ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई का कार्यक्रम पूरे देश में ऐतिहासिक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। राजधानी तेहरान से लेकर मशहद तक सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सरकारी तैयारियों का ऐसा व्यापक इंतजाम किया गया है, जैसा ईरान ने पहले कभी नहीं देखा। सात दिनों तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। लाखों लोगों की मौजूदगी को देखते हुए सरकार ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं।
131 दिन बाद शुरू हुई अंतिम विदाई
अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। इस घटना के 131 दिन बाद अब उनकी अंतिम विदाई की रस्में शुरू हुई हैं। 9 जुलाई को उन्हें उनके जन्मस्थान मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में खामेनेई के साथ उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और 14 महीने की पोती के ताबूत भी रखे गए हैं। पोती के छोटे ताबूत के पास उसकी तस्वीर रखी गई, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
राष्ट्रपति पजशकियान नहीं रोक पाए आंसू
श्रद्धांजलि देने पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समारोह के दौरान भावुक हो गए। खामेनेई के ताबूत के सामने खड़े होकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उनके साथ संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सेना के वरिष्ठ अधिकारी और कई सरकारी प्रतिनिधि भी मौजूद थे। कई नेताओं को भी इस दौरान भावुक होते देखा गया।
रूस से मेदवेदेव पहुंचे, दी श्रद्धांजलि
रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंचे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि रूस की जनता और नेतृत्व इस अपूरणीय क्षति पर ईरान के साथ खड़ा है। उन्होंने खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित करने का वीडियो भी साझा किया।
सऊदी अरब की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा सऊदी अरब के डिप्टी विदेश मंत्री की मौजूदगी को लेकर रही। शुरुआती आधिकारिक सूची में सऊदी प्रतिनिधिमंडल का नाम नहीं था, लेकिन बाद में उनका अचानक तेहरान पहुंचना कूटनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इसके अलावा ओमान और कतर के प्रतिनिधिमंडल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
100 से अधिक देशों की भागीदारी
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अंतिम संस्कार में दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान, जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कावेलाशविली, इराक के राष्ट्रपति नजर अमीदी, तुर्किये के उपराष्ट्रपति जेवदेत यिलमाज, रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव और चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के उपाध्यक्ष हे वेई भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये ने अपने शीर्ष नेताओं की जगह वरिष्ठ प्रतिनिधियों को भेजा है।
भारत की ओर से कौन पहुंचा?
भारत सरकार की तरफ से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा भी श्रद्धांजलि देने तेहरान पहुंचे।
धार्मिक प्रतिनिधिमंडल में जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरिया शियान के अध्यक्ष आगा सैयद हसन मोसवी अल सफवी समेत विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अफगानिस्तान से भी पहुंचे प्रतिनिधि
तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने भी खामेनेई के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उनसे पहले तालिबान विरोधी नेता अहमद मसूद भी तेहरान पहुंच चुके थे। माना जा रहा है कि यह ईरान और अफगानिस्तान के जटिल संबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण संकेत है।
अंतिम यात्रा पांच अहम शहरों से गुजरेगी
खामेनेई की अंतिम यात्रा धार्मिक और राजनीतिक महत्व वाले पांच शहरों से होकर निकलेगी।
सबसे पहले तेहरान में अंतिम दर्शन होंगे, जहां ईरान की सत्ता के प्रमुख संस्थान मौजूद हैं। इसके बाद यात्रा कोम पहुंचेगी, जिसे शिया धर्म की शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
इसके बाद कार्यक्रम इराक के करबला और नजफ में आयोजित होगा, जहां शिया समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मौजूद हैं। अंत में मशहद में अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां खामेनेई का जन्म हुआ था।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
लाखों लोगों की संभावित भीड़ को देखते हुए पूरे तेहरान को हाई सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया है। राजधानी की प्रमुख सड़कों पर सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई है। बसीज फोर्स के सदस्य लगातार मोटरसाइकिलों पर गश्त कर रहे हैं।
तेहरान, कोम और मशहद के ऊपर हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ड्रोन और निजी विमानों की उड़ान पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
ईरान ने राजधानी की सुरक्षा के लिए S-300 और बावर-373 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। विदेशी नेताओं की सुरक्षा के लिए विशेष अंडरग्राउंड कमांड सेंटर भी बनाए गए हैं।
भीड़ प्रबंधन के लिए रिकॉर्ड तैयारियां
सरकार ने अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की सुविधा के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए हैं। पांच करोड़ रोटियां तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए तेहरान में 16 मोबाइल बेकरी स्थापित की गई हैं।
भीषण गर्मी को देखते हुए छह हजार से अधिक वाटर स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। चिकित्सा सहायता के लिए 2,500 एम्बुलेंस, 21 हेलीकॉप्टर, 100 ड्रोन और हजारों राहतकर्मी तैनात किए गए हैं। 24 से ज्यादा अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और पांच लाख लीटर आईवी फ्लूइड का भी इंतजाम किया गया है।
होटलों में छूट और मुफ्त परिवहन
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार ने होटल किराए में 50 प्रतिशत तक की छूट देने का फैसला किया है। स्कूलों, मस्जिदों, खेल परिसरों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी ठहरने की व्यवस्था की गई है।
तेहरान मेट्रो और सरकारी बस सेवाओं को मुफ्त कर दिया गया है। मेट्रो ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाकर हर दो मिनट कर दी गई ताकि स्टेशनों पर भीड़ न बढ़े। रेलवे ने देश के विभिन्न शहरों से विशेष ट्रेनें भी चलाई हैं।
पुराने हादसों से लिया सबक
1989 में अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी और 2020 में कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार के दौरान भगदड़ जैसी घटनाएं हुई थीं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की विस्तृत योजना तैयार की गई है।
निजी वाहनों को अंतिम यात्रा वाले मार्गों पर प्रतिबंधित किया गया है। लोगों के लिए 700 से अधिक पार्किंग स्थल बनाए गए हैं और ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी विशेष कंट्रोल रूम से की जा रही है।
IRGC की सख्त चेतावनी
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अंतिम संस्कार से पहले चेतावनी दी है कि यदि समारोह के दौरान या उसके आसपास देश को निशाना बनाने की कोई कोशिश हुई तो उसका पहले से कहीं ज्यादा कड़ा जवाब दिया जाएगा।
यह चेतावनी ऐसे समय आई जब इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया था कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई भी निशाने पर हैं। इसी वजह से ईरान ने पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है।
सरकारी एजेंसियों का मानना है कि लाखों लोगों और विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण किसी भी तरह की सुरक्षा चूक गंभीर परिणाम ला सकती है। इसी वजह से पूरे कार्यक्रम के दौरान सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियां और आपदा राहत दल लगातार निगरानी में जुटे हुए हैं।




