हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने संकेत दिए हैं कि राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार अब ज्यादा दूर नहीं है। साथ ही प्रशासनिक खर्चों में कटौती, अधिकारियों के कैडर की समीक्षा, आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने, पैरा वर्करों के लिए नई नीति और रोजगार सृजन जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है।
शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार अगले एक से दो महीने के भीतर किया जाएगा। इसके साथ ही विधानसभा उपाध्यक्ष का लंबे समय से खाली पड़ा पद भी भरा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए कांग्रेस नेतृत्व लगातार मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन कर रहा है और भविष्य में होने वाले किसी भी फेरबदल का निर्णय पार्टी आलाकमान के निर्देशों के अनुरूप लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर विचार कर रही है। उन्होंने माना कि प्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या वास्तविक आवश्यकता से अधिक है, जिसके कारण सरकारी खजाने पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के स्वीकृत पदों में प्रारंभिक स्तर पर छह पद कम किए जा चुके हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि इस संख्या में और कमी की आवश्यकता है। उनके अनुसार आईएएस कैडर में 30 से 40 पदों तक की कटौती की जा सकती है। इसी प्रकार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में भी 10 से 20 पद कम करने तथा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के कैडर में 30 से 40 पदों की समीक्षा करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस बचत का उपयोग विकास परियोजनाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकेगा। उनका मानना है कि सीमित संसाधनों वाले हिमाचल प्रदेश के लिए वित्तीय अनुशासन और खर्चों का संतुलन बेहद जरूरी है।
सरकार लंबे समय से विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी गंभीर दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं और सरकार उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मौजूद बाधाओं का अध्ययन किया जा रहा है ताकि ऐसा समाधान निकाला जा सके जो नियमों के अनुरूप होने के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों की भी रक्षा करे।
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि पैरा वर्करों के लिए जल्द एक व्यापक नीति लाई जाएगी। इस नीति का उद्देश्य उन्हें सम्मानजनक मानदेय उपलब्ध कराना और भविष्य में नियमित सेवा मिलने पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने वर्षों तक कम संसाधनों में महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं।
पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यदि भविष्य में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है तो ओपीएस को जारी रखना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा का रुख नई पेंशन प्रणाली के पक्ष में रहा है और इसे लेकर केंद्र सरकार का दृष्टिकोण पहले से स्पष्ट है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए ओपीएस को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के संबंध में भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इनके मानदेय में कम से कम दो हजार रुपये प्रति माह की वृद्धि का अनुरोध किया है। उनका कहना था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों के बीच महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करती हैं, इसलिए उनके आर्थिक हितों का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय मामलों पर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते (डीए) और बकाया एरियर का भुगतान एक साथ करना वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों में संभव नहीं है, लेकिन सरकार चरणबद्ध तरीके से सभी देनदारियों का भुगतान करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
रोजगार के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए बड़े स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों को मिलाकर लगभग पांच लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।
शिक्षा क्षेत्र को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सरकार की प्राथमिकता है और रिक्त पदों को जल्द भरने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के इन बयानों से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आने वाले महीनों में हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक ओर मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक ढांचे में सुधार, खर्चों में कटौती, कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर सरकार अपनी कार्ययोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और आम लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना है।




