चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम में करीब ₹227 करोड़ के एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने नगर निगम की 31 जुलाई 2026 को हुई 363वीं जनरल हाउस बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम समय में ‘टेबल एजेंडा’ के रूप में पेश कर पारित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। AAP का आरोप है कि भाजपा ने सदन में अपने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव को जल्दबाजी में मंजूरी दिलाई, जबकि पार्षदों को एजेंडा पहले से उपलब्ध नहीं कराया गया और उन्हें प्रस्ताव के तकनीकी, वित्तीय तथा प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी अध्यक्ष विजयपाल सिंह, महासचिव ओमकार सिंह औलख, मुख्य प्रवक्ता योगेश धींगरा, कोर कमेटी अध्यक्ष प्रेम गर्ग और पूर्व महापौर कुलदीप कुमार ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने कहा कि नगर निगम हाउस चंडीगढ़ के नागरिकों का लोकतांत्रिक मंच है और यहां लिए जाने वाले बड़े वित्तीय फैसलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है। AAP के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल का बहुमत उसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का अधिकार नहीं देता।
पार्टी नेताओं ने पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1976 के उन प्रावधानों का हवाला दिया जो चंडीगढ़ में लागू हैं। AAP का कहना है कि अधिनियम की धारा 57 के तहत नगर निगम की बैठक का कार्यसूची सभी पार्षदों को बैठक से कम से कम 72 घंटे पहले उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसी तरह यदि किसी अतिरिक्त विषय को अत्यावश्यक परिस्थितियों में Supplementary List of Business के माध्यम से सदन में लाया जाता है तो Regulation 12 के तहत उसे भी निर्धारित समय से पहले पार्षदों तक पहुंचाया जाना जरूरी है।
AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि ₹227 करोड़ जैसी बड़ी राशि से जुड़े प्रस्ताव को इन प्रक्रियाओं के अनुरूप पर्याप्त समय दिए बिना अंतिम समय पर दो पन्नों के टेबल एजेंडे के रूप में सदन के सामने रखा गया। पार्टी का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से पार्षदों को प्रस्ताव का अध्ययन करने, अधिकारियों से सवाल पूछने, विशेषज्ञों से राय लेने और उसके वित्तीय प्रभावों को समझने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर मामला बताया है।
आम आदमी पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े प्रोजेक्ट को महज दो पन्नों में समेटकर सदन से मंजूरी क्यों दिलाई गई। पार्टी नेताओं के मुताबिक, किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत तकनीकी जानकारी, परियोजना की आवश्यकता, अनुमानित लागत, डिजाइन, निर्माण सामग्री, मौजूदा व्यवस्था की स्थिति और भविष्य में होने वाले रखरखाव की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। AAP का आरोप है कि ₹227 करोड़ के प्रस्ताव में ऐसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं थीं।
पार्टी ने सेक्टर-39 और कजौली वाटर वर्क्स से संबंधित प्रस्तावित कार्य को लेकर भी कई सवाल उठाए। AAP नेताओं ने पूछा कि परियोजना के तहत आखिर किस पाइपलाइन पर काम किया जाना है। क्या यह पहले से मौजूद पाइपलाइन है जिसे बदला जाना प्रस्तावित है या फिर नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी? यदि मौजूदा पाइपलाइन को बदला जाना है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और उसे बदलने का तकनीकी आधार क्या है? पार्टी का कहना है कि इन सवालों के स्पष्ट जवाब प्रस्ताव के साथ उपलब्ध होने चाहिए थे।
AAP ने पाइपलाइन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा। पार्टी नेताओं के अनुसार यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि परियोजना में Ductile Iron यानी DI पाइप का इस्तेमाल किया जाएगा या Mild Steel यानी MS पाइप का। इसके अलावा पाइपलाइन का व्यास, लंबाई, क्षमता, मौजूदा नेटवर्क के साथ उसका कनेक्शन और प्रस्तावित परियोजना से जल आपूर्ति व्यवस्था में होने वाले बदलाव की पूरी जानकारी भी सामने रखी जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि जब जनता के करोड़ों रुपये किसी परियोजना पर खर्च होने जा रहे हों तो इस तरह की तकनीकी जानकारी को अस्पष्ट नहीं रखा जा सकता।
आम आदमी पार्टी ने नगर निगम प्रशासन से परियोजना की Detailed Project Report यानी DPR सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि ₹227 करोड़ की कुल राशि किन-किन मदों में खर्च होगी, इसका पूरा ब्यौरा जनता और पार्षदों के सामने रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही परियोजना से संबंधित तकनीकी स्पेसिफिकेशन, लागत का मदवार विवरण, टेंडर प्रक्रिया, निर्माण कार्य की समयसीमा और पहले से मौजूद पाइपलाइन से जुड़े रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
