ब्रॉन्ज की जंग में फिर आमने-सामने फ्रांस और इंग्लैंड: 2022 की यादें ताजा, एमबाप्पे-केन पर रहेंगी सबकी निगाहें

ब्रॉन्ज की जंग में फिर आमने-सामने फ्रांस और इंग्लैंड: 2022 की यादें ताजा, एमबाप्पे-केन पर रहेंगी सबकी निगाहें

फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप में चैंपियन बनने का सपना टूटने के बाद अब फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें तीसरे स्थान के लिए होने वाले मुकाबले में अपनी प्रतिष्ठा बचाने उतरेंगी। दोनों यूरोपीय दिग्गज शनिवार देर रात मियामी के हार्ड रॉक स्टेडियम में ब्रॉन्ज मेडल के लिए भिड़ेंगे। मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 2:30 बजे शुरू होगा। यह सिर्फ तीसरे स्थान का मैच नहीं, बल्कि दो मजबूत फुटबॉल राष्ट्रों के बीच सम्मान और इतिहास से जुड़ी लड़ाई भी होगी।

फ्रांस और इंग्लैंड की टक्कर इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2022 फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल के बाद दोनों टीमें पहली बार नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने होंगी। उस मुकाबले में फ्रांस ने 2-1 से जीत दर्ज कर इंग्लैंड का सफर समाप्त किया था। इस बार दांव ट्रॉफी नहीं बल्कि ब्रॉन्ज मेडल है, लेकिन दोनों टीमें जीत के साथ टूर्नामेंट का समापन करना चाहेंगी।

फ्रांस के लिए यह मुकाबला कई मायनों में भावनात्मक भी रहेगा। टीम के अनुभवी कोच दिदिएर डेशां का यह आखिरी मैच माना जा रहा है। ऐसे में खिलाड़ी अपने सफल कोच को जीत के साथ विदाई देने की कोशिश करेंगे। डेशां के नेतृत्व में फ्रांस ने पिछले कई वर्षों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है और टीम विश्व फुटबॉल की सबसे मजबूत इकाइयों में शामिल रही है।

फ्रांस के पास तीसरी बार वर्ल्ड कप का ब्रॉन्ज मेडल जीतने का मौका है। इससे पहले फ्रेंच टीम 1958 और 1986 में तीसरे स्थान पर रही थी। दूसरी ओर इंग्लैंड के इतिहास में अब तक विश्व कप का ब्रॉन्ज मेडल शामिल नहीं है। अगर इंग्लिश टीम यह मुकाबला जीतने में सफल रहती है तो वह पहली बार तीसरे स्थान पर अपना नाम दर्ज कराएगी।

दोनों देशों के बीच अब तक कुल 32 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जा चुके हैं। आंकड़ों में इंग्लैंड का पलड़ा भारी नजर आता है। इंग्लैंड ने 17 मैचों में जीत हासिल की है, जबकि फ्रांस 10 मुकाबले अपने नाम कर सका है। पांच मैच ड्रॉ रहे हैं। हालांकि विश्व कप के मंच पर तस्वीर कुछ अलग रही है। दोनों टीमें इससे पहले तीन बार वर्ल्ड कप में भिड़ चुकी हैं। 1966 और 1982 के ग्रुप स्टेज में इंग्लैंड विजयी रहा था, जबकि 2022 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस ने बाजी मारते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।

इस मुकाबले पर गोल्डन बूट की दौड़ भी पूरी तरह टिकी हुई है। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी आठ गोल और चार असिस्ट के साथ फिलहाल सबसे आगे हैं। फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे भी आठ गोल कर चुके हैं और उनके पास मेसी को पीछे छोड़ने का मौका रहेगा। वहीं इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन और मिडफील्ड स्टार जूड बेलिंघम छह-छह गोल के साथ दौड़ में बने हुए हैं। अगर इनमें से कोई खिलाड़ी इस मैच में शानदार प्रदर्शन करता है तो गोल्डन बूट की तस्वीर बदल सकती है।

फ्रांस ने इस विश्व कप की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। ग्रुप चरण में टीम ने सेनेगल, इराक और नॉर्वे जैसी टीमों को हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद नॉकआउट चरण में फ्रांस ने स्वीडन, पराग्वे और मोरक्को को मात देते हुए लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। टीम से लगातार तीसरा फाइनल खेलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन स्पेन के खिलाफ सेमीफाइनल में मिडफील्ड पर नियंत्रण खोने की वजह से उसे 2-0 की हार झेलनी पड़ी। इसी हार ने फ्रांस का लगातार तीसरी बार फाइनल खेलने का सपना तोड़ दिया।

