हरियाणा की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: पहली बार बनी एटीएस, महिला आईपीएस नाजनीन भसीन को मिली कमान

हरियाणा की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: पहली बार बनी एटीएस, महिला आईपीएस नाजनीन भसीन को मिली कमान

हरियाणा ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहली बार आतंकवाद निरोधक दस्ता (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड-एटीएस) का गठन किया है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य, अंतरराज्यीय अपराध, कट्टरपंथी गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क की संभावित चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक विशेषीकृत बल तैयार किया है, जो आधुनिक तकनीक, खुफिया सूचनाओं और विशेषज्ञ जांच के आधार पर आतंकवाद से जुड़े मामलों से निपटेगा।

इस नई एजेंसी की कमान 2007 बैच की वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी नाजनीन भसीन को सौंपी गई है। उन्हें एटीएस का पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया गया है। हरियाणा में पहली बार गठित इस विशेष बल का नेतृत्व किसी महिला अधिकारी को सौंपे जाने को भी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नाजनीन भसीन के नेतृत्व में काम करेगी विशेष टीम

राज्य सरकार द्वारा गठित एटीएस सीधे हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल को रिपोर्ट करेगी। इससे स्पष्ट है कि इस इकाई को राज्य पुलिस ढांचे में उच्च प्राथमिकता दी गई है और इसके संचालन पर शीर्ष स्तर से निगरानी रखी जाएगी।

आईजी नाजनीन भसीन के साथ तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को एटीएस में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें 2014 बैच के आईपीएस लोकेंद्र सिंह तथा 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी उपासना और आईपीएस वरुण सिंगला शामिल हैं।

चारों अधिकारी मिलकर एटीएस के विभिन्न परिचालन, खुफिया और जांच संबंधी कार्यों का नेतृत्व करेंगे। इनकी टीम आतंकवाद से जुड़े मामलों की रोकथाम, जांच और कार्रवाई के लिए समर्पित रहेगी।

विधानसभा से कानून बनाकर किया गया गठन

हरियाणा सरकार ने इस विशेष बल का गठन केवल प्रशासनिक आदेश के जरिए नहीं बल्कि विधानसभा में विधेयक पारित कर कानूनी आधार प्रदान किया है। इससे एटीएस को स्वतंत्र रूप से कार्य करने और आतंकवाद से जुड़े मामलों में आवश्यक कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।

सरकार का मानना है कि मौजूदा समय में सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक अपराधों से कहीं अधिक जटिल हो चुकी हैं। सीमा पार से संचालित नेटवर्क, ऑनलाइन कट्टरपंथ, साइबर माध्यमों से होने वाली आतंकी गतिविधियां और संगठित अपराध के नए स्वरूप को देखते हुए एक विशेषज्ञ एजेंसी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

नई एटीएस आधुनिक तकनीकी संसाधनों, डिजिटल जांच प्रणाली, साइबर विश्लेषण, मजबूत खुफिया तंत्र और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए काम करेगी।

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद स्वीकृत हुआ ढांचा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी मिलने के बाद गृह विभाग ने एटीएस के लिए कुल 410 पदों को स्वीकृति दी है। हालांकि इनमें से अधिकांश पद नई भर्ती के बजाय मौजूदा पुलिस ढांचे के पुनर्गठन के माध्यम से भरे जाएंगे।

सरकारी योजना के अनुसार 410 स्वीकृत पदों में से 391 पदों का केवल पदनाम परिवर्तित किया जाएगा। यानी वर्तमान पुलिस बल में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को एटीएस के तहत समायोजित किया जाएगा।

सिर्फ 19 पदों पर नियमित भर्ती की जाएगी। इसके अतिरिक्त 31 अस्थायी पद अनुबंध के आधार पर भरे जाएंगे, जिनके लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के माध्यम से नियुक्तियां की जाएंगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य नई एजेंसी को शीघ्र कार्यशील बनाना और अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सीमित रखना भी माना जा रहा है।

पंचकूला होगा मुख्यालय

राज्य सरकार ने एटीएस का मुख्यालय पंचकूला में स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पंचकूला और गुरुग्राम में दो विशेष एटीएस थाने भी बनाए जाएंगे।

इन दोनों इकाइयों के माध्यम से पूरे हरियाणा में आतंकवाद से जुड़े मामलों की निगरानी, जांच और कार्रवाई की जाएगी। राज्य को दो परिचालन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है ताकि विभिन्न जिलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

जिलों का किया गया क्षेत्रवार विभाजन

पंचकूला एटीएस थाने के अधिकार क्षेत्र में अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी, पंचकूला और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं।

वहीं गुरुग्राम एटीएस को सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस क्षेत्रीय विभाजन का उद्देश्य किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा चुनौती पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच पर रहेगा जोर

नई एटीएस केवल पारंपरिक पुलिसिंग तक सीमित नहीं रहेगी। इसके संचालन में आधुनिक तकनीकी उपकरण, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक जांच प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।

सरकार ने वैज्ञानिक जांच के लिए अलग से नई नियुक्तियां करने के बजाय पहले से कार्यरत फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के विशेषज्ञ अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है।

इसी प्रकार कार्यालयी कार्यों के लिए भी नए मिनिस्ट्रियल स्टाफ की भर्ती नहीं होगी। उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए एजेंसी को प्रभावी बनाने की रणनीति अपनाई गई है।

अंतर-एजेंसी समन्वय पर रहेगा विशेष फोकस

एटीएस का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राज्य और केंद्र की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी होगा।

खुफिया एजेंसियों, केंद्रीय जांच संस्थानों, साइबर सुरक्षा इकाइयों और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सूचना साझा कर समय रहते संभावित आतंकी गतिविधियों की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में आतंकवाद का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि खुफिया जानकारी, तकनीकी निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय अत्यंत आवश्यक हो गया है।

अतिरिक्त जिम्मेदारियों के साथ निभाएंगी नई भूमिका

आईजी नाजनीन भसीन को एटीएस की जिम्मेदारी अतिरिक्त कार्यभार के रूप में सौंपी गई है। इसके साथ ही वे पहले की तरह आईजी आरटीसी भोंडसी और आईजी सीआईडी मुख्यालय की जिम्मेदारी भी संभालती रहेंगी।

उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और खुफिया तंत्र से जुड़े कार्यों को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए चुना है।

अनुभवी अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी

एटीएस में शामिल अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के पास भी सुरक्षा और खुफिया मामलों का व्यापक अनुभव है।

लोकेंद्र सिंह इससे पहले एसपी सुरक्षा, सीआईडी मुख्यालय तथा कमांडेंट प्रथम बटालियन हरियाणा आर्म्ड पुलिस, अंबाला के रूप में कार्य कर चुके हैं।

आईपीएस अधिकारी उपासना एसपी सीआईडी मुख्यालय की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, जबकि वरुण सिंगला एसपी सिक्योरिटी सीआईडी मुख्यालय के पद पर कार्यरत थे। सुरक्षा और खुफिया मामलों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें नई एटीएस टीम का हिस्सा बनाया गया है।

बदलते सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण पहल

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए कई राज्यों ने पहले ही अपनी विशेष आतंकवाद निरोधक इकाइयां गठित कर रखी हैं। अब हरियाणा ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक समर्पित एटीएस स्थापित की है।

राज्य सरकार का मानना है कि समय रहते संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, खुफिया जानकारी का विश्लेषण, आधुनिक तकनीक का उपयोग और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से संभावित खतरों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा।

सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

हरियाणा में एटीएस का गठन केवल एक नई पुलिस इकाई बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की समग्र सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आधुनिक संसाधनों, प्रशिक्षित अधिकारियों, वैज्ञानिक जांच प्रणाली और मजबूत खुफिया नेटवर्क के साथ यह दस्ता भविष्य में आतंकवाद, कट्टरपंथी गतिविधियों और संगठित आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

महिला आईपीएस अधिकारी नाजनीन भसीन के नेतृत्व में गठित यह नई टीम अब राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगी। आने वाले समय में एटीएस की कार्यप्रणाली और इसकी शुरुआती कार्रवाइयों पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम जनता की भी नजर रहेगी।