चंडीगढ़: इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में एक इमारत का हिस्सा गिरने की घटना के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे से बचने के लिए अब शहर के विभिन्न इलाकों में पुराने और कमजोर ढांचों की व्यवस्थित पहचान की जाएगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासन के अनुसार, इस अभियान के तहत एस्टेट कार्यालय की बिल्डिंग शाखा आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों का चरणबद्ध सर्वे करेगी। सर्वे के दौरान उन भवनों को चिन्हित किया जाएगा जिनकी संरचना कमजोर हो चुकी है, जिनमें सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है या जो लोगों के लिए संभावित खतरा बन सकते हैं। ऐसे भवनों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित मालिकों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। निर्धारित समय के भीतर सुरक्षा संबंधी सुधार नहीं किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हाल ही में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में हुई घटना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, जिस इमारत का हिस्सा ढहा, वहां मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य चल रहा था। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही राहत एवं बचाव अभियान तत्काल शुरू किया गया ताकि किसी भी संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
बचाव अभियान के दौरान राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम ने मोर्चा संभाला और प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्य तेजी से चलाया। मलबे को हटाने, संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश करने और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से आसपास के क्षेत्र को भी अस्थायी रूप से नियंत्रित किया, ताकि बचाव कार्य बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
उपायुक्त निशांत यादव ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि इस हादसे ने शहर में मौजूद पुराने और जर्जर भवनों की स्थिति की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा और ऐसे सभी भवनों की समयबद्ध पहचान सुनिश्चित की जाएगी जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन मालिकों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा और आवश्यक मरम्मत या संरचनात्मक सुधार समय पर कराने होंगे।
प्रशासन का मानना है कि तेजी से शहरी विकास के बीच कई भवन ऐसे हैं जो वर्षों पुराने हो चुके हैं। समय पर रखरखाव न होने, अनधिकृत निर्माण, क्षमता से अधिक भार या निर्माण संबंधी अन्य कमियों के कारण ऐसे भवन दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसलिए सर्वे के दौरान भवनों की संरचनात्मक स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता और सुरक्षा मानकों का विशेष रूप से मूल्यांकन किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, जिन भवनों को अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा जाएगा, उनके संबंध में संबंधित संपत्ति मालिकों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा। आवश्यकता पड़ने पर भवनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने या अन्य कानूनी उपाय भी अपनाए जा सकते हैं, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासन ने शहरवासियों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि उनके आसपास कोई भवन अत्यधिक जर्जर, झुका हुआ, दीवारों में बड़ी दरारों वाला या किसी अन्य कारण से असुरक्षित प्रतीत होता है, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें। नागरिकों की ओर से समय पर दी गई सूचना संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। समय रहते कमजोर भवनों की पहचान और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने से भविष्य में होने वाले हादसों की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में यह अभियान पूरे शहर में चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा और इसकी नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि चंडीगढ़ में भवन सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।



