चंडीगढ़ में टीबी के खिलाफ बड़ा अभियान, हर मरीज की होगी स्क्रीनिंग; बस्तियों से स्कूलों तक चलेगा विशेष सर्वे

चंडीगढ़ में टीबी के खिलाफ बड़ा अभियान, हर मरीज की होगी स्क्रीनिंग; बस्तियों से स्कूलों तक चलेगा विशेष सर्वे

चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर को क्षय रोग (टीबी) से मुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक रणनीति तैयार की है। इस योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले प्रत्येक मरीज की टीबी के लिए स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाएगी, जबकि अधिक जोखिम वाले इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान करेंगी। प्रशासन का मानना है कि शुरुआती चरण में बीमारी का पता लगने से संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने और टीबी से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाने में मदद मिलेगी।

इस संबंध में सोमवार को मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत अब तक हुई प्रगति का आकलन किया गया और आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और अभियान को मिशन मोड में लागू करने पर सहमति जताई गई।

प्रशासन ने निर्णय लिया है कि शहर के सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और आईपीडी में आने वाले मरीजों की नियमित रूप से टीबी की जांच की जाएगी। इसके साथ ही ऐसे लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिनमें बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं या जो लंबे समय से खांसी, वजन कम होने अथवा अन्य संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल स्तर पर व्यापक स्क्रीनिंग से बड़ी संख्या में ऐसे मरीजों की समय रहते पहचान हो सकेगी, जो अब तक उपचार से वंचित रहे हैं।

योजना के तहत झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों, मजदूर बस्तियों तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें इन इलाकों में घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सैंपल लेकर आगे की जांच के लिए भेजेंगी। प्रशासन का उद्देश्य उन लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जो किसी कारणवश अस्पताल नहीं पहुंच पाते या बीमारी के बावजूद जांच नहीं कराते।

समीक्षा बैठक के दौरान कार्यवाहक निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ. सद्भावना पंडित ने चंडीगढ़ में टीबी उन्मूलन अभियान की वर्तमान स्थिति और राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शहर में पहले से ही सघन स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां टीबी के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों की भी जांच की जा रही है। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को न केवल जांच की सुविधा मिल रही है, बल्कि बीमारी के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

नई कार्ययोजना में किशोरों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत 14 वर्ष से अधिक आयु के स्कूली विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कराई जाएगी ताकि शुरुआती अवस्था में ही संभावित मामलों की पहचान की जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में नियमित जांच से संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी संभव होगी।

जनजागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए ‘माय भारत’ कार्यक्रम से जुड़े स्वयंसेवकों को भी इस मिशन का हिस्सा बनाया जाएगा। ये स्वयंसेवक समुदाय स्तर पर लोगों को टीबी के लक्षण, समय पर जांच और उपचार के महत्व के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही लोगों को यह भी समझाया जाएगा कि टीबी पूरी तरह से उपचार योग्य बीमारी है और समय पर इलाज शुरू होने से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने बैठक में स्पष्ट किया कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए शिक्षा विभाग, नगर निगम, समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, खेल विभाग, परिवहन विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

इसी उद्देश्य से नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में स्क्रीनिंग अभियान की निगरानी करेंगे, स्थानीय पार्षदों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि अभियान का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचे। नोडल अधिकारी नियमित रूप से प्रगति की रिपोर्ट भी प्रशासन को सौंपेंगे।

प्रशासन ने निजी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि निजी स्वास्थ्य संस्थान भी संदिग्ध मरीजों की समय पर जानकारी साझा करें और राष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़ें, तो टीबी के मामलों की पहचान और उपचार दोनों अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।

योजना के तहत आधुनिक आणविक (मॉलिक्यूलर) जांच तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कम समय में बीमारी की पुष्टि संभव हो सकेगी। इसके अलावा टीबी मरीजों के संपर्क में आए लोगों की सक्रिय पहचान कर उनकी भी जांच की जाएगी, ताकि संक्रमण का दायरा सीमित किया जा सके। मरीजों के लिए पोषण सहायता योजनाओं को मजबूत करने और उपचार के दौरान नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अभियान की प्रगति पर नजर रखने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रत्येक माह स्क्रीनिंग, जांच, नए मामलों की पहचान, उपचार की स्थिति और अन्य प्रमुख संकेतकों की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि डेटा आधारित निगरानी से कमियों की तुरंत पहचान कर आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।

चंडीगढ़ प्रशासन का विश्वास है कि व्यापक स्क्रीनिंग, समय पर जांच, आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से टीबी के खिलाफ यह अभियान और अधिक प्रभावी बनेगा। मिशन मोड में लागू की जा रही इस रणनीति का उद्देश्य न केवल नए मरीजों की शीघ्र पहचान करना है, बल्कि उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराकर शहर को टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देना भी है।