स्पेन के खिलाफ मुकाबले में फ्रांस का आक्रमण अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। एमबाप्पे और डेम्बेले जैसे तेज खिलाड़ियों को स्पेनिश डिफेंस ने सीमित मौके दिए। मिडफील्ड में गेंद पर नियंत्रण नहीं बना पाने के कारण फ्रांस बार-बार दबाव में आया और अंततः उसे हार का सामना करना पड़ा। अब टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतकर टूर्नामेंट का अंत सकारात्मक तरीके से करना चाहेगी।

दूसरी तरफ इंग्लैंड का सफर भी काफी प्रभावशाली रहा। ग्रुप चरण में उसने क्रोएशिया, घाना और पनामा को पीछे छोड़कर आसानी से नॉकआउट में प्रवेश किया। इसके बाद डीआर कांगो, मेक्सिको और नॉर्वे को हराते हुए टीम सेमीफाइनल तक पहुंची। अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने एंथनी गॉर्डन के गोल से बढ़त भी बना ली थी और काफी समय तक मैच पर नियंत्रण बनाए रखा।

हालांकि मुकाबले के अंतिम 30 मिनट इंग्लैंड के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुए। टीम का बॉल पोजेशन घटकर सिर्फ 12 प्रतिशत रह गया, जिसका फायदा अर्जेंटीना ने उठाया। लगातार हमलों के दबाव में इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति टूट गई और अर्जेंटीना ने दो गोल कर मैच 2-1 से जीत लिया। इस हार ने इंग्लैंड का फाइनल खेलने का सपना खत्म कर दिया, लेकिन टीम अब तीसरे स्थान के साथ टूर्नामेंट समाप्त करने का लक्ष्य लेकर उतरेगी।

अगर व्यक्तिगत खिलाड़ियों की बात करें तो फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज और आक्रामक फ्रंटलाइन है। किलियन एमबाप्पे पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में रहे हैं। उनकी रफ्तार, ड्रिब्लिंग और गोल करने की क्षमता किसी भी डिफेंस के लिए चुनौती बन सकती है। उनके साथ उस्मान डेम्बेले ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है और पांच गोल कर चुके हैं। दोनों की साझेदारी विपक्षी टीमों के लिए लगातार खतरा बनी हुई है।

इंग्लैंड की उम्मीदें एक बार फिर कप्तान हैरी केन पर टिकी होंगी। बड़े मैचों में गोल करने की उनकी क्षमता टीम के लिए सबसे बड़ा हथियार मानी जाती है। इस विश्व कप में वह छह गोल कर चुके हैं और कुल 14 वर्ल्ड कप गोल के साथ महान ब्राजीलियाई स्ट्राइकर रोनाल्डो के रिकॉर्ड की बराबरी से सिर्फ एक कदम दूर हैं। यदि केन इस मुकाबले में गोल करते हैं तो वह विश्व कप इतिहास के सबसे सफल स्ट्राइकरों में अपना स्थान और मजबूत कर लेंगे।

मिडफील्ड में जूड बेलिंघम भी इंग्लैंड की सफलता की अहम कड़ी रहे हैं। छह गोल करने के अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर आक्रमण और रक्षा के बीच संतुलन बनाया है। उनकी ऊर्जा और पासिंग क्षमता इंग्लैंड को अतिरिक्त मजबूती देती है। वहीं फ्रांस के लिए मिडफील्ड का प्रदर्शन भी निर्णायक रहेगा, क्योंकि सेमीफाइनल में इसी विभाग की कमजोरी टीम की हार का कारण बनी थी।

रणनीतिक नजरिए से देखा जाए तो फ्रांस तेज काउंटर अटैक पर भरोसा करेगा, जबकि इंग्लैंड गेंद पर नियंत्रण बनाकर मौके तैयार करने की कोशिश करेगा। दोनों टीमों के पास अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा सितारों का शानदार मिश्रण है। ऐसे में मुकाबले में रोमांच की पूरी उम्मीद है।

ब्रॉन्ज मेडल का मैच भले ही फाइनल जितनी चर्चा नहीं बटोरता, लेकिन दोनों देशों के लिए इसका महत्व कम नहीं है। फ्रांस अपने शानदार विश्व कप अभियान का समापन जीत के साथ करना चाहेगा और डेशां को यादगार विदाई देना चाहेगा। वहीं इंग्लैंड पहली बार तीसरे स्थान पर कब्जा जमाकर इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

फुटबॉल प्रेमियों की नजरें सिर्फ परिणाम पर नहीं, बल्कि गोल्डन बूट की दौड़ पर भी रहेंगी। एमबाप्पे, केन और बेलिंघम के पास व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का यह आखिरी मौका होगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों टीमें आक्रामक अंदाज में खेलेंगी और दर्शकों को एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। शनिवार रात होने वाला यह मुकाबला तय करेगा कि इस विश्व कप में तीसरे स्थान का सम्मान आखिर किस देश के नाम होगा।