AAP नेताओं ने कहा कि यदि यह परियोजना शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए है तो इसमें पारदर्शिता बरतने में किसी तरह की समस्या नहीं होनी चाहिए। पार्टी के अनुसार, दस्तावेज सार्वजनिक होने से यह भी स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित लागत किस आधार पर तय की गई है और परियोजना से चंडीगढ़ के लोगों को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा।
पार्टी ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम में बड़े वित्तीय प्रस्तावों को लेकर इस तरह के सवाल उठे हैं। AAP नेताओं के मुताबिक, इससे पहले भी करीब ₹190 करोड़ के प्रस्तावों को लेकर पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि बड़े वित्तीय प्रस्तावों पर पर्याप्त चर्चा के बजाय उन्हें सीमित समय में मंजूरी देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के लिए उचित नहीं है।
AAP ने कहा कि नगर निगम हाउस को केवल प्रस्तावों पर मुहर लगाने वाली संस्था के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह वह मंच है जहां चंडीगढ़ के नागरिकों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को चर्चा करनी होती है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सत्ता पक्ष के पास बहुमत होना लोकतांत्रिक बहस का विकल्प नहीं हो सकता। विपक्ष के पार्षदों को भी सवाल पूछने, दस्तावेज देखने और अपनी राय रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
आम आदमी पार्टी ने बताया कि उसके नगर निगम पार्षदों की ओर से इस मामले को लेकर पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक को औपचारिक शिकायत भी भेजी गई है। पार्टी ने मांग की है कि ₹227 करोड़ के प्रस्ताव को पारित करने की प्रक्रिया की जांच की जाए और यदि निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ है तो प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर नियमित प्रक्रिया के तहत दोबारा सदन के सामने लाया जाए।
AAP ने यह भी मांग की कि भविष्य में बड़े वित्तीय प्रस्तावों को टेबल एजेंडा के माध्यम से अंतिम समय पर पेश करने की व्यवस्था पर स्पष्ट सीमा निर्धारित की जाए। पार्टी के अनुसार, टेबल एजेंडा का इस्तेमाल केवल वास्तविक रूप से अत्यावश्यक और छोटे वित्तीय मामलों तक सीमित होना चाहिए। करोड़ों रुपये की लागत वाली परियोजनाओं के लिए पहले से एजेंडा जारी किया जाना चाहिए और उससे संबंधित सभी दस्तावेज पार्षदों को पर्याप्त समय पहले उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
पार्टी नेताओं ने नगर निगम में टेबल एजेंडा के माध्यम से पेश किए जाने वाले प्रस्तावों की अधिकतम वित्तीय सीमा तय करने की भी मांग की। उनका कहना है कि यदि इस तरह की सीमा तय नहीं की गई तो भविष्य में भी बड़े वित्तीय प्रस्तावों को अंतिम समय में सदन में लाकर बहुमत के आधार पर पारित कराने की स्थिति पैदा हो सकती है। AAP के मुताबिक, इससे न केवल विपक्ष के अधिकार प्रभावित होंगे बल्कि जनता के पैसे के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठेंगे।
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि ₹227 करोड़ के प्रस्ताव से संबंधित तकनीकी और वित्तीय दस्तावेज तय समय में सार्वजनिक नहीं किए गए और प्रस्ताव को वापस लेकर नियमित प्रक्रिया के तहत दोबारा सदन में नहीं लाया गया तो पार्टी आंदोलन करेगी। नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर नगर निगम के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और इस मुद्दे को जनता के बीच भी उठाया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान AAP नेताओं ने कहा कि नगर निगम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह चंडीगढ़ के नागरिकों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का लोकतांत्रिक सदन है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से आने वाले प्रत्येक रुपये के खर्च का हिसाब देना नगर निगम प्रशासन और सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा को अपने बहुमत का इस्तेमाल जनहित में निर्णय लेने के लिए करना चाहिए, न कि विपक्ष की आपत्तियों और सवालों को दरकिनार करने के लिए।
AAP ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक टकराव के तौर पर नहीं देख रही, बल्कि इसे नगर निगम में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देखती है। पार्टी नेताओं ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स पर खुली चर्चा और पूरी जानकारी सार्वजनिक होने से ही जनता का भरोसा मजबूत होगा। उन्होंने दोहराया कि ₹227 करोड़ के प्रस्ताव को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा लाए जाने, विस्तृत DPR और तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने तथा पार्षदों को पर्याप्त समय दिए जाने तक पार्टी अपना विरोध जारी रखेगी। साथ ही AAP ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और जनता के धन की जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।



