चंडीगढ़ में बढ़ता मोटापा बना बड़ी स्वास्थ्य चुनौती, रिपोर्ट में हर तीसरे व्यक्ति के प्रभावित होने का दावा; विशेषज्ञों ने दी लाइफस्टाइल सुधारने की सलाह

चंडीगढ़ में बढ़ता मोटापा बना बड़ी स्वास्थ्य चुनौती, रिपोर्ट में हर तीसरे व्यक्ति के प्रभावित होने का दावा; विशेषज्ञों ने दी लाइफस्टाइल सुधारने की सलाह

चंडीगढ़, जिसे देश के सबसे व्यवस्थित और स्वच्छ शहरों में गिना जाता है, अब एक नई स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है। आधुनिक जीवनशैली, बदलती खानपान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों में लगातार कमी के कारण शहर में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में सामान्य मोटापे (General Obesity) और पेट के आसपास जमा होने वाले मोटापे (Abdominal Obesity) दोनों की दर चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, शहर में सामान्य मोटापे की दर 31.3 प्रतिशत और एब्डॉमिनल ओबेसिटी की दर 36.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों का अर्थ है कि लगभग हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में मोटापे या उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) का बोझ और बढ़ सकता है।

क्या कहती है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट?

संसद में प्रस्तुत रिपोर्ट में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े स्वास्थ्य संकेतकों का विश्लेषण किया गया है। चंडीगढ़ से जुड़े आंकड़े यह संकेत देते हैं कि यहां मोटापे की समस्या केवल व्यक्तिगत स्तर का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) से जुड़ी गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

रिपोर्ट में सामान्य मोटापे और पेट के आसपास जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी दोनों को अलग-अलग मापदंडों के आधार पर आंका गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, विशेष रूप से पेट के आसपास जमा होने वाला मोटापा कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।

सामान्य मोटापा और एब्डॉमिनल ओबेसिटी में क्या अंतर है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य मोटापा आमतौर पर शरीर के कुल वजन और ऊंचाई के अनुपात यानी बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर आंका जाता है। वहीं एब्डॉमिनल ओबेसिटी का संबंध कमर के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी से होता है।

पेट के आसपास अधिक फैट जमा होना कई मामलों में सामान्य मोटापे की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका संबंध सीधे मेटाबॉलिक बीमारियों और हृदय संबंधी समस्याओं से जोड़ा जाता है।

क्यों बढ़ रही है मोटापे की समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आया है। पहले जहां दैनिक जीवन में शारीरिक श्रम अधिक होता था, वहीं अब अधिकांश लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।

मोटापे के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जाते हैं—

  • शारीरिक गतिविधियों में कमी
  • लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना
  • जंक फूड और फास्ट फूड का अधिक सेवन
  • अत्यधिक कैलोरी युक्त भोजन
  • मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता उपयोग
  • अनियमित भोजन का समय
  • तनाव और अपर्याप्त नींद
  • व्यायाम की कमी

इन सभी कारणों का संयुक्त प्रभाव धीरे-धीरे वजन बढ़ने और शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने के रूप में सामने आता है।

फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती भूमिका

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और हाई कैलोरी भोजन की उपलब्धता पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई है।

पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स, शुगर युक्त पेय पदार्थ, प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी पहुंचाता है। यदि इन कैलोरी का उपयोग शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से नहीं हो पाता, तो यह वसा के रूप में जमा होने लगती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुविधा और स्वाद के कारण लोग पारंपरिक संतुलित भोजन की बजाय तैयार खाद्य पदार्थों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।

रिपोर्ट में सामने आया फैट सेवन का आंकड़ा

रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ के लोग प्रतिदिन औसतन 88 से 101 ग्राम तक वसा (Fat) का सेवन कर रहे हैं।

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश वयस्कों के लिए दैनिक वसा सेवन की मात्रा व्यक्ति की आयु, वजन, स्वास्थ्य स्थिति और कुल कैलोरी आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर संतुलित आहार में नियंत्रित मात्रा में स्वस्थ वसा लेने की सलाह दी जाती है।

रिपोर्ट में उल्लेखित औसत सेवन इस ओर संकेत करता है कि कई लोग आवश्यकता से अधिक वसा युक्त भोजन का सेवन कर रहे हैं, जिससे मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।

मोटापा किन बीमारियों का खतरा बढ़ाता है?

डॉक्टरों के अनुसार मोटापा केवल शरीर का वजन बढ़ने तक सीमित समस्या नहीं है। लंबे समय तक अत्यधिक वजन रहने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

टाइप-2 डायबिटीज

अत्यधिक मोटापे के कारण शरीर में इंसुलिन का प्रभाव कम हो सकता है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। यह स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकती है।

हृदय रोग

अधिक वजन और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त वसा का संबंध हृदय रोग, धमनियों में वसा जमने और रक्त संचार संबंधी समस्याओं से भी जोड़ा जाता है।

उच्च रक्तचाप

मोटापे से रक्तचाप बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है। लंबे समय तक उच्च रक्तचाप रहने पर हृदय और किडनी दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

फैटी लिवर

विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में अतिरिक्त चर्बी का प्रभाव लिवर पर भी पड़ सकता है। फैटी लिवर की समस्या अब पहले की तुलना में अधिक लोगों में देखी जा रही है।

जोड़ों की समस्या

अधिक वजन का अतिरिक्त दबाव घुटनों, कमर और अन्य जोड़ों पर पड़ता है, जिससे चलने-फिरने में कठिनाई और गठिया जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

कुछ प्रकार के कैंसर

अंतरराष्ट्रीय शोधों में मोटापे और कुछ प्रकार के कैंसर के बीच संभावित संबंधों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति का जोखिम अलग-अलग स्वास्थ्य कारकों पर निर्भर करता है।

बच्चों और युवाओं में भी बढ़ रही चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे की समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही। बच्चों और किशोरों में भी स्क्रीन टाइम बढ़ने, आउटडोर खेलों में कमी और असंतुलित भोजन के कारण वजन बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं।

कम उम्र में बढ़ा हुआ वजन भविष्य में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य गैर-संचारी रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए शुरुआती उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

मोटापे से बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मोटापे से बचने के लिए कुछ सामान्य जीवनशैली संबंधी उपाय अपनाने की सलाह देते हैं—

  • प्रतिदिन नियमित शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
  • संतुलित और पोषणयुक्त भोजन को प्राथमिकता दें।
  • जंक फूड और अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन करें।
  • मीठे पेय पदार्थों की मात्रा कम रखें।
  • पर्याप्त मात्रा में फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं।
  • नियमित समय पर सोने और जागने की आदत विकसित करें।
  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में हल्की गतिविधि करते रहें।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चुनौती

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे की बढ़ती समस्या केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। यदि बड़ी संख्या में लोग मधुमेह, हृदय रोग और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इसी कारण विशेषज्ञ व्यक्तिगत स्तर पर जागरूकता, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। चंडीगढ़ से जुड़े ताजा आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि समय रहते खानपान की आदतों और दैनिक दिनचर्या में सुधार करना न केवल मोटापे को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, बल्कि इससे कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।