पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में लंबे समय से जारी जनआंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। वहां पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मौलिक अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है, लेकिन उनकी आवाज़ दुनिया तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी वजह से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील करते हुए वहां की स्थिति का संज्ञान लेने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
इस आंदोलन की अगुवाई जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और OIC को विस्तृत पत्र भेजकर दावा किया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में आम नागरिक लगातार दमन, आर्थिक संकट और प्रशासनिक उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि स्थानीय लोगों को न्याय नहीं मिल रहा और उनकी शिकायतों को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जा रहा है।
JAAC के मुताबिक, PoK के लोग खुद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूरी तरह अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था नागरिकों की मूलभूत जरूरतें पूरी करने में विफल रही है। बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट ने आम परिवारों का जीवन प्रभावित किया है, जिसके कारण लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए।
संयुक्त राष्ट्र और OIC को भेजे गए पत्र में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां आंदोलन को दबाने के लिए कठोर कार्रवाई कर रही हैं। उनके अनुसार कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया, बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया और कई नागरिकों की जान भी गई। संगठन ने दावा किया कि विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
JAAC ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि PoK में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वहां की वास्तविक स्थिति दुनिया के सामने आ सके। संगठन ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे केवल बेहतर जीवन, लोकतांत्रिक अधिकार और जवाबदेह शासन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार मामलों के उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने भी पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं पर चिंता जताई थी। उन्होंने पाकिस्तानी प्रशासन से संयम बरतने और लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय चुनावों से पहले हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच और दोषियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
तुर्क ने पाकिस्तान द्वारा आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा किसी भी समाज के लिए आवश्यक है और ऐसे मामलों में संतुलित तथा कानूनसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।
दरअसल, PoK में आंदोलन की शुरुआत बिजली के बढ़ते बिलों, महंगे आटे, बेरोजगारी, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ हुई थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन व्यापक जनसमर्थन हासिल करता गया। व्यापारियों, छात्रों, वकीलों, ट्रांसपोर्टरों, मजदूरों और सामाजिक संगठनों ने भी इसमें भाग लेना शुरू कर दिया। इसके बाद प्रदर्शन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि शासन व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े सवाल भी सामने आने लगे।
JAAC का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह जनता की समस्याओं से जुड़ा है और इसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं तथा लोकतांत्रिक अधिकार दिलाना है। संगठन के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ बल प्रयोग और गिरफ्तारियां स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच OIC की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी और कई विश्लेषक यह आरोप लगा रहे हैं कि मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की बात करने वाला यह संगठन PoK में उठ रहे मानवाधिकार संबंधी आरोपों पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। उनका कहना है कि यदि कहीं भी नागरिक अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उस पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि OIC ने अभी तक PoK की घटनाओं पर वैसी सक्रियता नहीं दिखाई, जैसी अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर देखने को मिलती रही है। इसी कारण संगठन की निष्पक्षता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि OIC की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाता रहा है और वहां के लोगों के अधिकारों की बात करता रहा है। लेकिन PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान की नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में नागरिकों के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध है तो उसे पहले अपने प्रशासन वाले क्षेत्र में लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
JAAC का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं और सभी की प्रमुख मांगें बेहतर प्रशासन, आर्थिक राहत, पारदर्शी शासन और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़ी हैं। संगठन का दावा है कि आंदोलन लगातार विस्तार कर रहा है और स्थानीय जनता का समर्थन उसे मिल रहा है।
पिछले करीब दो महीनों से PoK के विभिन्न इलाकों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। कई स्थानों पर बड़ी रैलियां निकाली गईं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई। आंदोलन से जुड़े कुछ समूहों ने पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ कड़े राजनीतिक बयान भी दिए हैं। हालांकि इन बयानों और दावों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से अलग रुख अपनाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि PoK की मौजूदा स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का मिश्रण है। ऐसे में यदि संवाद और समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास नहीं किए गए तो क्षेत्र में असंतोष और बढ़ सकता है। वहीं प्रदर्शनकारी लगातार यह मांग दोहरा रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस पूरे मामले का स्वतंत्र आकलन करें तथा वहां के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
PoK में जारी यह आंदोलन अब केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र, OIC और अन्य वैश्विक संगठनों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई और अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए वैश्विक समुदाय के समर्थन की आवश्यकता है।




