PoK को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ कहने पर भारत की आपत्ति, न्यूयॉर्क टाइम्स की शब्दावली को बताया भ्रामक

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई शब्दावली पर भारत और अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स के बीच विवाद सामने आया है। भारत ने अखबार की एक रिपोर्ट में क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किए गए “पाकिस्तानी कश्मीर” शब्द पर आपत्ति जताई है। भारतीय पक्ष का कहना है कि यह शब्दावली क्षेत्र की स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं करती और इससे पाठकों के बीच भ्रामक धारणा बन सकती है। भारत का आधिकारिक रुख है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान…

PoK चुनाव के बीच हिंसा भड़की, प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का दावा; 8 मौतों की खबर, हालात बेहद तनावपूर्ण

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान राजनीतिक तनाव हिंसा में बदल गया। सोमवार को चुनाव प्रक्रिया के बीच सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस गोलीबारी में कम से कम 8 लोगों की जान चली गई। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। दरअसल, सोमवार को PoK में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत मतदान कराया गया। लेकिन…

PoK में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल, प्रदर्शनकारियों ने UN और OIC से मांगी मदद; मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में लंबे समय से जारी जनआंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। वहां पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मौलिक अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है, लेकिन उनकी आवाज़ दुनिया तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी वजह से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील करते हुए वहां की स्थिति का संज्ञान लेने और मानवाधिकारों…

PoK में बढ़ा सियासी उबाल: JAAC के लॉन्ग मार्च से पहले हाई अलर्ट, 15 जुलाई को हालात बिगड़ने की आशंका

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। 15 जुलाई को प्रस्तावित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के “लॉन्ग मार्च” ने पूरे इलाके में राजनीतिक और सुरक्षा हलकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन को आशंका है कि यदि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर कूच करते हैं, तो सुरक्षा बलों और आंदोलनकारियों के बीच सीधा टकराव हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी है। पिछले कुछ सप्ताह से पीओके के अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं।…

PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ उग्र हुआ आंदोलन, प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आरोप; चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तनाव

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और प्रशासनिक हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोप लगे हैं। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि पाकिस्तान प्रशासन की ओर से अब तक इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही घायल लोगों की संख्या की पुष्टि की गई है। JAAC के अनुसार, यह प्रदर्शन पूरी तरह…

PoK Protest: पीओके पाकिस्तान के कब्जे में कैसे पहुंचा? जानिए 1947 से शुरू हुई पूरी कहानी और मौजूदा विरोध की वजह

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों एक बार फिर असंतोष की आवाजें तेज हो गई हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है, आर्थिक संसाधनों का लाभ नहीं मिल रहा और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। ईदगाह मैदान में हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर खुलकर नाराजगी जताई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह तक कहा कि यदि उनके…

PoK में बढ़ता तनाव: नेताओं की चेतावनी से पाकिस्तान पर दबाव, भारत के साथ वैकल्पिक व्यापार की बात ने बढ़ाई हलचल

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ समय से राजनीतिक और आर्थिक असंतोष लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल के दिनों में रावलकोट सहित कई क्षेत्रों में आयोजित जनसभाओं और विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर इस इलाके की परिस्थितियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है। शुरुआत आर्थिक समस्याओं के विरोध से हुई थी, लेकिन अब आंदोलन का दायरा कहीं अधिक व्यापक हो चुका है। स्थानीय संगठनों और नेताओं की ओर से प्रशासनिक व्यवस्था, संसाधनों के प्रबंधन और राजनीतिक अधिकारों को लेकर उठाए जा रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं…