कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीतने पर उन्हें बधाई दी। मुलाकात की एक झलक प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा की, जिसमें वह खिलाड़ियों के साथ काफी उत्साहित नजर आए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर खिलाड़ियों के साथ करीब 32 सेकेंड की एक रील पोस्ट की। वीडियो में वह भारतीय दल के कई खिलाड़ियों के साथ दिखाई दे रहे हैं। रील में गोल्ड मेडल जीतने वाली मुक्केबाज साक्षी चौधरी भी नजर आईं। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने खेलों में भागीदारी और देश के लिए खेलने के महत्व पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने वीडियो में कहा, ‘जो खेलेगा, वो खिलेगा।’ इसके बाद उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, ‘ऑल्वेज चीयर फॉर भारत… भारत माता की जय।’ प्रधानमंत्री के इस संदेश का मकसद खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करने के साथ-साथ देश के युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करना भी रहा।
39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन कई मायनों में खास रहा। भारतीय दल ने अलग-अलग खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे।
पदकों की संख्या के आधार पर भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में पदक हासिल किए और खास तौर पर बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और पैरा स्पोर्ट्स में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान खिलाड़ियों के चेहरे पर भी उत्साह नजर आया। देश के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की ओर से मिली बधाई उनके लिए खास रही। खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपने अनुभव साझा किए और प्रधानमंत्री ने उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
बॉक्सिंग ने दिलाए सबसे ज्यादा पदक
भारत के कुल 39 पदकों में मुक्केबाजी का योगदान सबसे बड़ा रहा। भारतीय बॉक्सरों ने प्रतियोगिता में कुल 10 पदक हासिल किए। इनमें 7 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल शामिल हैं। इस तरह अकेले बॉक्सिंग से भारत को कुल पदकों का एक बड़ा हिस्सा मिला।
भारतीय मुक्केबाजों ने अलग-अलग वजन वर्गों में दमदार प्रदर्शन किया और कई मुकाबलों में विरोधी खिलाड़ियों को मात देकर पोडियम पर जगह बनाई। गोल्ड मेडल जीतने वाली साक्षी चौधरी भी इसी सफल बॉक्सिंग अभियान का हिस्सा रहीं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझा की गई रील में उनकी मौजूदगी ने भी ध्यान खींचा।
अगर कुल पदकों के लिहाज से देखें तो भारत के करीब हर चार पदकों में से एक पदक बॉक्सिंग से आया। यही वजह है कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल की सफलता की चर्चा बॉक्सिंग के प्रदर्शन के बिना पूरी नहीं होती।
एथलेटिक्स में 10 पदक, लेकिन गोल्ड से चूका भारत
भारत के लिए एथलेटिक्स भी पदकों के लिहाज से सबसे सफल खेलों में शामिल रहा। भारतीय एथलीटों ने इस स्पर्धा में कुल 10 पदक जीते। हालांकि एथलेटिक्स से भारत को एक भी गोल्ड मेडल नहीं मिला।
एथलेटिक्स में मिले पदकों में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल का योगदान रहा। ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और कई प्रतियोगिताओं में पोडियम तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
एथलेटिक्स के 10 पदक और बॉक्सिंग के 10 पदक मिलाकर इन दोनों खेलों ने भारत के कुल 39 पदकों में 20 पदक जोड़ दिए। यानी भारत के कुल पदकों का आधे से ज्यादा हिस्सा इन दो खेलों से आया।
वेटलिफ्टिंग ने भी मजबूत प्रदर्शन किया
वेटलिफ्टिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 8 पदक हासिल किए। इस खेल में भारत का प्रदर्शन लंबे समय से कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं में मजबूत रहा है और 2026 में भी यह सिलसिला जारी रहा।
