हरियाणा सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक्सटेंशन लेक्चरर्स और गेस्ट प्रोफेसरों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लागू कर दिया है। लंबे समय से अपनी सेवाओं की सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तों की मांग कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए राज्य सरकार ने संशोधित नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इन नए प्रावधानों के लागू होने के बाद प्रदेश के लगभग 2,100 एक्सटेंशन लेक्चरर्स और 45 गेस्ट प्रोफेसरों को सीधा लाभ मिलेगा।
राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद संशोधित नियमों को 15 जून को अधिसूचित कर दिया गया। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को अधिक स्थिरता मिलेगी और उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण व्यवस्था भी मजबूत होगी। नए नियमों में पात्रता तिथि, सेवा अवधि की गणना, मानदेय, महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतन वृद्धि और अनुकंपा लाभ जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार सेवा सुरक्षा से जुड़े नियमों में सबसे बड़ा बदलाव पात्रता की कटऑफ तिथि को लेकर किया गया है। पहले इस योजना का लाभ केवल उन एक्सटेंशन और गेस्ट शिक्षकों को मिलना था जो 30 जून 2023 तक कार्यरत थे। संशोधित नियमों में इस तिथि को बढ़ाकर 21 जुलाई 2025 कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक भी सेवा सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं जो पहले केवल तकनीकी कारणों से इस सुविधा से वंचित रह जाते।
शिक्षकों के संगठनों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि पात्रता की तिथि को आगे बढ़ाया जाए, क्योंकि वर्ष 2023 के बाद नियुक्त या कार्यरत कई शिक्षक लगातार सेवाएं दे रहे थे, लेकिन उन्हें सेवा सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा था। सरकार के इस फैसले से ऐसे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
संशोधित नियमों में दूसरा अहम बदलाव सेवा अवधि की गणना से जुड़ा है। पहले किसी शिक्षक को पात्र माने जाने के लिए एक कैलेंडर वर्ष के भीतर 240 कार्य दिवस पूरे करना अनिवार्य था। व्यवहारिक स्तर पर कई शिक्षकों को इस नियम के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता था, क्योंकि शैक्षणिक सत्र, अवकाश और नियुक्ति की अवधि के कारण कई बार कैलेंडर वर्ष के हिसाब से 240 दिन पूरे करना संभव नहीं हो पाता था।
अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि 240 दिनों की गणना एक वर्ष की संविदात्मक सेवा अवधि के आधार पर की जाएगी। यानी यदि किसी शिक्षक ने अपने अनुबंध की एक वर्ष की अवधि के दौरान 240 दिन सेवाएं दी हैं, तो वह पात्र माना जाएगा। इससे तकनीकी अड़चनों के कारण लाभ से वंचित होने की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
उच्च शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन व्यावहारिक दृष्टि से अधिक उपयुक्त है, क्योंकि अधिकांश संविदात्मक नियुक्तियां शैक्षणिक सत्र के अनुसार होती हैं, न कि कैलेंडर वर्ष के अनुसार। ऐसे में नई व्यवस्था से पात्रता निर्धारण अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत होगा।
सरकार ने सेवा सुरक्षा के साथ-साथ वित्तीय लाभों को भी स्पष्ट रूप से नियमों में शामिल किया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार पात्र एक्सटेंशन लेक्चरर्स और गेस्ट प्रोफेसरों को 57,700 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। पहले मानदेय और महंगाई भत्ते को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण कई तरह की व्याख्याएं सामने आती थीं, लेकिन अब सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
नए नियमों के अनुसार शिक्षकों के मानदेय में समय-समय पर महंगाई भत्ते (डीए) के अनुसार वृद्धि भी की जाएगी। प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को डीए में होने वाली बढ़ोतरी का लाभ इन शिक्षकों को भी मिलेगा। इससे उनके वेतन में महंगाई के अनुरूप नियमित संशोधन होता रहेगा।
इसके अतिरिक्त पात्र शिक्षकों को वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ भी मिलेगा। इससे लंबे समय तक सेवाएं देने वाले शिक्षकों की आय में क्रमिक वृद्धि सुनिश्चित होगी। शिक्षकों का मानना है कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी और भविष्य को लेकर भी कुछ स्थिरता आएगी।
सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के पहलू को भी ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े हैं। यदि किसी पात्र शिक्षक का सेवा के दौरान निधन हो जाता है तो उनके परिवार को अनुकंपा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा परिस्थितियों के अनुसार परिवार के पात्र सदस्य को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से अनुकंपा आधार पर रोजगार का अवसर भी दिया जा सकेगा।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह प्रावधान विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होगा जिनकी आजीविका पूरी तरह संबंधित शिक्षक पर निर्भर होती है। इससे कठिन परिस्थितियों में परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य केवल सेवा सुरक्षा देना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों का मनोबल बढ़ाना भी है। लंबे समय तक संविदा या एक्सटेंशन आधार पर कार्य करने वाले शिक्षक अक्सर नौकरी की अनिश्चितता और सीमित सुविधाओं के कारण मानसिक दबाव में रहते हैं। नई व्यवस्था से उन्हें अपेक्षाकृत अधिक स्थिर कार्य वातावरण मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जब शिक्षक भविष्य को लेकर अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे तो उसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और कॉलेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। स्थिरता मिलने से अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और संस्थानों में शिक्षण कार्य की निरंतरता बनी रहेगी।
हरियाणा में सरकारी कॉलेजों में बड़ी संख्या में एक्सटेंशन लेक्चरर्स और गेस्ट प्रोफेसर वर्षों से विभिन्न विषयों का अध्यापन कर रहे हैं। नियमित शिक्षकों के रिक्त पदों के बीच इन शिक्षकों ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई कॉलेजों में पढ़ाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं शिक्षकों के माध्यम से संचालित होता है।
इसी कारण पिछले कई वर्षों से ये शिक्षक सेवा सुरक्षा, बेहतर वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा संबंधी लाभों की मांग कर रहे थे। समय-समय पर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं और इस संबंध में कई दौर की बातचीत भी हुई। अब संशोधित नियम लागू होने के बाद इन मांगों का एक बड़ा हिस्सा पूरा होता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने के लिए केवल आधारभूत ढांचा ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रशिक्षित और अनुभवी शिक्षकों को स्थिर कार्य परिस्थितियां देना भी उतना ही आवश्यक है। सेवा सुरक्षा मिलने से शिक्षक अधिक समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने एक ओर संविदात्मक शिक्षकों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने का प्रयास किया है। आने वाले समय में इन संशोधित नियमों के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अन्य सेवा शर्तों में भी सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
फिलहाल राज्यपाल की मंजूरी के बाद अधिसूचित इन नए नियमों ने हजारों एक्सटेंशन लेक्चरर्स और गेस्ट प्रोफेसरों को बड़ी राहत दी है। पात्रता तिथि का विस्तार, 240 कार्य दिवस के नियम में व्यावहारिक बदलाव, ₹57,700 प्रतिमाह मानदेय, डीए और वार्षिक वेतन वृद्धि जैसी सुविधाएं तथा अनुकंपा सहायता के प्रावधानों से प्रदेश के लगभग 2,145 शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक मजबूती और निरंतरता मिलेगी।




