हरियाणा में विकास की नई रफ्तार: गौशालाओं को मिलेंगी 820 ई-रिक्शा, पेयजल-सीवरेज और जल परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करेगी सरकार
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में गौसंरक्षण, शहरी बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में आयोजित हाई पावर्ड परचेज कमेटी (HPPC) की बैठक में पशुधन कल्याण, पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और जल शोधन व्यवस्था से जुड़ी करोड़ों रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी गई। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने से न केवल प्रदेश की गौशालाओं को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बुनियादी सुविधाओं का स्तर भी बेहतर होगा।
बैठक में सबसे बड़ा फैसला राज्य की पंजीकृत गौशालाओं को 820 ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का लिया गया। इसके लिए 10.25 करोड़ रुपये की लागत से ई-रिक्शा खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार लंबे समय से गौसंरक्षण और गौशालाओं के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य की अनेक गौशालाओं में हजारों की संख्या में पशुधन है, जहां प्रतिदिन चारा, भूसा, पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने में काफी समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में ई-रिक्शा उपलब्ध होने से इन सभी कार्यों को आसान बनाया जा सकेगा और गौशालाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित तथा प्रभावी होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल गौशालाओं को आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक संसाधनों से भी सशक्त बनाना है ताकि पशुओं की देखभाल वैज्ञानिक और बेहतर तरीके से हो सके। ई-रिक्शा के माध्यम से गौशालाओं में चारा वितरण, बीमार पशुओं तक दवाइयां पहुंचाने, गोबर के परिवहन और अन्य दैनिक कार्यों में काफी सुविधा मिलेगी। इससे कर्मचारियों का श्रम कम होगा और समय की भी बचत होगी।
सरकार ने ई-रिक्शा वितरण के लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। जिन गौशालाओं में 1,000 तक पशुधन है, उन्हें एक ई-रिक्शा दिया जाएगा, जबकि 1,000 से अधिक पशुधन रखने वाली गौशालाओं को दो ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़ी गौशालाओं को उनकी आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन मिल सकें और वहां पशुओं की देखभाल में किसी प्रकार की बाधा न आए।
बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में वर्तमान समय में 770 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हो रही हैं। इनमें से 553 गौशालाओं में एक हजार से कम पशुधन है। 79 गौशालाओं में दो हजार तक, 20 गौशालाओं में तीन हजार तक, आठ गौशालाओं में चार हजार तक पशु हैं। इसके अलावा एक गौशाला में पांच हजार और एक अन्य गौशाला में छह हजार तक पशुधन रखा गया है। इसी आधार पर ई-रिक्शा का वितरण किया जाएगा ताकि प्रत्येक गौशाला को उसकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधा मिल सके।
सरकार का मानना है कि ई-रिक्शा के उपयोग से गौशालाओं में पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता कम होगी और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली विकसित होगी। चूंकि ये वाहन बिजली से संचालित होंगे, इसलिए ईंधन पर होने वाला खर्च भी घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इससे गौशालाओं के संचालन की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।
गौशालाओं से जुड़े फैसलों के अलावा बैठक में शहरी विकास और बुनियादी ढांचे से संबंधित कई बड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कैथल शहर की विभिन्न कॉलोनियों में 12.87 करोड़ रुपये की लागत से नई सीवरेज लाइन बिछाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। लंबे समय से जिन क्षेत्रों में सीवरेज व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, वहां इस परियोजना के पूरा होने के बाद गंदे पानी की निकासी बेहतर होगी और बरसात के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं से भी राहत मिलने की उम्मीद है। नई सीवरेज लाइन से हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बैठक में खेड़ड़ क्षेत्र के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने और नया आरसीसी टैंक बनाने की परियोजना को भी मंजूरी दी गई। इस कार्य पर लगभग 27.70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को देखते हुए मौजूदा सीवरेज शोधन क्षमता को बढ़ाना जरूरी हो गया है। परियोजना पूरी होने के बाद अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (FMDA) के अंतर्गत भी एक महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत 10 एमएलडी क्षमता वाले पांच रैनीवेल (Ranney Well) ट्यूबवेल स्थापित किए जाएंगे। यह परियोजना यमुना नदी के जलभराव वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से मंझावली और मोटूका गांवों के आसपास लागू की जाएगी। लगभग 164.75 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का उद्देश्य भविष्य के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित पेयजल स्रोत तैयार करना है। इन रैनीवेल से प्राप्त पानी की गुणवत्ता की विस्तृत जांच की जाएगी और परीक्षण सफल रहने पर इसका उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाएगा। इससे फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भविष्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) से जुड़ी एक और बड़ी परियोजना को मंजूरी मिली। इसके तहत गंध बराई क्षेत्र में 100 एमएलडी क्षमता वाला दूसरा जलघर बनाया जाएगा। लगभग 149 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह जलघर गुरुग्राम की बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार और भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाएगा। इसके निर्माण के बाद शहर में जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न सेक्टरों में पेयजल आपूर्ति अधिक सुचारु ढंग से हो सकेगी।
बैठक में अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि विभिन्न विभागों से संबंधित करीब 380.40 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। सभी परियोजनाओं के लिए पारदर्शी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके कारण सरकार को लगभग 16.58 करोड़ रुपये की बचत भी हुई है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सभी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं का कार्य तय समयसीमा के भीतर शुरू किया जाए और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर पूरा कर जनता तक उनका लाभ पहुंचाना है। इसके लिए सभी विभाग नियमित रूप से परियोजनाओं की निगरानी करेंगे और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इन फैसलों से हरियाणा में गौसंरक्षण, शहरी विकास और आधारभूत ढांचे को नई दिशा मिलेगी। गौशालाओं में आधुनिक संसाधनों के उपयोग से पशुधन की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी, जबकि सीवरेज, जल शोधन और पेयजल से जुड़ी परियोजनाएं लाखों लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है तो इससे न केवल प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर बेहतर होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में हरियाणा के बुनियादी ढांचे को भी नई मजबूती मिलेगी। गौशालाओं के आधुनिकीकरण से लेकर जल संसाधनों के विकास तक सरकार की यह पहल प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




