भारत में सड़क सुरक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में वाहन केवल सड़क पर दौड़ेंगे ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे को लगातार जरूरी जानकारी भी भेजेंगे। केंद्र सरकार ने व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को लेकर एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें भविष्य की नई गाड़ियों में इस तकनीक को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो सड़क पर चलने वाली कार, बाइक, बस, ट्रक और अन्य वाहन संभावित खतरे की जानकारी एक-दूसरे तक पहले ही पहुंचा सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?
V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए सड़क पर चल रहे वाहन आपस में वायरलेस तरीके से डेटा साझा करेंगे। यह सामान्य इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क पर आधारित नहीं होगा, बल्कि एक विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी के माध्यम से काम करेगा।
हर वाहन में एक विशेष कम्युनिकेशन यूनिट लगाई जाएगी, जो लगातार आसपास मौजूद दूसरे वाहनों को अपनी स्थिति और गति की जानकारी भेजती रहेगी। इसी तरह वह दूसरे वाहनों से भी जानकारी प्राप्त करेगी। यह पूरी प्रक्रिया कुछ मिलीसेकंड में होगी, जिससे ड्राइवर को संभावित खतरे का अलर्ट पहले ही मिल जाएगा।
सरकार ने क्या प्रस्ताव रखा है?
सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट के अनुसार 1 अक्टूबर 2028 के बाद बनने वाले नए वाहनों में V2V सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। यह नियम केवल कारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोपहिया, तिपहिया, बस, ट्रक और अन्य मोटर वाहनों पर भी लागू होगा।
यदि कोई ऑटोमोबाइल कंपनी इससे पहले यानी 2027 से ही इस तकनीक का इस्तेमाल करना चाहती है, तो उसे भी सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करना होगा। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर वाहन कंपनियों और आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।
गाड़ियाँ आखिर एक-दूसरे से कैसे करेंगी ‘बात’?
इस तकनीक का सबसे रोचक पहलू यही है कि वाहन एक-दूसरे के साथ लगातार जानकारी साझा करेंगे। हर वाहन अपने आसपास मौजूद दूसरे वाहनों को नियमित अंतराल पर रेडियो सिग्नल भेजेगा।
इन सिग्नलों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी, जैसे—
- वाहन की वर्तमान गति
- वाहन किस दिशा में जा रहा है
- उसकी सटीक लोकेशन
- ब्रेक लगाने की स्थिति
- वाहन की गति बढ़ रही है या कम हो रही है
- लेन बदलने जैसी गतिविधियां
जब आसपास मौजूद दूसरे वाहन यह जानकारी प्राप्त करेंगे, तो उनका सिस्टम संभावित जोखिम का विश्लेषण करेगा और जरूरत पड़ने पर ड्राइवर को तुरंत चेतावनी देगा।
मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ेगी
V2V तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए इंटरनेट, मोबाइल डेटा या नेटवर्क की आवश्यकता नहीं होगी। यह सिस्टम समर्पित वायरलेस रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करेगा। इसलिए चाहे नेटवर्क हो या न हो, वाहन एक-दूसरे से लगातार संपर्क में रहेंगे। यही कारण है कि यह तकनीक दूरदराज के इलाकों और हाईवे पर भी प्रभावी मानी जा रही है।
कितनी दूरी तक पहुंच सकेगा सिग्नल?
V2V सिस्टम की कार्यक्षमता सड़क की स्थिति और आसपास के वातावरण पर निर्भर करेगी। यदि रास्ता खुला होगा तो सिग्नल काफी दूर तक जा सकते हैं, जबकि ऊंची इमारतें, पहाड़ या तीखे मोड़ इसकी दूरी को कुछ कम कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में यह सिग्नल लगभग 150 से 900 मीटर तक प्रभावी रह सकता है। यानी वाहन कई सौ मीटर पहले ही सामने मौजूद खतरे की जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
दुर्घटनाओं से कैसे बचाएगा यह सिस्टम?
मान लीजिए आप एक्सप्रेसवे पर तेज गति से सफर कर रहे हैं। आपके आगे कई वाहन चल रहे हैं। अचानक सबसे आगे वाली कार किसी कारण से तेज ब्रेक लगा देती है। सामान्य स्थिति में पीछे चल रहे ड्राइवर को यह बात तब पता चलेगी जब वह ब्रेक लाइट देखेगा। लेकिन यदि बीच में कई वाहन हों तो प्रतिक्रिया देने में देर हो सकती है।
V2V तकनीक में सबसे आगे वाली गाड़ी के ब्रेक लगाने की सूचना तुरंत पीछे मौजूद सभी V2V वाहनों तक पहुंच जाएगी। परिणामस्वरूप आपका वाहन आपको पहले ही चेतावनी देगा कि आगे अचानक ट्रैफिक धीमा हो गया है। इससे आपके पास समय रहते स्पीड कम करने का अवसर होगा।
धुंध और अंधे मोड़ों पर भी मिलेगा फायदा
यह तकनीक केवल सामने दिखाई देने वाले वाहनों तक सीमित नहीं है। यदि कोई वाहन घने कोहरे में हो, किसी अंधे मोड़ के पीछे छिपा हो या आपकी नजर से ओझल हो, तब भी उसका रेडियो सिग्नल दूसरे वाहनों तक पहुंच सकता है।
यही वजह है कि ऐसे हालात में भी चालक को पहले से चेतावनी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी और दुर्घटना का खतरा कम होगा।
रॉन्ग साइड से आने वाले वाहन की भी मिलेगी सूचना
देश में रॉन्ग साइड ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। यदि सामने से कोई वाहन गलत दिशा में आ रहा होगा और उसमें भी V2V सिस्टम मौजूद होगा, तो आपका वाहन पहले ही अलर्ट जारी कर देगा। इससे चालक समय रहते सावधानी बरत सकेगा और टक्कर से बचने की संभावना बढ़ जाएगी।
एम्बुलेंस और इमरजेंसी वाहनों को मिलेगा रास्ता
इस तकनीक का एक और बड़ा फायदा आपातकालीन सेवाओं को मिलेगा। यदि पीछे से एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस का इमरजेंसी वाहन आ रहा होगा, तो उसका सिग्नल आसपास मौजूद वाहनों तक पहले ही पहुंच जाएगा। इसके बाद ड्राइवर को स्क्रीन या ऑडियो अलर्ट के जरिए सूचना मिल जाएगी कि रास्ता खाली करना है।
इससे इमरजेंसी सेवाओं को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
ADAS सिस्टम के साथ करेगा बेहतर काम
आज कई आधुनिक कारों में ADAS (Advanced Driver Assistance System) दिया जा रहा है। यह कैमरे, रडार और सेंसर की मदद से सामने मौजूद वाहनों और बाधाओं का पता लगाता है। लेकिन ADAS की सबसे बड़ी सीमा यह है कि वह केवल वही देख सकता है जो उसके सेंसर या कैमरे की सीमा में हो।
V2V तकनीक इस कमी को काफी हद तक दूर कर सकती है। यदि कोई वाहन कैमरे की नजर में नहीं भी है, लेकिन उसका रेडियो सिग्नल उपलब्ध है, तो सिस्टम पहले ही खतरे का अनुमान लगाकर चालक को चेतावनी दे सकता है।
पुरानी गाड़ियों का क्या होगा?
V2V सिस्टम फिलहाल केवल नई गाड़ियों के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसलिए शुरुआती वर्षों में सड़क पर नई और पुरानी दोनों तरह की गाड़ियां एक साथ चलेंगी।
पुरानी गाड़ियों में यह तकनीक नहीं होगी, इसलिए वे कोई डिजिटल सिग्नल नहीं भेज पाएंगी। ऐसे में नई V2V गाड़ियों को उनके बारे में जानकारी कैमरा, रडार और अन्य सेंसर के जरिए ही मिलेगी।
यानी जहां V2V उपलब्ध होगा वहां रेडियो सिग्नल काम करेगा और जहां नहीं होगा वहां सेंसर आधारित तकनीक सहारा बनेगी।
क्या भविष्य में पुरानी गाड़ियों में भी लगाया जा सकेगा?
फिलहाल सरकार ने केवल नई गाड़ियों में इस तकनीक को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है।
हालांकि भविष्य में पुराने वाहनों में भी इसे रेट्रोफिट करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में अलग डिवाइस उपलब्ध कराए जाते हैं तो अपेक्षाकृत कम लागत में पुराने वाहनों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
शुरुआती दौर में पूरा फायदा नहीं मिलेगा
तकनीक लागू होने के बाद भी शुरुआती वर्षों में इसका लाभ सीमित रहेगा, क्योंकि सड़क पर बड़ी संख्या में पुराने वाहन मौजूद रहेंगे।
जैसे-जैसे समय के साथ अधिक वाहन V2V सिस्टम से लैस होते जाएंगे, वैसे-वैसे यह नेटवर्क मजबूत होगा और सड़क सुरक्षा में इसका प्रभाव भी बढ़ता जाएगा।
क्या हर खतरे से बचाएगा यह सिस्टम?
हालांकि V2V तकनीक सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन यह हर प्रकार के खतरे का समाधान नहीं है।
सड़क पर अचानक आने वाले पशु, पैदल यात्री, साइकिल सवार या अन्य गैर-कनेक्टेड अवरोध रेडियो सिग्नल नहीं भेज पाएंगे। ऐसे मामलों में कैमरा, रडार और ड्राइवर की सतर्कता अब भी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
यदि प्रस्तावित नियम तय समय पर लागू होते हैं तो भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां कनेक्टेड व्हीकल टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर अपनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि V2V सिस्टम भविष्य में सड़क हादसों को कम करने, ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर बनाने और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में जब अधिकांश वाहन इस नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे, तब सड़क पर सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और स्मार्ट हो सकता है।




