10 लाख श्रद्धालुओं के बीच निकली जगन्नाथ रथयात्रा, दो मौतों पर प्रशासन ने बताई वजह

10 लाख श्रद्धालुओं के बीच निकली जगन्नाथ रथयात्रा, दो मौतों पर प्रशासन ने बताई वजह

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा इस वर्ष भी भारी श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। लगातार हो रही बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन और रथ खींचने के लिए सड़कों पर डटे रहे। राज्य सरकार के अनुसार इस बार करीब 10 लाख भक्त रथयात्रा में शामिल हुए। हालांकि यात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत की खबर सामने आने के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। इन घटनाओं को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों मौतों का कारण भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की विफलता नहीं था।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यात्रा के दौरान कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद सात लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें एक 60 वर्षीय श्रद्धालु की इलाज के दौरान मौत हो गई। अधिकारियों का कहना है कि उनकी मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच की जा रही है। वहीं दूसरे श्रद्धालु, जिनकी उम्र 35 वर्ष से अधिक बताई गई है, की मृत्यु हार्ट अटैक आने से हुई। प्रशासन ने दोहराया कि इन दोनों घटनाओं का संबंध किसी भगदड़ या कुचलने जैसी स्थिति से नहीं है।

गुरुवार सुबह से ही पुरी में मौसम लगातार खराब बना रहा। तेज बारिश के बीच भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा से जुड़े सभी पारंपरिक अनुष्ठान तय समय पर संपन्न कराए गए। बारिश के कारण कई श्रद्धालु होटल, धर्मशालाओं और अन्य सुरक्षित स्थानों पर रुके रहे। प्रशासन का भी अनुमान था कि खराब मौसम के कारण इस बार भीड़ अपेक्षाकृत कम रहेगी। लेकिन शाम के समय जैसे ही बारिश थमी, बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ रथयात्रा मार्ग की ओर पहुंचने लगे। इसी वजह से कुछ स्थानों पर अचानक भीड़ का दबाव काफी बढ़ गया।

शाम करीब पांच बजे तीनों रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। हजारों श्रद्धालु रस्सियां पकड़कर भगवान के रथ आगे बढ़ाने लगे। इस दौरान लोगों की भारी मौजूदगी के कारण कई जगह धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रथों के आसपास मौजूद भीड़ लगातार बढ़ती चली गई और कुछ समय के लिए लोगों को सांस लेने तक में परेशानी होने लगी। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर व्यवस्था संभालने की कोशिश की और हालात को नियंत्रित करने में जुटे रहे।

दिनभर चली यात्रा के बाद देर शाम तक भगवान जगन्नाथ का रथ लगभग 200 मीटर आगे बढ़ सका। भगवान बलभद्र का रथ करीब 500 मीटर और देवी सुभद्रा का रथ लगभग 700 मीटर की दूरी तय करने के बाद रोक दिया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार शुक्रवार सुबह पूजा-अर्चना और भोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रथयात्रा दोबारा शुरू की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह करीब 9:30 बजे से तीनों रथ फिर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।

हालांकि सरकार ने मौतों को भगदड़ से जोड़ने से इनकार किया है, लेकिन रथयात्रा मार्ग पर मौजूद लोगों और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने भीड़ प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बारिश रुकने के बाद हजारों श्रद्धालु अचानक एक ही दिशा में पहुंच गए, जिससे रथों के आसपास लोगों की संख्या तेजी से बढ़ गई। कई जगह लोगों को आगे बढ़ने और बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही थी। ऐसे में कुछ समय के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बन गए।

भीड़ नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में लोगों की आवाजाही के लिए स्पष्ट मार्ग और चरणबद्ध प्रवेश व्यवस्था बेहद आवश्यक होती है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि मंदिर के सिंहद्वार से लेकर रथों तक श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही, लेकिन समय रहते प्रवेश को सीमित करने या भीड़ को दूसरी दिशा में मोड़ने जैसे कदम प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए गए। इससे कुछ स्थानों पर दबाव और अधिक बढ़ गया।

जानकारों के अनुसार आयोजन के दौरान चार प्रमुख कमियां देखने को मिलीं, जिन्होंने स्थिति को जटिल बनाया। पहली, सिंहद्वार की ओर से लगातार बढ़ रही भीड़ को समय पर नियंत्रित नहीं किया गया। दूसरी, जब रथों के आसपास अत्यधिक भीड़ जमा होने लगी तब प्रवेश रोकने या वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिखी। तीसरी, आने और जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग रास्तों का प्रभावी पालन नहीं हो सका, जिसके कारण कई स्थानों पर आमने-सामने लोगों की आवाजाही जारी रही। चौथी, कई जगह लगाई गई बैरिकेडिंग भीड़ को व्यवस्थित करने के बजाय संकरे मार्ग का कारण बन गई, जिससे लोगों का दबाव और बढ़ गया।

भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही रथयात्रा के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई थी। इसी पूर्वानुमान के आधार पर प्रशासन ने अपनी तैयारियां की थीं। अधिकारियों को उम्मीद थी कि खराब मौसम के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रहेगी, लेकिन जैसे ही बारिश थमी, हजारों लोग एक साथ बाहर निकल आए। अचानक बढ़ी भीड़ ने पुलिस और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी।

पुरी की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण उत्सव भी है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु हर वर्ष इस आयोजन में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा तीन विशाल रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की यात्रा करते हैं। इस पूरे आयोजन को देखने और रथ खींचने को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। वर्ष में केवल एक बार रथयात्रा के अवसर पर तीनों देवता यहां विराजमान होते हैं। परंपरा के अनुसार भगवान यहां सात दिनों तक निवास करते हैं। इसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। यही कारण है कि गुंडिचा मंदिर का इस उत्सव में विशेष महत्व माना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ के मंदिर का निर्माण कराया था। उनकी पत्नी रानी गुंडिचा के नाम पर ही इस मंदिर का नाम पड़ा। वर्षभर यह मंदिर सामान्य रूप से खाली रहता है और केवल रथयात्रा के दौरान भगवान यहां विराजमान होते हैं। इसी अवधि में लाखों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं। रथयात्रा से एक दिन पहले मंदिर की विशेष सफाई की जाती है, जिसे ‘गुंडिचा मार्जन’ कहा जाता है। यह परंपरा भगवान के स्वागत की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

रथयात्रा के समापन चरण में बहुड़ा यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा वापस श्रीमंदिर लौटते हैं। इस वापसी यात्रा में भगवान मौसी मां मंदिर पर भी कुछ समय के लिए रुकते हैं, जहां उन्हें ओडिशा का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन ‘पोडा पीठा’ भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और रथयात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक पक्ष मानी जाती है।

इस वर्ष की रथयात्रा में एक ओर जहां लाखों श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिली, वहीं भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि पूरे आयोजन की समीक्षा की जाएगी और यदि कहीं व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस होती है तो आगामी दिनों में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सभी की निगाहें शुक्रवार को दोबारा शुरू होने वाली रथयात्रा पर टिकी हैं, जब पूजा-भोग के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ फिर गुंडिचा मंदिर की ओर अपनी यात्रा जारी रखेंगे।