पंजाब में पावर नेटवर्क का होगा बड़ा कायाकल्प, ₹5,000 करोड़ की परियोजनाओं से फीडर-ट्रांसफार्मर और ट्रांसमिशन लाइनें होंगी मजबूत

पंजाब में पावर नेटवर्क का होगा बड़ा कायाकल्प, ₹5,000 करोड़ की परियोजनाओं से फीडर-ट्रांसफार्मर और ट्रांसमिशन लाइनें होंगी मजबूत

चंडीगढ़। पंजाब में बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बढ़ती मांग के अनुरूप नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा विकास का काम शुरू किया है। रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत प्रदेश में करीब ₹5,000 करोड़ की लागत से बिजली नेटवर्क को मजबूत करने से जुड़े कार्य चल रहे हैं। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों, उद्योगों और व्यापारिक संस्थानों को भी अधिक भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।

बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने बुधवार को पंजाब विधानसभा में बिजली व्यवस्था से जुड़े एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। विधायक बलकार सिंह सिद्धू की ओर से उठाए गए मुद्दे पर जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य में बिजली वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बिजली की बढ़ती मांग के दबाव को कम करना और उपभोक्ताओं तक अधिक स्थिर आपूर्ति पहुंचाना है।

बिजली मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र को बिजली उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, मई महीने से किसानों को प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने से संभव नहीं हुई, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में किए जा रहे सुधारों का भी इसमें योगदान है।

राज्य सरकार के मुताबिक RDSS के तहत बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इसमें नए फीडर स्थापित करना, पुराने नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, नए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर लगाना और ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार शामिल है। इन कार्यों का उद्देश्य बिजली के बढ़ते लोड को बेहतर तरीके से संभालना और फॉल्ट या ओवरलोडिंग की वजह से होने वाली समस्याओं को कम करना है।

सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब में अब तक 1,296 नए 11 केवी फीडर स्थापित किए जा चुके हैं। ये फीडर बिजली वितरण नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्से हैं और इनके माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। नए फीडरों के निर्माण से पुराने नेटवर्क पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम करने और बिजली वितरण को अलग-अलग हिस्सों में बेहतर ढंग से बांटने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही राज्य में 1,12,195 नए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। घरों में बिजली के बढ़ते इस्तेमाल से लेकर कृषि क्षेत्र में ट्यूबवेलों की मांग और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार तक, वितरण नेटवर्क पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अधिक संख्या में ट्रांसफार्मर स्थापित करने से स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

नए ट्रांसफॉर्मरों के जरिए ओवरलोडेड ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। कई क्षेत्रों में बिजली की मांग निर्धारित क्षमता से अधिक होने पर ट्रांसफार्मर गर्म होने, फॉल्ट आने और आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। सरकार का दावा है कि नए इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ऐसी समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

बिजली वितरण के साथ-साथ पंजाब के ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी अपग्रेड किया जा रहा है। मंत्री ने विधानसभा में बताया कि 66 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। अब तक 663 सर्किट किलोमीटर लंबी 66 केवी लाइनों का विस्तार और उन्नयन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 355 सर्किट किलोमीटर नई 66 केवी ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने का काम भी चल रहा है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से बिजली को उत्पादन केंद्रों से विभिन्न क्षेत्रों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही किसी एक लाइन या नेटवर्क पर अत्यधिक निर्भरता कम होने से आपूर्ति व्यवस्था अधिक लचीली बन सकती है। बिजली की मांग बढ़ने के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना जरूरी है, ताकि भविष्य में भी बढ़ते लोड को संभाला जा सके।

बठिंडा क्षेत्र में चल रही एक महत्वपूर्ण परियोजना का उल्लेख करते हुए बिजली मंत्री ने बताया कि फूल और भाई रूपा के 66 केवी सब-स्टेशनों को वर्तमान में 220 केवी गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट, लहरा मुहब्बत से आने वाली 66 केवी लाइन के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जा रही है। इस मौजूदा व्यवस्था पर बढ़ते भार को देखते हुए अब एक नई समर्पित ट्रांसमिशन लाइन तैयार की जा रही है।

मंत्री के अनुसार, लहरा मुहब्बत से फूल सब-स्टेशन तक 13.2 सर्किट किलोमीटर लंबी नई 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जा रही है। इस लाइन का उद्देश्य मौजूदा नेटवर्क पर पड़ने वाले दबाव को कम करना और फूल तथा आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाना है।

इस परियोजना का अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है। सरकार के अनुसार, कुल 13.2 सर्किट किलोमीटर में से 11.08 सर्किट किलोमीटर का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष काम में आठ ट्रांसमिशन टावरों को बदलना और चार क्रॉसिंग स्ट्रक्चर की ऊंचाई बढ़ाना शामिल है। विभाग का कहना है कि बाकी काम भी जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

