भारत-A ने श्रीलंका-A के खिलाफ खेले गए दो मैचों की अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज का समापन शानदार अंदाज में किया। गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम ने मेजबान श्रीलंका-A को 10 विकेट से हराकर सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली। पहला मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद दूसरे टेस्ट में भारत-A ने हर विभाग में दमदार प्रदर्शन किया और विपक्षी टीम को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।
इस जीत के सबसे बड़े नायक तेज गेंदबाज गुरनूर बरार रहे, जिन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर कुल 10 विकेट हासिल किए। वहीं बल्लेबाजी में पहली पारी में 168 रन की शानदार पारी खेलने वाले साई सुदर्शन ने दूसरी पारी में भी नाबाद रहकर टीम को जीत तक पहुंचाया। गेंद और बल्ले से मिले इस संतुलित प्रदर्शन ने भारत-A को यादगार जीत दिलाई।
मैच के चौथे और अंतिम दिन भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी 543/9 के स्कोर पर घोषित की। टीम ने दिन की शुरुआत 541/8 से की थी, लेकिन केवल कुछ गेंदों के खेल के बाद एक और विकेट गिरने पर कप्तान ने पारी समाप्त करने का फैसला किया। सारांश जैन 70 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि चोट के कारण ऋतुराज गायकवाड़ बल्लेबाजी के लिए मैदान पर नहीं उतर सके। पहली पारी के आधार पर भारत-A ने 177 रन की मजबूत बढ़त हासिल कर ली थी।
श्रीलंका-A के सामने चुनौती आसान नहीं थी। दूसरी पारी में टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। नई गेंद के साथ गुरनूर बरार ने शुरुआत से ही दबाव बना दिया और शुरुआती ओवरों में लगातार दो अहम विकेट लेकर मेजबान टीम को मुश्किल में डाल दिया। कुछ ही देर बाद आकिब नबी ने भी एक विकेट लेकर श्रीलंका-A की स्थिति और खराब कर दी। शुरुआती स्कोरबोर्ड पर केवल 9 रन दर्ज थे और तीन बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे।
शुरुआती झटकों के बाद अशेन बंडारा ने संघर्ष की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। तेज रन गति से खेलते हुए उन्होंने महज 47 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इस दौरान उन्होंने कई आकर्षक चौके लगाए और टीम को संभालने का प्रयास किया। कप्तान सहान अराच्चिगे ने भी उनका अच्छा साथ दिया, जिससे श्रीलंका-A ने कुछ समय के लिए मुकाबले में वापसी की उम्मीद जगाई।
हालांकि भारतीय गेंदबाज लगातार अनुशासित लाइन और लेंथ से गेंदबाजी करते रहे। यश ठाकुर ने कप्तान अराच्चिगे को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ दिया। लंच तक श्रीलंका-A ने चार विकेट पर 115 रन बना लिए थे, लेकिन टीम अभी भी भारत की बढ़त से काफी पीछे थी और दबाव पूरी तरह बना हुआ था।
दूसरे सत्र में भारत-A ने मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। गुरनूर बरार ने एक बार फिर आक्रमण संभालते हुए लगातार विकेट झटके। उन्होंने पहले अंजला बंडारा को पवेलियन भेजा और उसके बाद शानदार बल्लेबाजी कर रहे अशेन बंडारा की 87 रन की पारी का भी अंत कर दिया। यह विकेट मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुआ क्योंकि इसके बाद श्रीलंका-A की बल्लेबाजी तेजी से बिखरने लगी।
मध्यक्रम में केशारा नुवांथा और दिलुम सुदीरा ने कुछ देर तक संघर्ष जरूर किया। दोनों बल्लेबाजों ने छोटी लेकिन उपयोगी पारियां खेलकर टीम को संभालने का प्रयास किया, मगर भारतीय गेंदबाजों ने उन्हें ज्यादा देर टिकने नहीं दिया। सारांश जैन ने भी अहम योगदान देते हुए दो विकेट हासिल किए और विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा।
जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, भारत-A की जीत तय होती चली गई। अंतिम चरण में गुरनूर बरार ने अपनी घातक गेंदबाजी जारी रखते हुए निचले क्रम के बल्लेबाजों को भी ज्यादा देर क्रीज पर टिकने का मौका नहीं दिया। उन्होंने दूसरी पारी में कुल छह विकेट लिए, जबकि पहली पारी में चार विकेट पहले ही अपने नाम कर चुके थे। इस तरह उन्होंने पूरे मैच में 145 रन देकर 10 विकेट लेने का शानदार कारनामा किया।
श्रीलंका-A की दूसरी पारी 209 रन पर समाप्त हुई। भारत-A को जीत के लिए केवल 33 रन का आसान लक्ष्य मिला। छोटे लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने बिना किसी दबाव के बल्लेबाजी की और शुरुआत से ही सकारात्मक रुख अपनाया।
साई सुदर्शन ने पहली पारी की शानदार फॉर्म को दूसरी पारी में भी जारी रखा। उन्होंने केवल 22 गेंदों में नाबाद 25 रन बनाए और जीत के लिए जरूरी रन तेजी से जुटाए। उनके साथ अमन मोखाडे भी नाबाद लौटे और दोनों बल्लेबाजों ने बिना कोई विकेट गंवाए लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत-A ने केवल 6.2 ओवर में 33 रन बनाकर मुकाबला 10 विकेट से अपने नाम कर लिया।
इस मैच में भारतीय टीम का प्रदर्शन हर विभाग में संतुलित दिखाई दिया। बल्लेबाजों ने पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा किया, गेंदबाजों ने दोनों पारियों में विपक्षी बल्लेबाजी को नियंत्रित रखा और फील्डिंग में भी टीम ने अनुशासित खेल दिखाया। यही कारण रहा कि श्रीलंका-A पूरे मुकाबले में भारत-A को चुनौती देने में सफल नहीं हो सकी।
साई सुदर्शन की 168 रन की बड़ी पारी ने भारत-A की पहली पारी की नींव मजबूत की थी। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम ने ऐसा स्कोर बनाया जिसने श्रीलंका-A पर लगातार दबाव बनाए रखा। दूसरी ओर गुरनूर बरार ने गेंद से मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने उन्हें इस जीत के सबसे बड़े नायकों में शामिल कर दिया।
सीरीज की बात करें तो पहला अनऑफिशियल टेस्ट ड्रॉ पर समाप्त हुआ था, लेकिन दूसरे मुकाबले में मिली बड़ी जीत ने भारत-A को 1-0 से सीरीज विजेता बना दिया। इससे पहले भारतीय टीम अफगानिस्तान-A और श्रीलंका-A की मौजूदगी वाली वनडे ट्राई सीरीज भी अपने नाम कर चुकी थी। लगातार अच्छे नतीजे इस बात का संकेत हैं कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ मजबूत है और युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तेजी से तैयार हो रहे हैं।
इस जीत से भारत-A के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास निश्चित रूप से बढ़ेगा। टीम प्रबंधन के लिए भी यह प्रदर्शन सकारात्मक संकेत लेकर आया है क्योंकि कई खिलाड़ियों ने अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी उपयोगिता साबित की। बल्लेबाजी में धैर्य, गेंदबाजी में आक्रामकता और पूरे मैच के दौरान अनुशासित क्रिकेट ने भारत-A को एक यादगार और एकतरफा जीत दिलाई। गॉल में मिली यह सफलता न केवल सीरीज जीत के रूप में दर्ज हुई, बल्कि युवा भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता और भविष्य की संभावनाओं का भी मजबूत प्रमाण बनकर सामने आई।