भारतीय भारोत्तोलकों ने अपनी ताकत और तकनीक का शानदार प्रदर्शन करते हुए अलग-अलग वर्गों में पदक जीते। वेटलिफ्टिंग के 8 पदकों ने भारत की कुल पदक संख्या को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा पैरा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पैरा एथलीटों ने कुल 6 पदक जीते। इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने अपनी स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रतिस्पर्धा दिखाते हुए देश के पदक खाते में अहम योगदान दिया।
जूडो से मिले 4 पदक
जूडो में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 4 पदक अपने नाम किए। इस खेल में भी भारतीय खिलाड़ियों ने मुकाबलों में मजबूती दिखाई और देश के लिए पदक जीतने में सफल रहे।
अगर भारत के पूरे पदक अभियान को देखें तो बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, पैरा एथलेटिक्स और जूडो ने मिलकर कुल 37 पदक दिलाए। इसका मतलब है कि भारत के 39 में से 37 पदक सिर्फ इन पांच खेलों से आए।
इस आंकड़े से साफ होता है कि भारतीय दल की सफलता कुछ चुनिंदा खेलों के शानदार प्रदर्शन पर काफी हद तक टिकी रही। वहीं अन्य खेलों के खिलाड़ियों ने भी अपनी-अपनी स्पर्धाओं में चुनौती पेश की और भारतीय दल की कुल उपलब्धि में योगदान दिया।
पैरा पावरलिफ्टिंग से भी आया पदक
भारत के खाते में पैरा पावरलिफ्टिंग से भी एक पदक आया। संख्या भले ही कम हो, लेकिन इस तरह की उपलब्धियां भारतीय पैरा खेलों के बढ़ते प्रभाव को दिखाती हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा खिलाड़ियों की भागीदारी और उनका प्रदर्शन लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। 2026 में भी भारतीय पैरा एथलीटों ने कई स्पर्धाओं में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और पदक तालिका में देश की स्थिति मजबूत करने में भूमिका निभाई।
खिलाड़ियों से मुलाकात के बाद पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की खिलाड़ियों के साथ मुलाकात सिर्फ पदक जीतने की बधाई तक सीमित नहीं रही। उनके सोशल मीडिया वीडियो में खेलों को लेकर युवाओं के बीच उत्साह बढ़ाने का संदेश भी दिखाई दिया।
‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’ जैसे संदेश के जरिए प्रधानमंत्री ने खेलों में भागीदारी को सफलता और विकास से जोड़ने की बात कही। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए भारत के लिए हमेशा समर्थन करने की अपील भी की।
रील के अंत में प्रधानमंत्री ने ‘ऑल्वेज चीयर फॉर भारत’ और ‘भारत माता की जय’ कहा। सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस वीडियो में खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री का सहज अंदाज भी नजर आया।
39 पदकों की उपलब्धि के बाद आगे की तैयारी पर नजर
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 39 पदकों के साथ भारत का अभियान समाप्त हुआ। 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों की यह उपलब्धि भारतीय खेलों के लिए महत्वपूर्ण रही। मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहने वाले भारतीय दल ने कई खेलों में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। सबसे बड़ी बात यह रही कि बॉक्सिंग और एथलेटिक्स ने 10-10 पदक दिलाए, जबकि वेटलिफ्टिंग से 8 और पैरा एथलेटिक्स से 6 पदक मिले। जूडो के 4 और पैरा पावरलिफ्टिंग के 1 पदक ने भी भारत के कुल आंकड़े को 39 तक पहुंचाने में योगदान दिया।
अब भारतीय खिलाड़ियों की नजर आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर होगी। कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली सफलता से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और कई युवा एथलीटों के लिए यह प्रदर्शन आगे की बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी का आधार बन सकता है।
प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात ने इस उपलब्धि को और खास बना दिया। खिलाड़ियों को देश के शीर्ष नेतृत्व से मिली सराहना उनके लिए प्रेरणा का काम करेगी। वहीं प्रधानमंत्री का ‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’ संदेश उन युवाओं तक भी पहुंचाने की कोशिश है, जो खेलों में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की 39 पदकों की उपलब्धि ने देश के खेल प्रदर्शन को एक नई मजबूती दी है। अब चुनौती इस प्रदर्शन को आगे भी कायम रखने और आने वाली प्रतियोगिताओं में पदकों की संख्या और बढ़ाने की होगी।




