पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोनिया गांधी ने एक लेख के जरिए मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल, उनकी आर्थिक नीतियों और उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी का जिक्र करते हुए मौजूदा केंद्र सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए।
सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह के खिलाफ वर्षों तक एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान चलाया गया। उनके मुताबिक इस अभियान में नौकरशाही, मीडिया, न्यायपालिका, सिविल सोसाइटी और RSS-BJP से जुड़े लोगों की भूमिका रही। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पूरे प्रकरण का अंत हो गया है और मनमोहन सिंह इस मामले में पूरी तरह बेदाग साबित हुए हैं।
उन्होंने अपने लेख में कहा कि इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत, सरल और ईमानदार नेता के साथ-साथ देश के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल करेगा।
29 जुलाई का फैसला क्यों अहम है?
सोनिया गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के 29 जुलाई के फैसले को भारत के हालिया राजनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में शीर्ष अदालत का फैसला मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक बहस के एक दुखद अध्याय को समाप्त करता है।
दरअसल, मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। उस समय कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास थी। इस ब्लॉक के आवंटन में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज से जुड़ा विवाद सामने आया था।
आरोप यह था कि शुरुआत में आवंटन को लेकर एक अलग सिफारिश थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया में बदलाव करते हुए हिंदाल्को को भी इसमें शामिल किया गया। इसी फैसले को लेकर मनमोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
CBI जांच से शुरू हुआ था विवाद
मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने की थी। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने 2014 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। CBI का कहना था कि मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद 2015 में मनमोहन सिंह और अन्य संबंधित लोगों को समन जारी किए गए। इस घटनाक्रम ने मामले को राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चित बना दिया था।
इसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 29 जुलाई को शीर्ष अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। साथ ही ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मनमोहन सिंह समेत अन्य लोगों को समन जारी किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मामले में संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त ठोस आधार मौजूद नहीं था। इस फैसले के साथ मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई।
मनमोहन सिंह का निधन 27 दिसंबर 2024 को हो चुका है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उनके निधन के बाद आया।
सोनिया बोलीं- मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर सवाल उठाने का अभियान खत्म
सोनिया गांधी ने अपने लेख में मनमोहन सिंह की व्यक्तिगत ईमानदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ चलाया गया अभियान सुनियोजित था और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसके दावों की वास्तविकता सामने आ गई है।
उनके मुताबिक मनमोहन सिंह की ईमानदारी और जवाबदेही का रिकॉर्ड मौजूदा भाजपा सरकार के काम करने के तरीके से बिल्कुल अलग था। उन्होंने दावा किया कि मनमोहन सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप आखिरकार खोखले साबित हुए।
सोनिया ने जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ED और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार कई नेताओं को दबाव के जरिए चुप कराया जाता है और कुछ मामलों में उन्हें भाजपा में शामिल होने के बाद मंत्री पद तक मिल जाता है।
2017 के ‘रेनकोट’ बयान का भी किया जिक्र
सोनिया गांधी ने अपने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2017 के राज्यसभा भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने उस दौरान मनमोहन सिंह पर की गई मोदी की टिप्पणी को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उस समय पूर्व प्रधानमंत्री पर लगातार राजनीतिक हमले करने वालों में शामिल थे।
उन्होंने 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में दिए गए मोदी के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें मनमोहन सिंह पर ‘रेनकोट पहनकर नहाने’ वाली टिप्पणी की गई थी।
सोनिया गांधी ने लिखा कि अगर प्रधानमंत्री इन दिनों छात्रों को माफ करने की बात कर रहे हैं तो उन्हें मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई अपनी गरिमाहीन टिप्पणियों के लिए भी आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मचिंतन की शुरुआत अपने घर से ही होनी चाहिए।
मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों को बताया बड़ी उपलब्धि
सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल की आर्थिक उपलब्धियों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि UPA सरकार के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
उनके मुताबिक उस दौर में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज हुई, निजी निवेश में वृद्धि हुई और बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया।
सोनिया ने आर्थिक विकास के अलावा मनमोहन सिंह सरकार की कई सामाजिक योजनाओं और कानूनों को भी उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। इनमें शिक्षा का अधिकार कानून, IIT और IIM जैसे संस्थानों में OBC आरक्षण, वन अधिकार कानून, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी MGNREGA और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून-2013 का उल्लेख किया।
उन्होंने GDP की गणना के तरीके में बदलाव के बावजूद UPA के दस साल के आर्थिक प्रदर्शन को पिछली अवधि से बेहतर बताया।
परमाणु समझौते को बताया राजनीतिक साहस का उदाहरण
सोनिया गांधी ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को भी मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में गिना।
उन्होंने कहा कि इस समझौते ने भारत के खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे परमाणु प्रतिबंधों और भेदभाव को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक इस समझौते से भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई और देश को अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था में नई जगह मिली।
सोनिया ने कहा कि इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मनमोहन सिंह ने राजनीतिक जोखिम उठाया और लगातार प्रयास किए। उनके अनुसार यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक साहस और उनकी विदेश नीति की सोच को दर्शाता है।
छात्रों और प्रदर्शन को लेकर भी मोदी सरकार पर हमला
सोनिया गांधी ने अपने लेख में मनमोहन सिंह के समय की राजनीतिक संस्कृति और मौजूदा दौर की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि उनके प्रधानमंत्री रहते सिविल सोसाइटी की भूमिका मजबूत हुई थी और छात्रों को सरकार के खिलाफ आवाज उठाने तथा विरोध प्रदर्शन करने की पर्याप्त स्वतंत्रता थी।
उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने पेलेट गन और AK-47 जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की।
सोनिया ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल में मीडिया और संसद के प्रति जवाबदेह रहते थे। उनके अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री ने बड़ी संख्या में बिना स्क्रिप्ट वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं, जिससे पत्रकारों को सीधे सवाल पूछने का अवसर मिलता था।
‘इतिहास मनमोहन सिंह को सम्मान से याद करेगा’
अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह आज इस फैसले को देखने के लिए हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी समझ और अनुभव से देश को दिशा देने के लिए मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन की विरासत बनी रहेगी।
सोनिया ने जनवरी 2014 में मनमोहन सिंह की कही बात का भी संदर्भ दिया और कहा कि समय बीतने के साथ उनकी वह बात सही साबित होती नजर आ रही है।
सोनिया गांधी का पूरा लेख मूल रूप से मनमोहन सिंह की राजनीतिक विरासत और उनकी ईमानदारी के बचाव के साथ-साथ मोदी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाला राजनीतिक दस्तावेज है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उन्होंने इसी संदर्भ में देखा है।
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के बाद अब मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में आपराधिक कार्यवाही का रास्ता बंद हो चुका है। कांग्रेस इसे पूर्व प्रधानमंत्री की छवि और उनकी ईमानदारी की बड़ी पुष्टि के तौर पर पेश कर रही है, जबकि सोनिया गांधी ने इस फैसले को उनके खिलाफ वर्षों से चलाए गए राजनीतिक अभियान के अंत के रूप में बताया है।




