ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पांचवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की पदक संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की। एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में दो रजत पदक जीतने के साथ भारत के तीन मुक्केबाज भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर चुके हैं। इन उपलब्धियों के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 तक पहुंच गई है। हालांकि अन्य देशों के बेहतर प्रदर्शन के कारण भारत पदक तालिका में सातवें स्थान से फिसलकर नौवें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया लगातार अपना दबदबा बनाए हुए है और 35 स्वर्ण सहित कुल 80 पदकों के साथ पहले स्थान पर कायम है।
भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में देखने को मिली, जहां उत्तर प्रदेश के धावक गुलवीर सिंह ने इतिहास रच दिया। उन्होंने इस स्पर्धा में रजत पदक जीतकर ऐसा करने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इस इवेंट में लंबे समय से अफ्रीकी और ऑस्ट्रेलियाई धावकों का दबदबा रहा है। कठिन परिस्थितियों और लगातार बारिश के बीच गुलवीर ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं।
स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में आयोजित यह मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। लगातार हो रही बारिश के कारण ट्रैक गीला था, जिससे खिलाड़ियों को संतुलन बनाए रखने में काफी मुश्किल हो रही थी। इसके बावजूद गुलवीर सिंह ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दौड़ पूरी की और 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। अंतिम लैप शुरू होने तक वे चौथे स्थान पर थे, लेकिन आखिरी कुछ सौ मीटर में उन्होंने जबरदस्त स्पीड दिखाई और दो प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़कर रजत पदक अपने नाम कर लिया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के धावक ने कांस्य पदक हासिल किया।
गुलवीर सिंह की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और अनुशासन छिपा है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव से आने वाले 27 वर्षीय गुलवीर भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं। सेना में भर्ती होने के उद्देश्य से उन्होंने दौड़ना शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनकी पहचान बन गई। वर्ष 2018 में ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट से जुड़ने के बाद उन्होंने पेशेवर एथलेटिक्स पर पूरा ध्यान देना शुरू किया और राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक लगातार खुद को साबित किया।
गुलवीर का अंतरराष्ट्रीय सफर भी लगातार सफलता की ओर बढ़ता गया। उन्होंने पहली बड़ी उपलब्धि एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर स्पर्धा का कांस्य पदक जीतकर हासिल की। इसके बाद एशियन गेम्स में 10,000 मीटर में भी कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। वर्ष 2025 उनके करियर का सबसे यादगार साल साबित हुआ, जब दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीत लिए। इसके अलावा वे 5,000 मीटर, 10,000 मीटर, एक मील और हाफ मैराथन के भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुके हैं। एक मील की दौड़ चार मिनट से कम समय में पूरी करने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। उन्होंने हाफ मैराथन को भी 60 मिनट से कम समय में पूरा कर नया इतिहास बनाया।
भारतीय दल के लिए दूसरा रजत पदक महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने दिलाया। महिलाओं की 69 किलोग्राम भार वर्ग प्रतियोगिता में उन्होंने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम वजन उठाकर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए उन्होंने कुल 227 किलोग्राम का स्कोर बनाया और रजत पदक अपने नाम कर लिया।
इस स्पर्धा में कनाडा की चार्लोट सिमोन्यू ने कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबी हेमैन समान कुल वजन के बावजूद तकनीकी आधार पर तीसरे स्थान पर रहीं और उन्हें कांस्य पदक मिला। हरजिंदर का प्रदर्शन पूरे मुकाबले के दौरान बेहद संतुलित और आत्मविश्वास से भरा रहा। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ यह सफलता हासिल की।
हरजिंदर कौर की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। पंजाब के नाभा क्षेत्र के महेश गांव की रहने वाली हरजिंदर ने शुरुआत में वेटलिफ्टिंग नहीं बल्कि कबड्डी और रस्साकशी जैसे खेलों में हिस्सा लिया था। उनके कोच परविंदर शर्मा ने उनकी शारीरिक ताकत और मांसपेशियों की क्षमता को देखकर उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं हरजिंदर घर के कामों में परिवार का हाथ बंटाती थीं। चारा काटने की मशीन के भारी लोहे के पहियों को घुमाने से उनकी पकड़ और ताकत स्वाभाविक रूप से विकसित हुई, जिसका फायदा बाद में वेटलिफ्टिंग में मिला।
साल 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। अब 2026 में रजत पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया है कि उनका अगला लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है। उनकी निरंतर प्रगति भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए तीन और पदक लगभग सुनिश्चित कर दिए हैं। तीनों मुक्केबाज अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी खिलाड़ियों को कम से कम कांस्य पदक मिलता है। ऐसे में भारत की पदक संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ना तय माना जा रहा है। यदि ये मुक्केबाज अपने अगले मुकाबले जीतने में सफल रहते हैं तो भारत के खाते में स्वर्ण या रजत पदक भी जुड़ सकते हैं।
हालांकि भारत की कुल पदक संख्या बढ़ने के बावजूद पदक तालिका में उसकी रैंकिंग नीचे आ गई है। इसका प्रमुख कारण अन्य देशों द्वारा स्वर्ण पदकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी है। कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक तालिका का निर्धारण मुख्य रूप से स्वर्ण पदकों के आधार पर किया जाता है। भारत के पास अब तक दो स्वर्ण सहित कुल 12 पदक हैं, जबकि शीर्ष देशों ने स्वर्ण पदकों की संख्या में काफी बढ़त बना रखी है।
ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी खेल शक्ति का परिचय देते हुए अधिकांश प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है। उसके खिलाड़ी तैराकी, एथलेटिक्स, साइक्लिंग और अन्य स्पर्धाओं में लगातार पदक जीत रहे हैं। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया 35 स्वर्ण और कुल 80 पदकों के साथ पहले स्थान पर मजबूती से बना हुआ है। अन्य प्रमुख देशों ने भी लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते भारत को पीछे छोड़ दिया है।
भारतीय दल की नजर अब प्रतियोगिता के अगले चरण पर है, जहां एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और अन्य खेलों में कई खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद की जा रही है। विशेष रूप से मुक्केबाजों के सेमीफाइनल मुकाबले और वेटलिफ्टिंग की बाकी स्पर्धाएं भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। यदि भारतीय खिलाड़ी अपनी लय बरकरार रखते हैं तो पदक तालिका में भारत की स्थिति फिर से बेहतर हो सकती है।
पांचवें दिन का प्रदर्शन यह साबित करता है कि भारतीय खिलाड़ी केवल पारंपरिक खेलों में ही नहीं बल्कि लंबी दूरी की दौड़ और वेटलिफ्टिंग जैसी कठिन स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक रजत और हरजिंदर कौर का दमदार प्रदर्शन आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। वहीं मुक्केबाजों द्वारा पदक पक्का किए जाने से भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। अब सबकी निगाहें अगले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां भारत के पास अपने पदकों की संख्या बढ़ाने और तालिका में बेहतर स्थान हासिल करने का सुनहरा अवसर रहेगा।




