भूकंप के झटके महसूस हों तो घबराएं नहीं, अपनाएं ये 5 तरीके; खुद और परिवार को ऐसे रखें सुरक्षित

भूकंप के झटके महसूस हों तो घबराएं नहीं, अपनाएं ये 5 तरीके; खुद और परिवार को ऐसे रखें सुरक्षित

भूकंप ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसके आने का सही समय पहले से बता पाना मुश्किल है। कुछ ही सेकंड के तेज झटके घरों, इमारतों और आसपास के ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाल के महीनों में अलग-अलग देशों में आए शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ऐसी स्थिति में आम लोगों को क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।

जून से अब तक कई देशों में 7 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप दर्ज किए गए हैं। वेनेजुएला में 24 जून को आए भूकंप के बाद भारी नुकसान की खबर सामने आई थी। इसके बाद 10 अगस्त को कोलंबिया में तेज भूकंप आया। अब 16 अगस्त को इंडोनेशिया में आए भूकंप ने भी बड़ी तबाही मचाई और 55 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। इन घटनाओं से साफ है कि भूकंप के समय सही जानकारी और कुछ जरूरी तैयारियां जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

भूकंप आने के बाद क्या होगा, यह पूरी तरह आपके नियंत्रण में नहीं है, लेकिन आपात स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी है, इसकी तैयारी पहले से की जा सकती है। विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक पांच महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखकर आप अपने और परिवार के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

1. सबसे पहले घर और आसपास के खतरों की पहचान करें

भूकंप से बचाव की तैयारी उसके आने के बाद नहीं, बल्कि पहले से शुरू करनी चाहिए। अपने घर, ऑफिस या स्कूल में एक बार ध्यान से देखें कि ऐसी कौन-कौन सी वस्तुएं हैं जो तेज झटकों के दौरान गिरकर चोट पहुंचा सकती हैं।

भारी अलमारियां, बुकशेल्फ और दूसरे ऊंचे फर्नीचर दीवार से मजबूती से जुड़े होने चाहिए। ऐसी चीजें जो वजन में भारी हैं या आसानी से टूट सकती हैं, उन्हें ऊंचाई पर रखने के बजाय नीचे की अलमारियों में रखना ज्यादा सुरक्षित है। टेलीविजन, माइक्रोवेव और दूसरे बड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी इस तरह रखें कि झटकों के दौरान उनके गिरने की आशंका कम हो।

घर में गैस, बिजली और पानी की मुख्य सप्लाई कहां से बंद होती है, इसकी जानकारी परिवार के सदस्यों को होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर इन्हें सुरक्षित तरीके से बंद करना आना चाहिए। खासकर गैस लीक भूकंप के बाद आग का बड़ा कारण बन सकती है।

खिड़कियों, शीशों, कांच की अलमारियों और ऐसी सजावटी वस्तुओं से भी दूरी बनाए रखना जरूरी है, जो गिरकर टूट सकती हैं। बच्चों को भी यह समझाना चाहिए कि भूकंप के दौरान खिड़की के पास खड़े नहीं होना है।

2. घर में तैयार रखें इमरजेंसी किट

भूकंप के बाद बिजली, पानी, मोबाइल नेटवर्क और दूसरी जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे समय में अगर जरूरी सामान पहले से मौजूद हो तो घबराहट कम होती है और शुरुआती घंटों में परिवार को संभालना आसान रहता है।

इमरजेंसी किट को घर की ऐसी जगह रखें जहां आपात स्थिति में आसानी से पहुंचा जा सके। परिवार के सभी लोगों को पता होना चाहिए कि यह किट कहां रखी है। इसमें पीने का पर्याप्त पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, फर्स्ट-एड बॉक्स, टॉर्च और अतिरिक्त बैटरियां जरूर रखें।

इसके अलावा बैटरी से चलने वाला या हाथ से चलाया जा सकने वाला रेडियो भी उपयोगी हो सकता है। मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध न होने की स्थिति में रेडियो से सरकारी निर्देश और जरूरी सूचनाएं मिल सकती हैं। सीटी भी किट में रखें, क्योंकि मलबे में फंसने की स्थिति में आवाज से ज्यादा आसानी से संकेत देने में मदद मिल सकती है।

जरूरी दवाएं, पावर बैंक, कुछ नकद पैसे और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां भी तैयार रखें। मजबूत और बंद जूते भी इमरजेंसी किट का हिस्सा होने चाहिए। भूकंप के बाद फर्श पर कांच, पत्थर और मलबा बिखरा हो सकता है, इसलिए नंगे पैर चलना खतरनाक हो सकता है।

3. झटके शुरू हों तो भागने के बजाय खुद को सुरक्षित करें

भूकंप के दौरान सबसे आम गलती घबराकर तुरंत बाहर निकलने की कोशिश करना हो सकती है। अगर आप किसी इमारत के अंदर हैं और तेज झटके आ रहे हैं, तो आम तौर पर झटके खत्म होने तक अंदर ही सुरक्षित स्थान पर रहना बेहतर होता है। इमारत से बाहर निकलते समय गिरते हुए कांच, मलबे और दूसरी वस्तुओं से चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे समय में ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन’ यानी नीचे झुकें, खुद को ढकें और मजबूत चीज को पकड़कर रखें, तरीका अपनाया जाता है।

ड्रॉप: तुरंत हाथों और घुटनों के बल नीचे झुक जाएं, ताकि झटकों के कारण आपका संतुलन न बिगड़े।

कवर: किसी मजबूत टेबल या डेस्क के नीचे चले जाएं और अपने सिर तथा गर्दन को हाथों से ढक लें। अगर आसपास मजबूत टेबल या डेस्क उपलब्ध नहीं है तो खिड़की, शीशे और गिरने वाली वस्तुओं से दूर किसी सुरक्षित अंदरूनी हिस्से में रहें।

होल्ड ऑन: टेबल या डेस्क को मजबूती से पकड़कर रखें। झटकों के कारण फर्नीचर खिसक सकता है, इसलिए उसके साथ अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश करें।

अलग-अलग जगहों पर स्थिति अलग हो सकती है। ऑफिस या दुकान में हों तो शीशे और ऊंची शेल्फ से दूर रहें। स्कूल में बच्चे शिक्षक और स्टाफ के निर्देशों का पालन करें और मजबूत डेस्क के नीचे सिर को सुरक्षित रखें।

अगर आप कार में हैं तो वाहन को पुल, बिजली की लाइनों, पेड़ों और दूसरी संभावित खतरनाक वस्तुओं से दूर रोकें। झटके जारी रहने तक कार के अंदर ही रहना सुरक्षित हो सकता है।

अगर आप बाहर हैं तो इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और तारों से दूर किसी खुले स्थान पर चले जाएं। वहीं, लिफ्ट में मौजूद होने पर झटकों के दौरान जबरन बाहर निकलने की कोशिश न करें। लिफ्ट रुकने के बाद ही स्थिति सुरक्षित होने पर बाहर निकलें।

4. झटके रुकने के बाद भी खतरा खत्म नहीं होता

भूकंप के मुख्य झटके रुकने के बाद राहत महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन इस समय भी सावधानी बेहद जरूरी है। बाद में आने वाले आफ्टरशॉक्स पहले से कमजोर इमारतों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सबसे पहले खुद की चोट जांचें और फिर आसपास मौजूद लोगों की मदद करें। इसके बाद यह देखें कि कहीं गैस की गंध, टूटी पाइपलाइन, क्षतिग्रस्त बिजली की वायरिंग, गिरे हुए तार या टूटे कांच जैसी कोई समस्या तो नहीं है।

अगर गैस लीक होने का संदेह हो तो उस जगह से तुरंत दूर हो जाएं। गैस सप्लाई को खुद दोबारा चालू करने की कोशिश न करें। इसी तरह क्षतिग्रस्त बिजली के तारों को छूने से बचें। यदि किसी इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा है तो उसके अंदर दोबारा जाने से पहले संबंधित अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करना बेहतर है।

आफ्टरशॉक्स के लिए हमेशा तैयार रहें। दोबारा झटके महसूस होते ही फिर से ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन’ का तरीका अपनाएं।

5. भूकंप के बाद मोबाइल का इस्तेमाल समझदारी से करें

आपदा के बाद फोन सबसे जरूरी साधनों में से एक होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। हर छोटी जानकारी के लिए लगातार कॉल करने से नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है और जिन लोगों को वास्तव में मदद की जरूरत है, उनके लिए संचार मुश्किल हो सकता है।

जरूरत न होने पर फोन कॉल करने से बचें। संभव हो तो छोटे टेक्स्ट मैसेज या उपलब्ध डेटा सेवाओं के जरिए संपर्क करें। परिवार के सदस्यों को सुरक्षित होने की जानकारी देने के लिए संक्षिप्त संदेश भेजना उपयोगी हो सकता है।

फोन की बैटरी भी बचाकर रखें। स्क्रीन की रोशनी कम करें, गैर-जरूरी ऐप्स बंद करें और लगातार वीडियो या सोशल मीडिया देखने से बचें। पावर बैंक उपलब्ध हो तो उसे जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करें।

सरकारी एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं से मिलने वाले आधिकारिक अपडेट पर ध्यान दें। अफवाहों और बिना पुष्टि वाली सूचनाओं को आगे भेजने के बजाय विश्वसनीय स्रोतों की जानकारी पर भरोसा करें।

याद रखें, तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव

भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी से इसके दौरान होने वाले नुकसान और चोट के जोखिम को कम किया जा सकता है। घर में खतरनाक वस्तुओं को सुरक्षित करना, इमरजेंसी किट तैयार रखना, ‘ड्रॉप-कवर-होल्ड ऑन’ की तकनीक याद रखना, आफ्टरशॉक्स के खतरे को समझना और फोन का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना ऐसे कदम हैं जिन्हें हर परिवार को पहले से जानना चाहिए।

आपदा के समय कुछ सेकंड का सही फैसला बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए भूकंप आने का इंतजार करने के बजाय आज ही अपने घर और परिवार के लिए सुरक्षा की तैयारी करना ज्यादा समझदारी है।