क्या स्टेंट ही है हार्ट ब्लॉकेज का सबसे अच्छा इलाज? हृदय रोग विशेषज्ञ से समझें पूरी सच्चाई

क्या स्टेंट ही है हार्ट ब्लॉकेज का सबसे अच्छा इलाज? हृदय रोग विशेषज्ञ से समझें पूरी सच्चाई

दिल की बीमारियाँ आज के समय में तेजी से बढ़ रही हैं और हार्ट की नसों में ब्लॉकेज (Coronary Artery Disease) सबसे आम समस्याओं में शामिल है। जब किसी व्यक्ति की हार्ट की धमनियों में रुकावट का पता चलता है तो उसके मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि इलाज के लिए स्टेंट लगवाना बेहतर रहेगा या फिर बायपास सर्जरी करानी चाहिए। कई लोग बिना पूरी जानकारी के यह मान लेते हैं कि स्टेंट हर मरीज के लिए सबसे आधुनिक और सही विकल्प है, जबकि कुछ लोगों की धारणा होती है कि बायपास सर्जरी ही सबसे सुरक्षित इलाज है। हालांकि, हकीकत इससे अलग है। किसी भी मरीज के लिए कौन-सा इलाज उपयुक्त रहेगा, इसका फैसला केवल जांच रिपोर्ट, ब्लॉकेज की गंभीरता और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही किया जाता है।

फरीदाबाद के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ के अनुसार, हार्ट ब्लॉकेज का इलाज सभी मरीजों के लिए एक जैसा नहीं होता। हर व्यक्ति की बीमारी की स्थिति अलग होती है। यही कारण है कि डॉक्टर पहले एंजियोग्राफी और अन्य जरूरी जांचों की रिपोर्ट का विश्लेषण करते हैं और उसके बाद तय करते हैं कि स्टेंट लगाया जाए या बायपास सर्जरी की जाए। बिना पूरी मेडिकल जांच के किसी भी इलाज को बेहतर या खराब नहीं कहा जा सकता।

क्या होता है स्टेंट?

स्टेंट एक बेहद पतली धातु की जाली जैसी ट्यूब होती है, जिसे एंजियोप्लास्टी के दौरान ब्लॉकेज वाली धमनी में लगाया जाता है। इसका उद्देश्य बंद या संकरी हो चुकी नस को खोलना होता है ताकि दिल तक खून का प्रवाह सामान्य रूप से पहुंच सके। यह प्रक्रिया बिना बड़ी सर्जरी के पूरी की जाती है और इसमें मरीज को अपेक्षाकृत कम समय अस्पताल में रहना पड़ता है।

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि यदि मरीज की एक या दो धमनियों में ब्लॉकेज है और वह ज्यादा जटिल नहीं है, तो स्टेंट एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है। खासतौर पर ऐसे मरीज जिनकी ब्लॉकेज सीमित हो और जिन्हें तुरंत राहत की आवश्यकता हो, उनमें यह प्रक्रिया काफी सफल रहती है।

किन परिस्थितियों में स्टेंट लगाया जाता है?

यदि किसी व्यक्ति को अचानक हार्ट अटैक आता है और जांच में पता चलता है कि किसी एक प्रमुख धमनी में खून का प्रवाह पूरी तरह रुक गया है, तो ऐसी स्थिति में तुरंत स्टेंट लगाकर नस को खोला जाता है। इससे दिल की मांसपेशियों तक दोबारा रक्त पहुंचने लगता है और हार्ट को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि इमरजेंसी हार्ट अटैक के मामलों में स्टेंट कई बार जीवनरक्षक साबित होता है।

हालांकि, डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल हार्ट अटैक होना ही स्टेंट लगाने का कारण नहीं होता। मरीज की उम्र, अन्य बीमारियां, ब्लॉकेज की स्थिति और दिल की कार्यक्षमता जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।

बायपास सर्जरी कब बनती है बेहतर विकल्प?

हर मरीज की ब्लॉकेज स्टेंट से नहीं खोली जा सकती। यदि मरीज की कई धमनियों में गंभीर रुकावट हो, ब्लॉकेज काफी जटिल हो या फिर दिल की पंपिंग क्षमता पहले से कमजोर हो चुकी हो, तो डॉक्टर बायपास सर्जरी की सलाह देते हैं।

डॉ. समीर भाटी के अनुसार, बायपास सर्जरी में शरीर की दूसरी रक्त वाहिका का उपयोग करके दिल तक खून पहुंचाने के लिए नया रास्ता तैयार किया जाता है। इससे ब्लॉकेज वाले हिस्से को पार करते हुए रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से होने लगता है। ऐसे मरीज जिनकी कई धमनियां प्रभावित होती हैं, उनमें लंबे समय तक बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं और भविष्य में जटिलताओं का जोखिम भी कम हो सकता है।

क्या हर मरीज के लिए बायपास जरूरी है?

अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि यदि ब्लॉकेज मिल गई है तो सीधे बायपास सर्जरी करानी चाहिए। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यदि ब्लॉकेज सीमित है और उसे सुरक्षित तरीके से स्टेंट के जरिए खोला जा सकता है, तो बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। दूसरी ओर, यदि स्टेंट से पर्याप्त लाभ मिलने की संभावना कम है, तभी बायपास को प्राथमिकता दी जाती है।

यानी इलाज का चुनाव बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है, न कि केवल मरीज की इच्छा या किसी एक इलाज की लोकप्रियता पर।

क्या स्टेंट लगने के बाद दोबारा हार्ट अटैक नहीं आता?

यह एक आम गलतफहमी है कि स्टेंट लगने के बाद व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है और भविष्य में उसे कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा। डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि स्टेंट केवल उसी स्थान की रुकावट को खोलता है जहां उसे लगाया गया है। यदि दिल की दूसरी धमनियों में समय के साथ नई ब्लॉकेज बनने लगती है या पुरानी रुकावट बढ़ती है, तो भविष्य में फिर से हार्ट अटैक का खतरा बना रह सकता है।

इसी कारण डॉक्टर स्टेंट के बाद नियमित दवाइयां लेने, समय-समय पर जांच कराने और जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह देते हैं। केवल स्टेंट लगवाने से बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं होती।

इलाज के बाद जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे मरीज का इलाज स्टेंट से हुआ हो या बायपास सर्जरी से, दोनों ही स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली बेहद महत्वपूर्ण होती है। धूम्रपान से दूरी, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखना तथा डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का समय पर सेवन करना भविष्य में हार्ट संबंधी जोखिम को कम करने में मदद करता है।

यदि मरीज इलाज के बाद लापरवाही बरतता है और दवाइयां छोड़ देता है या खानपान पर ध्यान नहीं देता, तो दोबारा ब्लॉकेज बनने की संभावना बढ़ सकती है।

रिकवरी में कितना समय लगता है?

रिकवरी की बात करें तो स्टेंट और बायपास दोनों में अंतर होता है। स्टेंट लगाने की प्रक्रिया कम इनवेसिव होती है, इसलिए अधिकांश मरीज दो से तीन दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी पा जाते हैं। सामान्य परिस्थितियों में लगभग एक सप्ताह के अंदर वे अपने रोजमर्रा के हल्के काम फिर से शुरू कर सकते हैं।

वहीं, बायपास सर्जरी एक बड़ी प्रक्रिया होती है। ऐसे मरीजों को आमतौर पर करीब एक सप्ताह तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाता है। घर लौटने के बाद धीरे-धीरे शरीर को सामान्य गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता है और लगभग 10 से 15 दिनों में मरीज हल्के दैनिक कार्य करने लगते हैं। हालांकि पूरी तरह सामान्य होने में कुछ और समय लग सकता है, जो मरीज की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

डॉक्टर की सलाह क्यों सबसे अहम है?

कई बार मरीज या उनके परिजन इंटरनेट, सोशल मीडिया या अन्य लोगों के अनुभव के आधार पर इलाज का फैसला करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना सही नहीं है। हर मरीज की ब्लॉकेज की संख्या, उसकी जगह, गंभीरता, दिल की कार्यक्षमता और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं अलग होती हैं। इसलिए एक व्यक्ति के लिए उपयुक्त इलाज दूसरे मरीज के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है।

डॉक्टर सभी जांच रिपोर्ट, एंजियोग्राफी के निष्कर्ष, मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प चुनते हैं।

हार्ट ब्लॉकेज के इलाज में न तो स्टेंट को हर स्थिति में सबसे बेहतर कहा जा सकता है और न ही बायपास सर्जरी को। यदि ब्लॉकेज सीमित और कम जटिल है तो स्टेंट प्रभावी विकल्प हो सकता है, जबकि कई धमनियों में गंभीर या जटिल रुकावट होने पर बायपास सर्जरी अधिक लाभदायक साबित हो सकती है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना और सभी जरूरी जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। सही समय पर सही इलाज और उसके बाद स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लंबे समय तक हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है।

(Photo : AI Generated)