हिमाचल में गरीबी की नई तस्वीर पर सरकार का फोकस, अति जरूरतमंद परिवारों के लिए बनेगी विशेष सहायता व्यवस्था

हिमाचल में गरीबी की नई तस्वीर पर सरकार का फोकस, अति जरूरतमंद परिवारों के लिए बनेगी विशेष सहायता व्यवस्था

हिमाचल प्रदेश सरकार ने गरीबी के स्तर के आधार पर परिवारों को चिन्हित करने के बाद अब सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों के लिए अलग रणनीति तैयार की है। राज्य में आठ चरणों में किए गए चयन के दौरान सामने आए करीब 1.78 लाख अति गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विशेष सहायता व्यवस्था तैयार की जा रही है। दूसरी ओर, पहले से बीपीएल सूची में शामिल 2.62 लाख परिवारों को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनकी मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और उन्हें पहले की तरह मिल रही सरकारी सुविधाएं एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा।

सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, नई व्यवस्था का मकसद गरीबी की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहायता को अधिक लक्षित बनाना है। इसके तहत उन परिवारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और जिन्हें नियमित सरकारी सहायता के अलावा रोजगार, आवास, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और स्थायी आय के साधनों की जरूरत है।

नए सर्वेक्षण में करीब 90 हजार ऐसे परिवारों की भी पहचान हुई है, जो पहले कभी बीपीएल सूची का हिस्सा नहीं रहे। इस कारण इन परिवारों को बीपीएल श्रेणी के तहत मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया था। सरकार अब गरीबी की वास्तविक स्थिति को देखते हुए इन परिवारों समेत अति जरूरतमंद समूहों को आवश्यक सहायता से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

सरकार की रणनीति का मुख्य आधार यह है कि पहले से बीपीएल सूची में दर्ज परिवारों के अधिकार और मौजूदा लाभ सुरक्षित रहें। साथ ही, सर्वेक्षण के जरिए सामने आए उन परिवारों को अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराया जाए, जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में हैं। इस तरह सरकार पुराने लाभार्थियों की सुविधाओं को बनाए रखते हुए अधिक जरूरतमंद परिवारों के लिए सहायता का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है।

बीपीएल परिवारों को मिलने वाली मौजूदा सुविधाओं में कोई कटौती प्रस्तावित नहीं है। ऐसे परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पात्रता के अनुसार रियायती दरों पर राशन प्राप्त करते रहेंगे। इसके अलावा उन्हें विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता रहेगा।

बीपीएल श्रेणी के परिवारों को सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सहायता, पात्र लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आवास से जुड़ी योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों का लाभ मिल सकता है। सरकार का कहना है कि इन परिवारों को पहले से मिल रही सुविधाओं को जारी रखा जाएगा।

दूसरी तरफ 1.78 लाख अति गरीब परिवारों के लिए सहायता का स्वरूप केवल राशन या किसी एक आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार इन परिवारों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर उन्हें अलग-अलग विभागों की योजनाओं से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। यानी जिस परिवार को जिस प्रकार की मदद की आवश्यकता होगी, उसे उसी के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार का जोर इन परिवारों को स्थायी आय के साधनों से जोड़ने पर भी रहेगा। केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए पात्र परिवारों को रोजगार आधारित योजनाओं में प्राथमिकता देने के साथ स्थानीय स्तर पर आय के साधन विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

अति गरीब परिवारों को ग्रामीण रोजगार से जोड़ने के लिए वीबी-जी राम जी और अन्य रोजगार योजनाओं में प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी। इससे जरूरतमंद परिवारों को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी आय को स्थिर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जिन परिवारों में स्वरोजगार की क्षमता है, उन्हें प्रशिक्षण, ऋण और अन्य आवश्यक सहायता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सरकार की योजना है कि परिवार के सदस्यों की क्षमता और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उन्हें छोटे व्यवसाय या आय अर्जित करने वाली गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

