हरियाणा में स्किल एजुकेशन का होगा बड़ा बदलाव, 60 आईटीआई बनेंगी हाईटेक; ₹2892 करोड़ की मेगा योजना को मिली रफ्तार

हरियाणा में स्किल एजुकेशन का होगा बड़ा बदलाव, 60 आईटीआई बनेंगी हाईटेक; ₹2892 करोड़ की मेगा योजना को मिली रफ्तार

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। राज्य में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को नई तकनीकों और आधुनिक संसाधनों से लैस करने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने प्रधानमंत्री स्किल एंड इंप्लायबिलिटी ट्रांसफार्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के तहत 60 आईटीआई के व्यापक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। करीब 2,892 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मौजूदा और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण देना है, ताकि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें और राज्य में कुशल मानव संसाधन तैयार हो सके।

इसी संबंध में सोमवार को हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में पीएम-सेतु योजना की राज्य स्तरीय संचालन समिति (स्टेट स्टीयरिंग कमेटी) की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजना की प्रगति, विभिन्न क्लस्टरों के चयन, निवेश योजनाओं और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाएगा और आईटीआई को उद्योगों से जोड़कर रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा।

12 हब-एंड-स्पोक क्लस्टरों में होगा विकास

योजना के तहत पूरे हरियाणा में 12 हब-एंड-स्पोक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर में एक प्रमुख (हब) आईटीआई होगी, जिसके साथ औसतन चार अन्य (स्पोक) आईटीआई जुड़ी रहेंगी। इस मॉडल का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और सभी संस्थानों को समान स्तर की सुविधाएं प्रदान करना है।

सरकार ने फिलहाल जिन सात क्लस्टरों की पहचान की है, उनमें कुरुक्षेत्र, कलायत (कैथल), पलवल, छारा (झज्जर), सोनीपत, मतलौडा (पानीपत) और बेरली कलां (रेवाड़ी) शामिल हैं। इन क्षेत्रों में परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कुरुक्षेत्र, पलवल, छारा, कलायत और सोनीपत क्लस्टरों के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज हो गई है।

आधुनिक तकनीकों के अनुरूप होगा प्रशिक्षण

युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने बैठक में बताया कि उन्नयन के बाद आईटीआई में पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुसार नए पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे ताकि विद्यार्थी प्रशिक्षण पूरा करते ही रोजगार के लिए तैयार हों।

उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत केवल भवन और मशीनरी का विकास ही नहीं होगा, बल्कि प्रशिक्षकों को भी नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा छात्रों के लिए मजबूत प्लेसमेंट व्यवस्था विकसित की जाएगी तथा कई संस्थानों में उत्पादन इकाइयों (प्रोडक्शन यूनिट्स) की स्थापना भी की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

उद्योगों के साथ बढ़ेगी साझेदारी

सरकार इस योजना को उद्योगों की भागीदारी के साथ लागू कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम वास्तविक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप हों। उद्योगों की भागीदारी से पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे, आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे और छात्रों को प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

अधिकारियों का मानना है कि इस मॉडल से आईटीआई और उद्योगों के बीच सीधा समन्वय स्थापित होगा। इससे विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और कंपनियों को प्रशिक्षित एवं कुशल कार्यबल उपलब्ध होगा।

पहले चरण में तीन क्लस्टर होंगे शुरू

सरकार ने वर्ष 2026-27 के दौरान तीन क्लस्टरों को पूरी तरह संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें कुरुक्षेत्र और कैथल क्लस्टर प्रमुख हैं।

राजकीय आईटीआई कुरुक्षेत्र के साथ पांच स्पोक संस्थान जुड़े हुए हैं, जबकि राजकीय आईटीआई कलायत के साथ चार स्पोक संस्थान कार्य करेंगे। इन दोनों क्लस्टरों की संयुक्त छात्र क्षमता 4,800 से अधिक बताई गई है। इन संस्थानों के उन्नयन से हजारों विद्यार्थियों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

जिंदल समूह ने प्रस्तुत की निवेश योजना

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिंदल नवीन अवसार लिमिटेड के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम और उसकी सामाजिक सहयोगी संस्था जिंदल फाउंडेशन ने कुरुक्षेत्र और कैथल क्लस्टरों के लिए 520 करोड़ रुपये से अधिक की पांच वर्षीय रणनीतिक निवेश योजना प्रस्तुत की है।

इस निवेश योजना के तहत प्रशिक्षण अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा, आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं विकसित होंगी और उद्योग आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और उद्योग साझेदारों के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी अंतिम मंजूरी

राज्य संचालन समिति द्वारा स्वीकृत रणनीतिक निवेश योजनाओं को अब अंतिम अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति के पास भेजा जाएगा। वहीं प्रत्येक क्लस्टर के लिए अंतिम बजट और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इसके बाद संबंधित परियोजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन शुरू होगा।

अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य, उपकरणों की खरीद, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार और अन्य विकास कार्य तय समयसीमा के अनुसार शुरू किए जाएंगे।

समयबद्ध तरीके से पूरा होगा चयन

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्लस्टरों का चयन अभी बाकी है, उनकी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि शेष क्लस्टरों के लिए भी आरएफपी प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य केवल संस्थानों का भौतिक विकास नहीं बल्कि तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार करना है। इसलिए प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी की जाएगी और निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरे किए जाएंगे।

रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम-सेतु योजना हरियाणा की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। राज्य में तेजी से बढ़ रहे ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और उभरते तकनीकी क्षेत्रों को प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता है। आधुनिक आईटीआई इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

योजना के लागू होने के बाद विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनों पर व्यावहारिक अनुभव, बेहतर प्लेसमेंट सुविधाएं और रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। वहीं उद्योगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और दक्ष कार्यबल उपलब्ध होगा, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

हरियाणा सरकार का मानना है कि तकनीकी शिक्षा में यह निवेश केवल संस्थानों के विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार बढ़ाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 60 आईटीआई के उन्नयन के साथ हरियाणा कौशल विकास के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है, जहां शिक्षा, उद्योग और रोजगार के बीच मजबूत समन्वय स्थापित कर युवाओं के लिए भविष्य के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।