अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि मामला परमाणु युद्ध तक पहुंच सकता था, लेकिन उन्होंने अपनी आर्थिक नीति और टैरिफ की चेतावनी के जरिए इस संभावित संघर्ष को टाल दिया। ट्रंप का दावा है कि उनके हस्तक्षेप की वजह से करोड़ों लोगों की जान बच सकी।
हाल ही में अमेरिकी बिजनेस चैनल CNBC को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने अपनी ट्रेड पॉलिसी का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक दबाव केवल व्यापारिक सौदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने में भी किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कई बड़े संघर्षों को बढ़ने से रोका और इसमें भारत-पाकिस्तान का मामला भी शामिल था।
ट्रंप के मुताबिक, जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर था, तब उन्होंने दोनों देशों को साफ संदेश दिया था कि यदि वे संघर्ष जारी रखते हैं तो अमेरिका उनके खिलाफ बेहद कठोर व्यापारिक कदम उठाएगा। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों पर 200 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की चेतावनी दी गई थी, जिससे हालात सामान्य करने में मदद मिली।
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद, दोनों के सामने एक जैसी शर्त रखी थी। उनका कहना था कि अगर दोनों देश युद्ध का रास्ता छोड़कर बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो व्यापारिक रिश्ते सामान्य रहेंगे, लेकिन यदि लड़ाई जारी रहती है तो अमेरिका कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और भारी टैरिफ का सहारा लेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि उस समय स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी थी। उनके अनुसार दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं और कई सैन्य घटनाएं हो चुकी थीं। ट्रंप ने कहा कि संघर्ष के दौरान 11 विमान गिराए गए थे और हालात तेजी से बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने के कारण पूरी दुनिया इस तनाव को लेकर चिंतित थी।
ट्रंप ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो यह टकराव परमाणु युद्ध का रूप ले सकता था। उन्होंने दावा किया कि उनके फैसले की वजह से लगभग 3 करोड़ लोगों की जान बच गई। हालांकि उन्होंने इस आंकड़े का कोई आधिकारिक आधार या विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
अपने बयान में ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना की थी और कहा था कि अमेरिकी हस्तक्षेप की वजह से दोनों देशों के बीच बड़ा युद्ध टल गया। ट्रंप के मुताबिक, उन्हें इस मामले में पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।
यह पहला अवसर नहीं है जब ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का श्रेय खुद को दिया हो। इससे पहले भी वह कई सार्वजनिक मंचों और इंटरव्यू में इसी तरह के दावे कर चुके हैं। हर बार उन्होंने कहा कि उनकी व्यापारिक रणनीति और आर्थिक दबाव ने दोनों देशों को युद्ध से पीछे हटने के लिए मजबूर किया।
हालांकि भारत सरकार लगातार इन दावों को खारिज करती रही है। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से नहीं हुआ था। भारत ने कई बार दोहराया है कि युद्धविराम का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत का परिणाम था।
भारत के अनुसार, संघर्ष विराम को लेकर दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच बातचीत हुई थी। भारतीय पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान के डीजीएमओ की ओर से संपर्क किया गया था, जिसके बाद दोनों देशों ने द्विपक्षीय स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। भारत का यह भी कहना रहा है कि किसी बाहरी देश की मध्यस्थता की जरूरत नहीं पड़ी।
भारत लंबे समय से यह नीति अपनाता रहा है कि पाकिस्तान से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही किया जाएगा। इसी कारण भारत ने कई बार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया है कि अमेरिका या किसी अन्य देश की भूमिका को लेकर किए जा रहे दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते।
ट्रंप ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उनकी व्यापार नीति केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं रही। उनका दावा था कि उन्होंने आर्थिक ताकत का इस्तेमाल वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए किया। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने करीब आठ संभावित युद्धों या बड़े संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई।
हालांकि ट्रंप ने इन आठ संघर्षों की पूरी सूची या उनके संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उन्होंने केवल इतना कहा कि अमेरिका की आर्थिक शक्ति और टैरिफ नीति का इस्तेमाल कई देशों को युद्ध से दूर रखने के लिए किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच समय-समय पर तनाव जरूर बढ़ता रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संवाद की व्यवस्था भी बनी रहती है। ऐसे में किसी भी बाहरी दावे को दोनों देशों के आधिकारिक बयानों के आधार पर ही देखा जाता है।
ट्रंप के ताजा बयान के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव और अमेरिकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अब तक भारत सरकार अपने पुराने रुख पर कायम है और उसने स्पष्ट किया है कि संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय सैन्य बातचीत का परिणाम था, न कि किसी विदेशी नेता की मध्यस्थता का।
दूसरी ओर ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि उनकी आर्थिक नीतियों ने कई वैश्विक संकटों को टालने में अहम भूमिका निभाई। भारत-पाकिस्तान को लेकर उनका ताजा बयान भी इसी दावे की कड़ी माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में दोनों देशों की आधिकारिक स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है और भारत ने एक बार फिर अप्रत्यक्ष रूप से दोहराया है कि किसी बाहरी हस्तक्षेप की भूमिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप के बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। जहां एक ओर ट्रंप अपने फैसलों को वैश्विक शांति स्थापित करने वाला बता रहे हैं, वहीं भारत अपने आधिकारिक रुख पर कायम है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम का फैसला केवल सैन्य स्तर पर हुई द्विपक्षीय बातचीत से संभव हुआ था।




