साथ ही उत्तर भारत में गर्मी अपने चरम पर पहुंचने लगती है। इसी समय नौतपा की शुरुआत होती है, जिसे पारंपरिक रूप से साल के सबसे गर्म दिनों में शामिल किया जाता है। इस अवधि में सूर्य की तेज किरणों और गर्म हवाओं के कारण तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस बार नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने वाला है।…

सिर्फ प्रोटीन पर टिकी डाइट पड़ सकती है भारी, फाइबर की कमी बढ़ा सकती है बीमारी का खतरा

आज के समय में जिम, फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवाओं में मसल्स बनाने, शरीर को टोन करने और फिट दिखने की इच्छा के कारण हाई-प्रोटीन डाइट का चलन काफी बढ़ा है। जिम जाने वाले कई लोग अपनी डाइट में अंडे, दूध, पनीर, दाल, सोया, चिकन, मछली और प्रोटीन सप्लीमेंट जैसी चीजों को शामिल करते हैं। प्रोटीन शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के साथ-साथ शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाता है। हालांकि, फिटनेस के प्रति बढ़ते उत्साह के बीच…

प्रोटीन की कमी का अलर्ट: शरीर के संकेत पहचानें और सही फूड्स से करें तेजी से सुधार

स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आमतौर पर लोग भोजन में कार्बोहाइड्रेट, फैट और कैलोरी पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन प्रोटीन जैसे आवश्यक पोषक तत्व को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं, मांसपेशियों, त्वचा, बालों, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि पोषण विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में प्रोटीन का सेवन करने की सलाह देते हैं। यदि लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं मिलता, तो इसका असर धीरे-धीरे कई अंगों और शारीरिक प्रक्रियाओं पर दिखाई देने लगता है। शुरुआत में…