एक्टर प्रदीप रावत के निधन के बाद चर्चा में ब्लड कैंसर, जानिए कब हो जाना चाहिए सतर्क

एक्टर प्रदीप रावत के निधन के बाद चर्चा में ब्लड कैंसर, जानिए कब हो जाना चाहिए सतर्क

बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) से जूझ रहे थे और हाल के दिनों में उनकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई थी। इलाज के दौरान भिवंडी के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। उन्होंने अपने अभिनय से कई यादगार किरदार निभाए और फिल्मों के साथ-साथ टीवी जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

प्रदीप रावत का निधन एक बार फिर ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को चर्चा में ले आया है। यह ऐसा कैंसर है जो शरीर के रक्त, बोन मैरो (अस्थि मज्जा) और लसीका तंत्र (लिम्फेटिक सिस्टम) को प्रभावित करता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिसके कारण कई लोग समय रहते इसकी पहचान नहीं कर पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए और समय पर जांच कराई जाए तो कई मामलों में उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हर साल एक लाख से अधिक नए ब्लड कैंसर के मामले सामने आते हैं, जबकि लगभग 70 हजार लोगों की मौत इस बीमारी के कारण होती है। यही वजह है कि जागरूकता और समय पर इलाज को सबसे बड़ा बचाव माना जाता है।

दिल्ली के बीएलके मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट रेडिएशन ऑन्कोलॉजी एवं ऑन्कोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. गरिमा सिंह के अनुसार ब्लड कैंसर कोई एक बीमारी नहीं बल्कि कई प्रकार के कैंसर का समूह है। इसमें असामान्य रक्त कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और शरीर की सामान्य रक्त कोशिकाओं के काम में बाधा डालती हैं। इसका असर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, खून बनने की प्रक्रिया और कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है।

ब्लड कैंसर के मुख्य प्रकार

विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड कैंसर को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है।

1. ल्यूकेमिया (Leukemia)

यह ब्लड और बोन मैरो से जुड़ा कैंसर होता है। इसमें सफेद रक्त कोशिकाएं असामान्य तरीके से बनने लगती हैं। ये कोशिकाएं स्वस्थ रक्त कोशिकाओं की जगह लेने लगती हैं, जिससे शरीर में संक्रमण, एनीमिया और रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी प्रभावित कर सकती है।

2. लिंफोमा (Lymphoma)

यह कैंसर लिम्फेटिक सिस्टम यानी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। लिम्फ नोड्स में सूजन, लगातार बुखार और वजन कम होना इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। लिंफोमा के भी कई प्रकार होते हैं और इलाज का तरीका उसके प्रकार पर निर्भर करता है।

3. मल्टीपल मायलोमा (Multiple Myeloma)

यह कैंसर प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है, जो शरीर में एंटीबॉडी बनाने का काम करती हैं। इसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और मरीज को बार-बार संक्रमण, हड्डियों में दर्द तथा कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

क्या हर ब्लड कैंसर एक जैसा होता है?

डॉ. गरिमा सिंह बताती हैं कि सभी प्रकार के ब्लड कैंसर एक जैसे नहीं होते। कुछ प्रकार बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कई वर्षों तक नियंत्रित रह सकते हैं, जबकि कुछ बेहद आक्रामक होते हैं और कम समय में तेजी से फैलते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी होता है।

किसी भी मरीज में बीमारी कितनी तेजी से बढ़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर का प्रकार कौन-सा है और असामान्य कोशिकाएं किस गति से विकसित हो रही हैं। इसलिए हर मरीज का इलाज उसकी स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग तय किया जाता है।

किन लोगों में खतरा ज्यादा रहता है?

ब्लड कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक माना जाता है। भारत में यह बीमारी बच्चों और युवा वयस्कों में भी देखने को मिलती है। वहीं बढ़ती उम्र के साथ भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो, जिन्हें पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन दिया गया हो, या जो लंबे समय तक बेंजीन जैसे रसायनों के संपर्क में रहे हों, उनमें भी जोखिम अधिक हो सकता है। धूम्रपान को भी इसके संभावित जोखिम कारकों में शामिल किया जाता है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

ब्लड कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण या कमजोरी जैसे लग सकते हैं। यही कारण है कि कई मरीज देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। यदि नीचे दिए गए लक्षण लगातार बने रहें तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

लगातार बुखार

यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबे समय तक बुखार बना रहे और दवाइयों के बावजूद बार-बार लौट आए तो इसे सामान्य संक्रमण मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अचानक वजन कम होना

अगर बिना डाइटिंग या व्यायाम के शरीर का वजन तेजी से घटने लगे तो यह कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जिनमें ब्लड कैंसर भी शामिल है।

अत्यधिक थकान

पर्याप्त आराम करने के बाद भी लगातार कमजोरी और थकान महसूस होना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है।

बार-बार संक्रमण

रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण मरीज को बार-बार संक्रमण होने लगते हैं और उनसे उबरने में सामान्य से अधिक समय लगता है।

रात में अत्यधिक पसीना

बिना मौसम या तापमान में बदलाव के रात के समय जरूरत से ज्यादा पसीना आना भी कई मामलों में ब्लड कैंसर का लक्षण माना जाता है।

लिम्फ नोड्स में सूजन

गर्दन, बगल या जांघ के आसपास लिम्फ नोड्स में गांठ या सूजन दिखाई देना भी जांच कराने का कारण हो सकता है।

आसानी से खून बहना या चोट लगना

यदि मामूली चोट पर ज्यादा खून निकलता हो या शरीर पर बिना वजह नीले निशान बनने लगें तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

हड्डियों में दर्द और कमजोरी

लगातार हड्डियों में दर्द, शरीर में कमजोरी या चलने-फिरने में परेशानी महसूस होना भी इस बीमारी से जुड़ा संकेत हो सकता है।

ब्लड कैंसर का कारण क्या है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड कैंसर का कोई एक निश्चित कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। हालांकि कई ऐसे कारक हैं जो इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं।

  • बढ़ती उम्र
  • आनुवंशिक विकार
  • परिवार में कैंसर का इतिहास
  • पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन का इलाज
  • धूम्रपान
  • बेंजीन जैसे रसायनों के लंबे संपर्क में रहना

इन जोखिम कारकों का होना यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति को निश्चित रूप से ब्लड कैंसर होगा, लेकिन ऐसे लोगों को स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

समय पर जांच क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो कई प्रकार के ब्लड कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर ब्लड टेस्ट, बोन मैरो जांच, बायोप्सी और अन्य आवश्यक परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं।

आज आधुनिक चिकित्सा में कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी कई उपचार पद्धतियां उपलब्ध हैं। कौन-सा इलाज अपनाया जाएगा, यह कैंसर के प्रकार, स्टेज और मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है इसके लक्षणों के प्रति जागरूक रहना और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करना। लगातार बुखार, बार-बार संक्रमण, बिना कारण वजन घटना, लिम्फ नोड्स में सूजन या लंबे समय तक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लें। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी जांच, इलाज, दवा या डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें।