क्या सीढ़ियां चढ़ना हो गया मुश्किल? यह फिटनेस नहीं, बीमारी की घंटी भी हो सकती है

क्या सीढ़ियां चढ़ना हो गया मुश्किल? यह फिटनेस नहीं, बीमारी की घंटी भी हो सकती है

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि थोड़ी दूर तेज चलने या कुछ सीढ़ियां चढ़ने के बाद सांस फूलना सामान्य बात है। कई लोग इसे बढ़ती उम्र, मोटापा, व्यायाम की कमी या दिनभर की थकान का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हर बार ऐसा सोचना सही नहीं होता। यदि पहले ऐसा नहीं होता था और अब अचानक थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि करने पर ही सांस फूलने लगी है, या समय के साथ यह परेशानी लगातार बढ़ रही है, तो यह शरीर की ओर से मिलने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सांस फूलना कई बार किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। इसलिए इसे केवल सामान्य कमजोरी या फिटनेस की कमी समझकर टालना सही नहीं है। समय रहते कारण का पता लगाना और उचित इलाज कराना भविष्य में होने वाली बड़ी परेशानियों से बचा सकता है।

दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है यह समस्या

जब दिल शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पाता, तब हल्की-सी मेहनत करने पर भी व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है। खासतौर पर महिलाएं, बुजुर्ग और डायबिटीज के मरीजों में यह लक्षण हार्ट डिजीज का शुरुआती संकेत माना जाता है।

दिल की कई बीमारियों में सीने में दर्द बाद में होता है, जबकि सबसे पहले मरीज को सीढ़ियां चढ़ते समय, तेज चलने पर या थोड़ा वजन उठाने पर सांस फूलने की शिकायत होने लगती है। ऐसे में यदि यह समस्या लगातार बनी रहे तो इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

फेफड़ों की कार्यक्षमता घटने पर भी बढ़ सकती है परेशानी

सांस लेने की प्रक्रिया का सीधा संबंध फेफड़ों से होता है। यदि फेफड़ों की क्षमता कम होने लगे या सांस की नलियों में किसी प्रकार की रुकावट हो, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि करने पर भी हांफने लगता है।

अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), फेफड़ों में संक्रमण या अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिल सकती है। यदि पहले से फेफड़ों से जुड़ी कोई बीमारी है और सांस फूलने की समस्या बढ़ रही है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

एनीमिया भी बन सकता है वजह

बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया भी सांस फूलने का एक बड़ा कारण हो सकता है। एनीमिया की स्थिति में शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन पूरे शरीर तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाती।

जब शरीर के अंगों को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिलती, तब व्यक्ति को जल्दी थकान महसूस होती है और थोड़ी मेहनत करने पर ही सांस फूलने लगती है। महिलाओं में आयरन की कमी अधिक होने के कारण यह समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा देखी जाती है।

किन लोगों को रहना चाहिए अधिक सतर्क

कुछ लोगों में सांस फूलने की समस्या को सामान्य मानने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या मोटापे जैसी समस्याएं हैं, तो उसे इस लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए।

इसके अलावा धूम्रपान करने वाले लोगों में भी सांस फूलना फेफड़ों या हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। लंबे समय तक स्मोकिंग करने वालों में फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है, जिससे सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।

अचानक बढ़े लक्षण तो तुरंत कराएं जांच

यदि पहले आप बिना किसी परेशानी के सीढ़ियां चढ़ लेते थे, लेकिन अब कुछ ही सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने लगी है, तो इसे केवल उम्र का असर मानना सही नहीं होगा। इसी तरह यदि पहले हल्की परेशानी थी और अब समय के साथ लगातार बढ़ रही है, तो यह जांच कराने का संकेत हो सकता है।

सांस फूलने के साथ यदि सीने में दर्द, सीने में दबाव या जकड़न, धड़कन का तेज होना, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर महसूस होना या बेहोशी जैसी समस्या भी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण कई बार हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति की ओर भी इशारा कर सकते हैं।

केवल फिटनेस की कमी मान लेना हो सकता है नुकसान

हालांकि यह सच है कि लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि न करने वाले लोगों में थोड़ी मेहनत करने पर सांस फूल सकती है, लेकिन हर मामले में यही कारण हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

यदि नियमित व्यायाम करने वाला व्यक्ति भी अचानक इस परेशानी का सामना करने लगे या पहले की तुलना में कम मेहनत पर ज्यादा सांस फूलने लगे, तो इसके पीछे कोई मेडिकल कारण हो सकता है। इसलिए केवल फिटनेस की कमी का अनुमान लगाकर स्वयं निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

सही कारण जानना सबसे जरूरी

सांस फूलने का इलाज तभी संभव है जब इसकी वास्तविक वजह सामने आए। अलग-अलग बीमारियों में इलाज का तरीका भी अलग होता है। इसलिए केवल इंटरनेट पर पढ़कर या घरेलू उपाय अपनाकर समस्या को ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, ईसीजी, एक्स-रे, ईकोकार्डियोग्राफी, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट या अन्य जरूरी जांच करवाकर सही कारण का पता लगाते हैं। इसके बाद उसी के अनुसार उपचार शुरू किया जाता है।

जीवनशैली में बदलाव भी है जरूरी

यदि जांच में कोई गंभीर बीमारी नहीं निकलती और सांस फूलने का कारण फिटनेस की कमी या बढ़ता वजन है, तो डॉक्टर नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार, वजन नियंत्रित रखने और धूम्रपान छोड़ने जैसी सलाह दे सकते हैं।

रोजाना हल्की वॉक, योग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और पर्याप्त नींद शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। वहीं पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेते रहना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज में बदलाव नहीं करना चाहिए।

लापरवाही न करें

सांस फूलना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना भी समझदारी नहीं है। खासकर यदि यह समस्या अचानक शुरू हुई हो, लगातार बढ़ रही हो या इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हों, तो समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

शरीर अक्सर बीमारी आने से पहले छोटे-छोटे संकेत देता है। यदि इन संकेतों को समय पर पहचान लिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों का इलाज शुरुआती चरण में ही संभव हो सकता है। इसलिए अगली बार यदि सीढ़ियां चढ़ते समय या थोड़ी दूरी चलने पर बार-बार सांस फूलने लगे, तो इसे केवल थकान या कमजोरी मानकर नजरअंदाज करने के बजाय इसकी सही वजह जानने की कोशिश जरूर करें।