क्रॉसिंग स्ट्रक्चर की ऊंचाई बढ़ाने और पुराने टावरों को बदलने का काम तकनीकी और सुरक्षा मानकों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बिजली ट्रांसमिशन लाइनें विभिन्न सड़कों, रेलवे लाइनों और अन्य ढांचागत सुविधाओं के ऊपर से गुजरती हैं। ऐसे स्थानों पर पर्याप्त ऊंचाई बनाए रखना जरूरी होता है। इसलिए परियोजना के अंतिम चरण में इन संरचनाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है।

जब तक नई ट्रांसमिशन लाइन का पूरा काम नहीं हो जाता, तब तक पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत संबंधित क्षेत्रों के बिजली भार को संतुलित किया है। मंत्री ने बताया कि भाई रूपा, महराज और फूल के 66 केवी सब-स्टेशनों के बीच लोड बैलेंसिंग की गई है।

इस अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य उपलब्ध नेटवर्क का अधिकतम और संतुलित उपयोग करना है। सरकार के अनुसार, लोड मैनेजमेंट में किए गए इन बदलावों से मई महीने से किसानों को प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में सफलता मिली है। कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग विशेष रूप से गर्मी के मौसम में बढ़ जाती है, ऐसे में ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क की क्षमता का महत्व और बढ़ जाता है।

पंजाब में कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति लंबे समय से एक महत्वपूर्ण विषय रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है। बिजली आपूर्ति में व्यवधान होने पर किसानों को डीजल आधारित पंप या अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे उनकी लागत बढ़ती है। सरकार का दावा है कि नेटवर्क को मजबूत करने से कृषि क्षेत्र को अधिक स्थिर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

वहीं घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी नेटवर्क अपग्रेडेशन महत्वपूर्ण है। गर्मियों में एयर कंडीशनर, कूलर, पंखे और अन्य उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि स्थानीय ट्रांसफार्मर और फीडर अपनी क्षमता के करीब या उससे अधिक लोड पर चलते हैं तो फॉल्ट और बिजली कटौती की समस्या बढ़ सकती है। नए फीडर और ट्रांसफॉर्मर इस अतिरिक्त भार को संभालने में मदद कर सकते हैं।

उद्योग और व्यापारिक संस्थान भी विश्वसनीय बिजली आपूर्ति पर निर्भर हैं। बार-बार बिजली बाधित होने से उत्पादन प्रभावित होने के साथ मशीनरी और कारोबारी गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार की ओर से किए जा रहे नेटवर्क विस्तार को औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RDSS के तहत चल रहे कार्यों का एक उद्देश्य बिजली वितरण प्रणाली में तकनीकी नुकसान को कम करना भी है। बेहतर नेटवर्क डिजाइन, नए उपकरण और क्षमता विस्तार के जरिए बिजली वितरण की दक्षता में सुधार किया जा सकता है। इससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता के साथ-साथ वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता भी बेहतर होने की उम्मीद है।

बिजली मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार बिजली क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि बिजली की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी, इसलिए केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करना पर्याप्त नहीं है। भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की क्षमता अभी से बढ़ाना आवश्यक है।

सरकार की योजना में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं की मांग को देखते हुए नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक लोड को ध्यान में रखकर ट्रांसफार्मर और फीडरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

पंजाब में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की यह प्रक्रिया केवल नए उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है। इसमें मौजूदा नेटवर्क का उन्नयन, नई ट्रांसमिशन लाइनें, सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाना, लोड बैलेंसिंग और वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल बनाना भी शामिल है। सरकार का दावा है कि इन सभी कदमों का संयुक्त प्रभाव आने वाले समय में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता पर दिखाई देगा।

फिलहाल राज्य में करीब ₹5,000 करोड़ के RDSS कार्य चल रहे हैं। इनमें से कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि कई पर काम जारी है। 1,296 नए 11 केवी फीडर और 1,12,195 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों की स्थापना को बिजली वितरण नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं 663 सर्किट किलोमीटर 66 केवी लाइनों का विस्तार और 355 सर्किट किलोमीटर नई लाइनों का निर्माण ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

बठिंडा क्षेत्र में लहरा मुहब्बत से फूल तक नई 66 केवी लाइन का काम पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। फिलहाल लोड बैलेंसिंग के जरिए व्यवस्था को संभाला जा रहा है, जबकि शेष तकनीकी कार्य पूरा करने की प्रक्रिया जारी है।

कुल मिलाकर, पंजाब सरकार बिजली क्षेत्र में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन का दावा कर रही है। करीब ₹5,000 करोड़ की परियोजनाओं के जरिए नए फीडर, ट्रांसफार्मर और ट्रांसमिशन लाइनें तैयार की जा रही हैं। सरकार के अनुसार इसका लक्ष्य किसानों को पर्याप्त बिजली देने के साथ घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी अधिक स्थिर एवं गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यदि चल रही परियोजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं तो राज्य के बिजली नेटवर्क की क्षमता और विश्वसनीयता में आने वाले समय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।