ग्रामीण हिमाचल की परिस्थितियों को देखते हुए कृषि, पशुपालन और बागवानी को भी परिवारों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। जिन परिवारों के पास जमीन, पशुधन या अन्य स्थानीय संसाधन उपलब्ध हैं, उन्हें संबंधित योजनाओं के साथ जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। जहां पारंपरिक कृषि संभव नहीं है, वहां स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के दूसरे विकल्प तलाशे जाएंगे।

अति गरीब परिवारों की जरूरतों में आवास भी एक प्रमुख मुद्दा है। सरकार की योजना के तहत ऐसे परिवारों की पहचान कर पात्र लोगों को आवास संबंधी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। जिन परिवारों के पास सुरक्षित और पर्याप्त आवास नहीं है, उन्हें उपलब्ध सरकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता दिलाने पर ध्यान दिया जाएगा।

बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी इस विशेष व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें जीवन की जरूरी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हों।

परिवारों के बच्चों की शिक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान देने की योजना है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, स्कूल छोड़ने की स्थिति को रोकने और पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति तथा शैक्षणिक सहायता उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि गरीबी को स्थायी रूप से कम करने के लिए बच्चों की शिक्षा और भविष्य में रोजगार के अवसरों को मजबूत करना जरूरी है।

इसी तरह परिवार की महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग सदस्यों को भी पात्रता के अनुसार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इससे ऐसे परिवारों को नियमित सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी और परिवार के कमजोर सदस्यों की आवश्यकताओं को भी सरकारी योजनाओं के माध्यम से पूरा किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था में परिवार-विशेष जरूरतों का आकलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक ही तरह की सहायता सभी परिवारों के लिए प्रभावी नहीं हो सकती, इसलिए सरकार का प्रयास अलग-अलग परिवारों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं का लाभ उपलब्ध करवाना है।

सर्वेक्षण से सामने आए करीब 90 हजार ऐसे परिवारों का मामला भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है, जो पहले बीपीएल सूची में नहीं थे। इन परिवारों को अब उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति के आधार पर सहायता उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशना सरकार की रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऐसे जरूरतमंद परिवारों को सरकारी कल्याणकारी व्यवस्था से बाहर रहने से रोकना है।

सरकार के इस कदम को गरीबी उन्मूलन की योजनाओं को अधिक लक्षित बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पहले जहां बीपीएल सूची के आधार पर लाभार्थियों की पहचान होती थी, वहीं अब अति गरीबी की स्थिति को भी अलग से चिन्हित कर अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

इस व्यवस्था में अलग-अलग विभागों की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर रहेगा। रोजगार, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, आवास, बिजली, पेयजल, कृषि, पशुपालन और बागवानी जैसी सेवाओं को जरूरतमंद परिवारों से जोड़कर सरकार सहायता को अधिक व्यापक रूप देने की तैयारी कर रही है।

सरकार की मूल रणनीति यह है कि अत्यंत गरीब परिवारों को केवल तत्काल राहत न मिले, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनाने के अवसर भी उपलब्ध हों। रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार, कृषि और अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का उद्देश्य परिवारों की नियमित आय बढ़ाना है, ताकि वे भविष्य में सरकारी सहायता पर कम निर्भर रहें।

वहीं, 2.62 लाख मौजूदा बीपीएल परिवारों के लिए फिलहाल किसी प्रकार की कटौती या बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें पहले की तरह पात्रता के अनुसार राशन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा। इस फैसले से सरकार ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि अति गरीब परिवारों के लिए बनाई जा रही नई व्यवस्था का असर पुराने लाभार्थियों के अधिकारों पर नहीं पड़ेगा।

कुल मिलाकर, हिमाचल सरकार अब गरीबी की पहचान और सहायता वितरण को अधिक जरूरत आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक तरफ मौजूदा बीपीएल परिवारों के लाभ सुरक्षित रखे जाएंगे, तो दूसरी तरफ 1.78 लाख अति गरीब परिवारों को रोजगार, आवास, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के साथ जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने पर जोर दिया जाएगा। नई व्यवस्था का अंतिम लक्ष्य यही है कि सबसे कमजोर परिवारों को तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर मिलें और वे धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकें।